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मार्गशीर्ष माह में पूजें दक्षिणावर्ती शंख, जानिए विधि एवं शुभ मंत्र

बुधवार,दिसंबर 2, 2020
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क्या आप जानते हैं कि अगहन मास को मार्गशीर्ष क्यों कहा जाता है? हम आपको बताते हैं कि अगहन मास को मार्गशीर्ष नाम से क्यों जानते हैं?
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अगहन मास के प्रथम गुरुवार का पूजन 3 दिसंबर 2020 गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन हर घर में धन की देवी मां लक्ष्मी जी का पूजन-अर्चन होगा।
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हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का नवां महीना अगहन कहलाता है। इस मास भगवान विष्णु के इन 12 नामों का जप करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा लक्ष्मी यानी धन प्राप्ति का मार्ग सुलभ हो जाता है।
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प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी सूर्य 15 दिसंबर 2020 को अपनी राशि बदल रहे हैं। इस बार मंगलवार, 15 दिसंबर 2020 को सूर्य धनु राशि में आ रहा है।
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हिन्दी माह अगहन को मार्गशीर्ष मास भी कहते हैं। यह महीना भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप कहा गया है। इन दिनों में श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। आइए जानें... मार्गशीर्ष मास में किन बातों का रखें ध्यान, कैसे चमकाएं अपनी किस्मत?
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दुनियभर में युद्ध, संघर्ष, विध्वंस का दौर जारी है। लोगों के दिलों से नफरत निकालना और उनके दिलों को जोड़ना सचमुच बहुत ही मुश्किल है। किसी से नफरत करना आसान है परंतु किसी से प्रेम करना मुश्‍किल है। ऐसे में बु‍द्ध की शिक्षा ही मनुष्य को बचा सकती है।
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चंद्र ग्रहण हमेशा 'पूर्णिमा' को लगता है, इस बार भी तारीख 30 नवंबर को 'कार्तिक पूर्णिमा' है।
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देवता अपनी दिवाली कार्तिक पूर्णिमा की रात को ही मनाते हैं। इसलिए यह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।
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जानिए इस साल के आखिरी चंद्रग्रहण से जुड़ी सारी जानकारी।
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इस साल कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 को है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान-पुण्य करने का महत्व है। इस दिन किसी पवित्र नदी अथवा जलकुंड में स्नान और दान-पुण्य के कार्य जरूर करना चाहिए।
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हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का आठवां महीना कार्तिक महीना होता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 'कार्तिक पूर्णिमा' कहलाती है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 को आ रही है।
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यदि आप सप्ताह में कुछ खास कार्य करने जा रहे हैं तो निम्न उपायों के साथ अपने दिन की शुरूआत करें। इन उपायों के प्रभावों से आपके कार्य की सफलता के योग और मजबूत होंगे।
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यदि इस दिन आप गंगा स्‍नान करते हैं तो आपको विशेष फल की प्राप्‍ति होगी क्‍योंकि इस दिन आकाश से अमृत वृष्टि होती है। इसी अमृत को पाने के लिए लाखों श्रद्धालु धर्मनगरी में स्‍नान करने आते हैं।
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नारियल इस धरती के सबसे पवित्र फलों में से एक है। इसलिए इस फल को लोग भगवान को चढ़ाते हैं।
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का दिन कई मायनों में बहुत खास हैं। कार्तिक महीने में आनेवाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है।
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इस वर्ष चातुर्मास जुलाई की पहली तारीख से प्रारंभ हुआ था, जिसकी अवधि बुधवार, 25 नवंबर 2020 तक जारी रही। चातुर्मास वह चार महीने की अवधि है, जो आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी से प्रारंभ होकर,
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ज्योतिष में राहु काल को अशुभ माना जाता है। अत: इस काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते है। यहां आपके लिए प्रस्तुत है सप्ताह के दिनों पर आधारित राहुकाल का समय, जिसके देखकर आप अपना दैनिक कार्य कर सकते हैं।
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बुधवार, 25 नवंबर 2020 को देव प्रबोधिनी/देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी बहुत अधिक महत्व की मानी गई है। आइए जानें इस एकादशी की पौराणिक गाथा-
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देवउठनी एकादशी अत्यंत पवित्र तिथि है। इस दिन तन-मन-धन की पवित्रता को बनाए रखने के पूरे प्रयास करना चाहिए। यह तिथि इतनी शुभ है कि मन, कर्म और वचन की थोड़ी सी अशुद्धि भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कौन से 11 काम हैं, जो एकादशी ...
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