US Student Visa Rules Change: भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर?
US Student Visa Rules Change: अगर आप या आपका कोई अपना अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है या जाने की तैयारी में है, तो यह खबर आपके लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो सकती है। अमेरिकी सरकार ने 5 दशक पुराने वीज़ा नियम को खत्म कर दिया है, जिससे अब वहां रुकने की आज़ादी सीमित हो जाएगी।
अमेरिका ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए लागू एक महत्वपूर्ण वीज़ा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने दशकों पुरानी “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)” व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है।
अब विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि अनिश्चितकालीन न होकर एक निश्चित समय के लिए तय होगी। नए नियम 15 सितंबर से लागू होने जा रहे हैं, और इसका सबसे गहरा और सीधा असर वहां पहले से रह रहे भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है।
क्या थी “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)” व्यवस्था?
अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्र F-1 (शैक्षणिक) वीज़ा का उपयोग करते हैं, जबकि एक्सचेंज प्रोग्राम वाले लोग J-1 वीज़ा पर जाते हैं।
15 सितंबर के बाद से स्थिति पूरी तरह बदलने वाली है:
अमेरिकी सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के अनुसार, लगभग 50 साल पुरानी D/S व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा था। कुछ लोग लगातार नए-नए शॉर्ट-टर्म पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर सालों-साल अमेरिका में टिके रहते थे। सरकार का मानना है कि निश्चित अवधि तय होने से आव्रजन प्रणाली पारदर्शी होगी, धोखाधड़ी रुकेगी और नियमित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (सुरक्षा जांच) करना आसान हो जाएगा।
भारतीय छात्रों पर इसका क्या और कितना असर होगा?
आंकड़ों के नज़रिए से देखें तो इस बदलाव का सबसे बड़ा शिकार भारतीय छात्र हो सकते हैं:
क्या इस साल (करंट सेमेस्टर) के दाखिलों पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष के फॉल सेमेस्टर (Fall Semester) में दाखिला लेने वाले छात्रों पर तुरंत कोई बड़ा संकट नहीं आएगा, क्योंकि ज्यादातर वीज़ा प्रक्रियाएं 15 सितंबर की डेडलाइन से पहले ही पूरी हो जाएंगी।
पहले से रह रहे छात्रों के लिए चुनौतियां
असली प्रशासनिक मुसीबत उन छात्रों के लिए खड़ी होगी जो पहले से वहां पढ़ रहे हैं और जिनका कोर्स 4 साल से लंबा खिंचने वाला है।
अब विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि अनिश्चितकालीन न होकर एक निश्चित समय के लिए तय होगी। नए नियम 15 सितंबर से लागू होने जा रहे हैं, और इसका सबसे गहरा और सीधा असर वहां पहले से रह रहे भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है।
क्या थी “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)” व्यवस्था?
अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्र F-1 (शैक्षणिक) वीज़ा का उपयोग करते हैं, जबकि एक्सचेंज प्रोग्राम वाले लोग J-1 वीज़ा पर जाते हैं।
- पहले का नियम: अब तक इन दोनों श्रेणियों के छात्रों को D/S के तहत प्रवेश मिलता था। इसका मतलब था कि उनके वीज़ा पर कोई निश्चित अंतिम तारीख (Expiry Date) नहीं होती थी।
- यूनिवर्सिटी के हाथ में थी कमान: जब तक छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखता था और उसका स्टेटस वैध रहता था, वह अमेरिका में रह सकता था। अगर कोर्स पूरा होने में ज्यादा समय लगता, तो यूनिवर्सिटी के अधिकारी ही उसकी अवधि बढ़ा देते थे।
15 सितंबर के बाद से स्थिति पूरी तरह बदलने वाली है:
- अधिकतम 4 साल की सीमा: नए नियम के तहत शुरुआती प्रवेश की अधिकतम सीमा केवल 4 वर्ष होगी।
- संघीय एजेंसी से लेनी होगी अनुमति: यदि किसी छात्र को डिग्री पूरी करने में 4 साल से अधिक का समय लगता है, तो उसे यूनिवर्सिटी के बजाय सीधे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) से औपचारिक रूप से प्रवास अवधि बढ़ाने (Extension) की मंजूरी लेनी होगी।
- ग्रेस पीरियड आधा हुआ: पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका छोड़ने या दूसरे वीज़ा में स्विच करने के लिए मिलने वाली छूट अवधि (Grace Period) को 60 दिनों से घटाकर सीधे 30 दिन कर दिया गया है।
- मीडिया वीज़ा (I-Category) पर भी कैप: विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के लिए रहने की अवधि अधिकतम 240 दिन और चीनी नागरिकों के लिए केवल 90 दिन तय कर दी गई है।
अमेरिकी सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के अनुसार, लगभग 50 साल पुरानी D/S व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा था। कुछ लोग लगातार नए-नए शॉर्ट-टर्म पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर सालों-साल अमेरिका में टिके रहते थे। सरकार का मानना है कि निश्चित अवधि तय होने से आव्रजन प्रणाली पारदर्शी होगी, धोखाधड़ी रुकेगी और नियमित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (सुरक्षा जांच) करना आसान हो जाएगा।
भारतीय छात्रों पर इसका क्या और कितना असर होगा?
आंकड़ों के नज़रिए से देखें तो इस बदलाव का सबसे बड़ा शिकार भारतीय छात्र हो सकते हैं:
क्या इस साल (करंट सेमेस्टर) के दाखिलों पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष के फॉल सेमेस्टर (Fall Semester) में दाखिला लेने वाले छात्रों पर तुरंत कोई बड़ा संकट नहीं आएगा, क्योंकि ज्यादातर वीज़ा प्रक्रियाएं 15 सितंबर की डेडलाइन से पहले ही पूरी हो जाएंगी।
असली प्रशासनिक मुसीबत उन छात्रों के लिए खड़ी होगी जो पहले से वहां पढ़ रहे हैं और जिनका कोर्स 4 साल से लंबा खिंचने वाला है।
- सख्त जांच: अब यूनिवर्सिटी के भरोसे रहने के बजाय छात्रों को खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के सामने सही साबित करना होगा।
- अतिरिक्त कागज़ी कार्रवाई: बायोमेट्रिक जांच, कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और कड़े नियमों के कारण वीज़ा एक्सटेंशन मिलना अब पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

