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दशहरा पर्व से जुड़ीं परंपराएं एवं कैसे करें शस्त्र पूजन, आप भी जानिए

सोमवार,अक्टूबर 7, 2019
vijayadashami 2019
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प्रात:काल का समय मंगल का, शुभ का माना जाता है। हम में से लगभग हर दूसरे घर में सुबह स्नान कर भगवान की पूजा या नाम स्मरण अवश्य किया जाता है।
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आश्विन शुक्ल दशमी को मनाए जाने वाले दशहरा त्योहार को विजयादशमी कहते हैं। 6 करणों से यह त्योहार मनाया जाता है।
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हम सभी जानते हैं कि हमारी दैनिक दिनचर्या में कुछ बेहद जरूरी काम है जो करने ही चाहिए। इन्हें 9 संस्कारों के नाम से जाना जाता है। आइए अपने बच्चों के साथ खुद भी सीखें कि वे कौन से 9 काम है जो हम सभी को करना चाहिए-
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श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्त है। यह दिन विशेष इसलिए भी है कि इस दिन सोना खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है।
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बगैर संकल्प के किए गए देव कार्य या पितृ कार्य सर्वथा व्यर्थ हैं। संकल्प इस प्रकार किया जाता है...
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पिता के श्राद्ध का अधिकार उसके बड़े पुत्र को है लेकिन यदि जिसके पुत्र न हो तो उसके सगे भाई या उनके पुत्र श्राद्ध कर सकते हैं।
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क्षमा, पवित्रता का प्रवाह है। वीरों का आभूषण है। क्षमा मांगने से अहंकार ढलता और गलता है, तो क्षमा करने से सुसंस्कार पलता और चलता है। क्षमा शीलवान का शस्त्र और अहिंसक का अस्त्र है।
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पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं तथा तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं।
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पृथ्वी लोक से उक्त आत्मा के लिए जो श्राद्ध कर्म किए जाते हैं उससे मार्ग में उसका शरीर पुष्ट होता है। 28 अंश रेतस के रूप में श्रद्धा नामक मार्ग से भेजे जाने वाले पिण्ड तथा जल आदि के दान को श्राद्ध कहते हैं।
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श्राद्ध महालय पक्ष में पितरों के निमित्त घर में क्या कर्म करना चाहिए। यह जिज्ञासा सभी के मन में रहती है। आइए जानें क्या करें पितृ पक्ष में
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अनंत राखी के समान रूई या रेशम के कुंकू रंग में रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठ होती हैं। यदि हरि अनंत हैं तो 14 गांठ हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों की प्रतीक हैं।
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भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी व्रत होता है. इस दिन का विशेष महत्‍व है। इस साल अनंत चतुर्दशी तिथि 12 सितंबर 2019, गुरुवार को है।
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को जलझूलनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे परिवर्तिनी एकादशी एवं डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है।
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परंपरानुसार कहा जाता है कि श्री गणेश को उसी तरह बिदा किया जाना चाहिए जैसे हमारे घर का सबसे प्रिय व्यक्ति जब यात्रा पर निकले तब हम उनके साथ व्यवहार करते हैं।
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इस दिन माता यशोदा ने जलवा पूजन किया था। इसे परिवर्तनी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि चातुर्मास के दौरान अपने शयनकाल में इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं।
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9 सितंबर 2019 को जलझूलनी एकादशी है। आइए जानें क्यों और कब मनती हैं डोल ग्यारस। डोल ग्यारस पर्व भादौ मास के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन मनाया जाता है। कृष्ण जन्म के 11वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था।
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इस दिन माता यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण के वस्त्र धोए थे। इस दिन कान्हा की पालना रस्म भी संपन्न हुई थी। अत: इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।
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दान की सही विधि क्या हो? हमारे शास्त्रों ने दान देने की सही विधि के बारे में भी स्पष्ट निर्देश दिया है। अधार्मिक रीति से दिया गया दान निष्फल व नष्ट हो जाता है। आइए जानते हैं कि दान देने हेतु शास्त्रोक्त नियम क्या हैं-
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शुकदेव मुनि राधा नाम का उच्चारण करते ही इतने भाव-विभोर हो जाते थे कि उन्हें छह महीने की समाधि लग जाती थी। इसलिए कथा में व्यवधान से बचने के लिए उन्होंने राधा नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।
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