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रात के अंधेरे में सक्रिय हो रहे टैंकर माफिया, दिन में निशुल्‍क, रात में 800 में बिक रहा पानी

आपदा में ढूंढा अवसर, 1 हजार से 1200 तक बेच रहे पानी

indore water crisis
इंदौर में भीषण गर्मी के साथ जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने के साथ ही पानी की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि सप्लाई घटती नजर आ रही है। इस बीच नगर निगम प्रशासन का सरकारी पानी रात के अंधेरे में बिक रहा है। लेकिन निगम प्रशासन के अधिकारियों की इसकी भनक तक नहीं है।

रात में बिक रहा सरकारी पानी : वेबदुनिया के सूत्रों ने बताया कि नगर निगम का 6 हजार लीटर का 250 से 300 रुपए वाला टैंकर और निशुल्‍क वाला टैंकर रात में 800 रुपए में बिक रहा है। रात होते ही टैंकर माफिया सक्रिय हो रहे हैं और 800 से हजार रुपए में पानी उपलब्‍ध करा रहे हैं। रात में ये कारनामा करने के लिए टैंकर पर से निशुल्‍क जल वितरण का पर्चा हटा देते हैं। सूत्रों ने बताया कि यह ज्‍यादातर 6 हजार लीटर वाले टैंकर में हो रहा है। लेकिन नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है।

नजर नहीं आ रहे निशुल्‍क पानी के पोस्‍टर : नगर निगम प्रशासन टैंकर माफिया पर लगाम नहीं लग पा रही है। नगर निगम द्वारा निःशुल्क पानी वितरण के लिए चलाए जा रहे टैंकरों पर पहले बड़े-बड़े अक्षरों में ‘नगर निगम टैंकर- निःशुल्क पानी’ लिखा होता था, जिससे लोगों को पहचानने में आसानी होती थी। लेकिन अब निगम द्वारा लगाए जा रहे पोस्टर कुछ ही दिनों में निकल जाते हैं और इसका फायदा टैंकर संचालक खुलकर उठा रहे हैं। कई टैंकर चालक निगम के पोस्टर हटाकर अपने हिसाब से काम कर रहे हैं और जब उनसे सवाल किया जाता है तो वे गर्मी या पोस्टर खराब होने का बहाना बना देते हैं। कई टैंकर चालक दिन-रात पानी बेचने में लगे हुए हैं और जल संकट के बीच पानी की कालाबाजारी कर रहे हैं। टैंकरों की निगरानी और सख्ती की कमी के कारण पानी माफिया बेखौफ होकर काम कर रहा है। वहीं जिम्मेदार ठेकेदारों ने इस ओर से अपनी आंखें मूंद ली हैं। नगर निगम प्रशासन ने टैंकर माफिया की चालाकियों के आगे घुटने टेक दिए हैं। न अपने प्रशासन के टैंकरों की कालाबाजारी पर रोक लगा पा रहे हैं और न ही निजी टैंकरों की कीमतों को कंट्रोल कर पा रहे हैं।

ये भी हो रहा शहर में : नगर निगम के कुछ कर्मचारी और नेता मिलकर बंगले वालों के घरों में पानी दे रहे हैं। वार्ड क्रमांक 33 में पानी के गंभीर संकट से तंग आकर आम जनता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ सुखलिया की शालीमार बंगलो पार्क कॉलोनी के बड़े-बड़े बंगलों में निगम के टैंकरों से सीधे पानी की सप्लाई की जा रही है। आम जनता के हक का पानी चुनिंदा घरों को बांटकर नगर निगम के जिम्मेदार अपनी जेबें भर रहे हैं। शालीमार बंगलो पार्क में भेजे जा रहे पीले रंग के बड़े टैंकर (नंबर एमपी09 एचजी3192) से वार्ड क्रमांक को जानबूझकर मिटा दिया गया है, साथ ही फ्री जल सेवा और पानी बेचते हुए पाए जाने पर अनिवार्य रूप से लिखे जाने वाले मोबाइल नंबर तक इस टैंकर से गायब हैं। इस टैंकर पर न तो कोई सरकारी जानकारी है और न ही यह पता है कि यह पानी कहां से भरकर लाया गया है। हालांकि पिछले 5 दिनों में निगम ने 6 निजी टैंकरों को पकडा और कालाबाजारी करने पर कार्रवाई की है।

इन इलाकों में ज्‍यादा दिक्‍कत : सुदामा नगर, द्वारकापुरी, पालदा, बाणगंगा और खजराना जैसे क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, जहाँ बोरवेल सूखने के कारण लोग पूरी तरह निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। निजी टैंकर संचालक पानी के एक टैंकर के लिए 1000 से 1500 तक वसूल रहे हैं। मांग इतनी अधिक है कि ग्राहकों को एक दिन पहले बुकिंग करनी पड़ रही है।

बर्बाद करेगी भाजपा, जल प्रबंधन व्यवस्था फेल, 15 जिले भीषण जल संकट : कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि इंदौर सहित प्रदेश के कई जिलों में हालात बेहद गंभीर हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर पानी के लिए भटक रही हैं, लोग घंटों टैंकरों का इंतजार कर रहे हैं और कई जगहों पर चक्काजाम व प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के संरक्षण में ‘टैंकर माफिया’ सक्रिय है, जो जल संकट को कारोबार में बदल रहा है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, मुरैना, शिवपुरी, खरगोन, बड़वानी और धार समेत अनेक जिले गंभीर जल संकट की चपेट में हैं, लेकिन सरकार और स्थानीय निकाय स्थिति संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि अमृत योजना के करोड़ों रुपए का सही उपयोग नहीं हुआ। पर्यावरणविद् भालू मोंढे ने चेतावनी दी है कि यह केवल मौसमी संकट नहीं, बल्कि भविष्य में और गंभीर रूप ले सकता है। जल संवर्धन के लिए लंबे समय से काम करने वाले लेखक और पर्यावरणविद् सुनील चतुर्वेदी ने बताया कि अगर चीजों को अभी नहीं संभाला गया तो आगे हालात बहुत बदहाल और बेकाबू होने वाले हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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