Ravneet Singh Bittu : रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा मंजूर, पंजाब चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति में बड़ा बदलाव
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।
रवनीत सिंह बिट्टू वर्ष 2024 से केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था। अगस्त 2024 में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। यह सीट कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
पंजाब चुनाव पर रहेगा फोकस
रिपोर्टों के अनुसार, बिट्टू अब अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
इस्तीफे के बाद जताया आभार
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि वह विकसित भारत के विजन, राष्ट्रवाद और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता आगे भी जारी रखेंगे।
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
50 वर्षीय रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता बेअंत सिंह के पोते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की और 2009 में आनंदपुर साहिब से पहली बार लोकसभा सांसद बने। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
साल 2021 में वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता भी रहे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से करीब 20,942 वोटों के अंतर से हार गए। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जलालाबाद सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल से हार का सामना करना पड़ा।

