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कार्तिक मास 2026: क्यों सबसे पवित्र माना जाता है यह महीना? जानें महत्व और पौराणिक कथा

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कार्तिक मास भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र और ऊर्जावान समय माना जाता है। चातुर्मास का अंतिम पड़ाव होने के कारण शास्त्रों में इसे सभी महीनों में शिरोमणि ('मासानां कार्तिकः श्रेष्ठः') की संज्ञा दी गई है। यह वही पावन समय है जब चार महीने की योगनिद्रा के बाद भगवान श्री हरि विष्णु जागते हैं और सृष्टि का संचालन पुनः संभालते हैं, जिससे इस माह में किए गए हर धार्मिक कार्य का फल अनंत गुना हो जाता है। आइए जानते हैं कार्तिक मास से जुड़ी कुछ बेहद खास और प्रेरक बातें:-
 
विष्णु-लक्ष्मी का अनंत आशीर्वाद: इस पावन मास को 'दामोदर मास' भी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना जीवन को सुख, समृद्धि और धन-धान्य से सराबोर कर देती है।
 
तुलसी पूजन का अलौकिक फल: कार्तिक और तुलसी जी का नाता बेहद गहरा है। इस पूरे महीने तुलसी के पौधे के पास दीप जलाना और तुलसी विवाह का आयोजन करना घर में असीम शुभता लाता है।
 
पापमुक्ति और आत्मिक शुद्धि: पद्म व स्कंद पुराण के अनुसार, यह महीना जीवन के चारों पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—को साधने का समय है। इस दौरान तड़के पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से मन और आत्मा पूरी तरह शुद्ध हो जाते हैं।
 
उत्सवों का सबसे बड़ा संगम: करवा चौथ का अटूट प्रेम, दीपावली की जगमगाहट, गोवर्धन पूजा की श्रद्धा, भाई दूज का स्नेह और छठ पूजा का महासंकल्प- ये सभी बड़े पर्व इसी एक महीने को खुशियों से भर देते हैं।
 
देव दीपावली की दिव्य छटा: कार्तिक पूर्णिमा के दिन जब भगवान शिव ने असुर तारकासुर का संहार किया था, तब देवताओं ने खुश होकर दीप जलाए थे। इसी कारण इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का अभूतपूर्व महत्व है।
 

कार्तिक मास की मुख्य पौराणिक कथा (तारकासुर वध और त्रिपुरी पूर्णिमा)

कथाएं: कार्तिक मास से जुड़ी कई कथाएं हैं- जैसे धनवंतरी जयंती कथा, लक्ष्मी पूजा कथा, नरक चतुर्दशी की कथा, यम और यमुना की कथा, गोवर्धन पूजा की कथा आदि, लेकिन सबसे ज्यादा महत्व तारकासुर के वध की कथा का माना जाता है।
 

तारकासुर वध की कथा:-

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम के एक शक्तिशाली दैत्य ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकती है। वरदान मिलने के बाद तारकासुर ने तीनों लोकों में अत्याचार मचाना शुरू कर दिया और देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया। तारकासुर के तीन पुत्र थे-ताराक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। इन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या करके तीन अजेय नगरों का निर्माण कराया, जिन्हें 'त्रिपुर' कहा गया। ये नगर सोने, चांदी और लोहे के बने थे और अंतरिक्ष में उड़ सकते थे। वरदान यह था कि तीनों नगर 1,000 वर्षों में केवल एक बार ही एक सीधी रेखा में आएंगे और उन्हें केवल एक ही तीर से नष्ट किया जा सकता था।
 
दैत्यों के अत्याचार से पीड़ित होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे। शिव जी ने देवताओं की रक्षा का वचन दिया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन जब तीनों नगर (त्रिपुर) एक सीधी रेखा में आए, तब भगवान शिव ने अपने दिव्य धनुष और एक ही बाण से तीनों नगरों को भस्म कर दिया और तारकासुर व उसके पुत्रों का अंत कर दिया।
 
इसी विजय की खुशी में देवताओं ने शिव नगरी काशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' और 'देव दीपावली' के रूप में मनाया जाता है।
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