1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. नवरात्रि
  4. Know the auspicious timings for Ghat Sthapana and worship during Sharadiya Navratri

शारदीय नवरात्रि 2026: घट स्थापना और पूजा के शुभ मुहूर्त

Know the auspicious timings for Ghat Sthapana and worship during Sharadiya Navratri
Sharadiya Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह शक्ति की उपासना का पर्व है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नवमी तक मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस बार शारदीय नवरात्रि 11 अक्‍टूबर, रविवार 2026 से आरंभ हो रहे हैं। आइए जानते हैं देवी दुर्गा की घट स्थापना और पूजा के शुभ मुहूर्त...
 

घट स्थापना का मुहूर्त

सुबह 06:19 से 10:11 बजे तक।
 

पूजा के शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक। 
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:56 से 06:21 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 से 02:50 बजे तक।
 

चौघड़िया मुहूर्त 

लाभ चौघड़िया: सुबह 09:13 से 10:41 बजे तक।
अमृत चौघड़िया: सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक।
शुभ चौघड़िया: दोपहर 01:35 से 03:02 बजे तक।
अमृत चौघड़िया: शाम 07:29 से रात्रि 09:02 बजे तक।
चर चौघड़िया: सुबह 07:46 से 09:13 बजे तक।
 

महिषासुर मर्दनी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस महिषासुर के अत्याचारों से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था। देवी और महिषासुर के बीच 9 दिनों तक भीषण युद्ध चला और 10वें दिन मां दुर्गा ने उसका वध कर दिया।
 

भगवान श्रीराम ने की थी शक्ति पूजा

रामायण के अनुसार, भगवान श्री राम ने रावण के साथ युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए आश्विन माह में 9 दिनों तक देवी दुर्गा की कठिन उपासना की थी। इसके बाद ही उन्होंने दशमी को रावण का वध किया था, जिसे पावन पर्व 'विजयादशमी' या 'दशहरा' के रूप में मनाया जाता है। 
 

प्रमुख रीति-रिवाज और परंपराएं

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है, जिसमें जौ (जवारे) बोए जाते हैं और अखंड ज्योति जलाई जाती है। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक या जोड़े में (पहला और आखिरी दिन) फलाहार या निर्जला व्रत रखते हैं।
 
अष्टमी या नवमी के दिन 9 छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया का विशाल आयोजन होता है।
 

आत्म शुद्धि और भक्ति का पर्व 

नवरात्रि का समय केवल बाह्य उत्सव का ही नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, ध्यान और संयम का भी समय माना जाता है। यह पर्व समाज में स्त्री शक्ति, करुणा और साहस के सम्मान का संदेश देता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों (नवदुर्गा) की पूजा की जाती है।
अगला लेख
पितृ पक्ष 2026: सर्वपितृ अमावस्या पर विदा होंगे पितर, जानें तिथि, पावन मुहूर्त और श्राद्ध कर्म विधि