कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? ममता बनर्जी की इस सांसद ने अपने पहले ही भाषण में कमाल कर दिया
Menaka Guruswamy Maiden Speech: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने संसद में अपने पहले भाषण (मेडन स्पीच) में ही धमाल मचा दिया। बुधवार, 5 अगस्त 2026 को राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेस) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान उन्होंने सिर्फ दो मिनट के भाषण में न्यायपालिका में विविधता की कमी पर तीखा हमला बोला।
Rajya Sabha MP @MenakaGuruswamy speaks on The Supreme Court (Number Of Judges) Amendment Bill, 2026 pic.twitter.com/f4tDXUpppb
— AITC in Parliament (@AITC_Parliament) August 5, 2026
पारंपरिक रूप से मेडन स्पीच में समय की कोई पाबंदी नहीं होती, लेकिन उपसभापति हरिवंश ने उन्हें ज्यादा समय नहीं दिया। फिर भी मेनका के तेजतर्रार अंदाज और तथ्यों ने सदन का माहौल बदल दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की समस्याएं चार और जज बढ़ाने से हल नहीं होंगी। समस्या यह है कि केंद्र सरकार महिलाओं, निम्न जातियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और समलैंगिक (गे) लोगों को न्यायपालिका में नियुक्त नहीं करना चाहती।
मेनका ने आंकड़े भी पेश किए
आप सिर्फ उन्हीं जजों को नियुक्त करते हैं जो आपकी विचारधारा से मेल खाते हों। उन्होंने आंकड़े भी पेश किए। हाईकोर्ट्स में 30 प्रतिशत पद खाली हैं। हाईकोर्ट जजों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 14 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को मिलाकर न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व 20 प्रतिशत से कम है। 2018 से 2026 के बीच केंद्र ने सिर्फ 3 प्रतिशत एससी, 2 प्रतिशत एसटी और 12 प्रतिशत ओबीसी जज नियुक्त किए। उन्होंने जोर दिया कि संविधान की भावना के साथ काम करके ही असली समस्याएं हल होंगी।
कौन हैं मेनका गुरुस्वामी?
डॉ. मेनका गुरुस्वामी का जन्म 27 नवंबर 1974 को हैदराबाद में हुआ। वे सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट हैं और 2018 में धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर कराने वाले ऐतिहासिक मामले में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए जानी जाती हैं। वे भारत की पहली खुले तौर पर LGBTQ+ पहचान वाली सांसद हैं।
ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड से शिक्षा प्राप्त मेनका ने कोलंबिया लॉ स्कूल में भी पढ़ाया है। उनके पिता मोहन गुरुस्वामी पूर्व बीजेपी रणनीतिकार और यशवंत सिन्हा के सलाहकार रहे हैं। 2026 में ममता बनर्जी की टीएमसी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए नामित किया। वे बिना मुकाबले चुनी गईं और अप्रैल 2026 में शपथ ली।
मेनका का यह पहला संसदीय भाषण न सिर्फ यादगार रहा बल्कि न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व और संविधान के मूल्यों पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गया। कई लोगों ने इसे उनके कानूनी अनुभव और साहस का प्रमाण माना।
सुप्रीम कोर्ट में रखा था टीएमसी का पक्ष
मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनकी सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके कानूनी मामलों की पैरवी की। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तत्कालीन राज्य सरकार/ममता बनर्जी के बीच हुए विवाद में मेनका गुरुस्वामी ने ममता और राज्य सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा था। ED द्वारा तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के साथ-साथ मेनका गुरुस्वामी ने भी TMC का पक्ष रखा।

