शारदीय नवरात्रि 2026: नौदुर्गा में से किस माता ने किया किस असुर का वध?
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं और 'दुर्गा सप्तशती' (मार्कंडेय पुराण) के अनुसार, देवी के विभिन्न स्वरूपों ने सृष्टि को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त कराने के लिए अनेक महाअसुरों का वध किया था। चलिए जानते हैं कि किस माता ने किया किस अनुसर का वध।
माँ शैलपुत्री:
वध किए गए असुर: मधु और कैटभ, दुर्गमासुर (प्रारंभिक युद्ध में)
विशेषता: पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री ने अपने पूर्व जन्म में सती रूप में और फिर शैलपुत्री रूप में असुरों के विनाश की नींव रखी।
माँ ब्रह्मचारिणी
वध किए गए असुर: तपस्या और नियम के माध्यम से असुर सेना का विनाश
विशेषता: माँ ब्रह्मचारिणी कठोर तप का प्रतीक हैं। इन्होंने अपने तपोबल से राक्षसों के मनोबल और उनकी बुरी शक्तियों को क्षीण किया।
माँ चंद्रघंटा
वध किए गए असुर: चिक्षुर जो महिषासुर की चतुरंगिणी सेना का सेनापति था
विशेषता: मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा धारण करने वाली माँ चंद्रघंटा के भयानक घंटे की ध्वनि से ही असुर मूर्छित होकर मरने लगते थे। इन्होंने महिषासुर के कई बड़े सेनापतियों का अंत किया।
माँ कुष्मांड:
वध किए गए असुर: धूमलोचन, दैत्यराज अरिष्टासुर और असुर सेनापति
विशेषता: मंद हंसी से ब्रह्मांड की रचना करने वाली माँ कुष्मांड अपनी आठ भुजाओं के अस्त्र-शस्त्रों से ब्रह्मांड में उपद्रव मचाने वाले दैत्यों का संहार करती हैं।
माँ स्कंदमाता
वध किए गए असुर: तारकासुर (कार्तिकेय जी के माध्यम से नेतृत्व)
विशेषता: भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इन्होंने देवताओं की सेना का नेतृत्व कर तारकासुर के वध में मुख्य भूमिका निभाई।
माँ कात्यायनी
वध किए गए असुर: महिषासुर (मुख्य रूप से)
विशेषता: महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुई माँ कात्यायनी को 'महिषासुरमर्दिनी' भी कहा जाता है। इन्होंने ही देवताओं को प्रताड़ित करने वाले महाबलशाली महिषासुर का वध किया था।
माँ कालरात्रि
वध किए गए असुर: रक्तबीज, चंड और मुंड का संहार किया जो शुंभ और निशुंभ के सेनापति थे।
विशेषता: माँ का यह सबसे भयानक रूप है। जब असुर रक्तबीज के खून की हर बूंद से नए राक्षस पैदा हो रहे थे, तब माँ कालरात्रि ने उसका सारा खून पीकर उसका अंत किया था।
माँ महागौरी
वध किए गए असुर: शुंभ और उसकी सेना का संहार किया।
विशेषता: अत्यंत शांत और गौर वर्ण वाली माँ महागौरी ने देवताओं की प्रार्थना पर प्रकट होकर अपनी शक्ति से शुंभ-निशुंभ की विशाल सेना का विनाश किया था।
माँ सिद्धिदात्री
वध किए गए असुर: निशुंभ का अंतिम वध
विशेषता: सभी सिद्धियों को देने वाली माँ सिद्धिदात्री ने ही अंत में निशुंभ नामक दैत्य का वध करके देवताओं को उनका स्वर्ग लोक पुनः लौटाया था।

