1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. Why did the BJP deny Narottam Mishra a ticket in Datia

दतिया में बीजेपी ने क्यों काटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट, बवाल कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस का लाठीचार्ज, टियर गैस का प्रयोग

Why the BJP denied Narottam Mishra a ticket in Datia; Narottam Mishra
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा आलाकमान ने चौंकाते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। 2008 से लेकर 2023 तक दतिया विधानसभा सीट से लगातार 15 साल विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा जो उपचुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके थे और अपना नामांकन फॉर्म भी खरीद कर चुनाव प्रचार भी शुरु कर दिया था।
 
नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का जबरदस्त बवाल किया है। गुस्साएं भाजपा कार्यकर्ताओं पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस को कार्यकर्ताओं को काबू में करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। वहीं बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं को दतिया भाजपा दफ्तर में नजरबंद कर दिया गया है।

आखिर दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट पार्टी ने क्यों काटा यह सवाल अब सियासी गलियारों में सबसे अधिक चर्चा के केंद्र में है।

पार्टी सर्वे में नरोत्तम के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी- भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा वर्ष 2008 से 2023 तक लगातार 15 वर्षों तक दतिया से विधायक रहे। वे शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रहे। उनको 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
 
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2023 की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार के खिलाफ बढ़ी एंटी-इनकंबेंसी मानी गई। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच नाराजगी देखने को मिली थी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
 
उपचुनाव से पहले पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य ईकाई ने दतिया में जो सर्वे कराया उसमें अब भी नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ क्षेत्र में अब भी जबरदस्त एंटी-इनकंबेंसी होना पाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जब पार्टी पहले ही विजयपुर उपचुनाव हार चुकी है तब पार्टी ग्वालियर-चंबल की महत्वपूर्ण सीट दतिया को एक बार फिर नहीं गंवाना चाहती थी, इसलिए पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया। 

स्थानीय संगठन और पुराने नेताओं में नाराजगी- नरोत्तम मिश्रा  का टिकट कटने की एक बड़ी वजह दतिया में बीजेपी के पुराने और सीनियर नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा होना रहा। दतिया में नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी को हाईजैक करने  का आरोप लगाया गया, जिसको पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया। वहीं भाजपा के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना रहा कि पंचायत और नगर पालिका चुनावों में अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं ने खुद को उपेक्षित महसूस किया, जिससे चुनाव के दौरान संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित हुई। उपचुनाव में भाजपा की ओर से नरोत्तम मिश्रा के साथ पार्टी के कई अन्य नेताओं ने खुलकर टिकट की दावेदारी कर दी।
 
ओवर कॉन्फिडेंस और चुनिंदा लोगों से घिर होने का आरोप- राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि डॉ. नरोत्त मिश्रा पर केवल कुछ चुनिंदा लोगों से घिरे रहने के आरोप लगते रहे। इससे भाजपा के कई पुराने नेताओं और प्रभावशाली कार्यकर्ताओं ने दूरी बना ली। माना जाता है कि इसका असर बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता पर पड़ा और दतिया में 2008 से 2003 तक लगातार पार्टी का वोट शेयर गिया, जिससे 2023 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
 
स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी बनी कि विरोधियों के प्रति आक्रामक राजनीतिक शैली और अत्यधिक आत्मविश्वास का नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। विपक्ष लगातार उन पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने की राजनीति करने का आरोप लगाता रहा।

परिवार को लेकर भी उठे सवाल-दतिया की राजनीति में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकुर्ण मिश्रा की भूमिका लगातार चर्चा का विषय रही। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों और विपक्षी दलों ने उनके व्यवहार और प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष और कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि प्रशासनिक कार्यों में अनौपचारिक हस्तक्षेप की धारणा बनी, जिससे आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।

जातीय समीकरण भी बने चुनौती- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया में जाटव, कुशवाह, यादव सहित एससी और ओबीसी वर्ग के मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि भाजपा का स्थानीय नेतृत्व सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया। इसका असर 2023 के चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
 
भाजपा का संदेश: नए चेहरे पर भरोसा-इन सभी राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा ने इस बार आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी दतिया में नए नेतृत्व और नई रणनीति के साथ चुनाव लड़ना चाहती है। अब देखना होगा कि आशुतोष तिवारी संगठन की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं और भाजपा दतिया में अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस हासिल कर पाती है या नहीं।
 
लेखक के बारे में
विकास सिंह
special correspondent.... और पढ़ें
अगला लेख
PM मोदी बोले- 9 महीने में हुआ भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य