CJP Protest : सीजेपी आंदोलन फिर होगा शुरू? अभिजीत दिपके ने बॉन्ड की खबरों को नकारा, दिल्ली पुलिस ने क्या बताया
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ऐलान किया है कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना प्रदर्शन फिर शुरू करेगी। उन्होंने उन खबरों को गलत बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने और पार्टी के अन्य नेताओं ने भविष्य में प्रदर्शन नहीं करने के लिए बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए हैं।
दिपके का यह बयान CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद आया है। दोनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। प्रदर्शन पर रोक लगाने वाले बॉन्ड को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज होने के बाद दिपके ने सफाई दी। उनका कहना है कि पार्टी ने भविष्य में प्रदर्शन नहीं करने के लिए कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और वह अपनी मुहिम जारी रखेगी।
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में दिपके ने कहा कि CJP ने अपने सदस्यों को भविष्य में प्रदर्शन करने से रोकने वाला कोई बॉन्ड नहीं भरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी सड़कों पर उतरकर अपना अभियान जारी रखेगी।
यह बयान उन दावों के जवाब में आया, जिनमें कहा जा रहा था कि हिरासत से रिहा होने के बाद CJP नेताओं ने भविष्य में प्रदर्शन नहीं करने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस पूरे विवाद में हिरासत से रिहाई के समय तय की गई कानूनी शर्तें अहम हैं।
दिल्ली पुलिस ने 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहाई की बात कही
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा था कि CJP के नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। पुलिस के मुताबिक, अदालत ने तीनों नेताओं को 50,000 रुपये के बॉन्ड और जमानतदार की शर्त पर रिहा किया। पुलिस के अनुसार, नेताओं को एक साल तक शांति और सद्भाव बनाए रखने तथा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों से दूर रहने की शर्त दी गई थी।
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 का उल्लेख किया था। धारा 126 संभावित शांति भंग को रोकने के लिए सुरक्षा की कार्रवाई से संबंधित है, जबकि धारा 170 कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई का प्रावधान करती है। दिल्ली पुलिस के बयान में भविष्य के सभी प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई थी। ऐसे में विवाद का मुख्य मुद्दा बॉन्ड की वास्तविक शर्तें और उन पर लागू कानूनी प्रक्रिया है।
दादी के निधन के बाद यात्रा की व्यवस्था को लेकर भी विवाद
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एक अधिकारी अभिजीत दिपके की दादी के निधन की जानकारी मिलने के बाद उनके लिए यात्रा की व्यवस्था करने की पेशकश करता सुनाई देता है। पुलिस ने यह वीडियो उन आरोपों के जवाब में जारी किया, जिनमें कहा गया था कि रिहाई में देरी के कारण दिपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।
दिल्ली पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी और डीसीपी नेहा यादव के अनुसार, दिपके को निधन और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी देने के बाद अधिकारियों ने उन्हें सहायता देने की पेशकश की थी। पुलिस द्वारा जारी वीडियो में एक अधिकारी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि दिपके कहीं जाना चाहते हैं, तो बस, फ्लाइट या किसी अन्य माध्यम से उनके लिए यात्रा की व्यवस्था की जा सकती है। वीडियो के मुताबिक, अधिकारी ने अपने आधिकारिक फोन नंबर के जरिए दिपके की उनके परिवार से बात कराने में मदद की पेशकश भी की। हालांकि, दिपके ने पुलिस के इस पक्ष पर सवाल उठाए हैं।
दिपके ने फोन और वकील से संपर्क नहीं करने देने का लगाया आरोप
अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया था कि दादी के निधन की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने परिवार के सदस्य से संपर्क करने के लिए फोन मांगा, लेकिन उन्हें फोन उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने अपने वकील से बात नहीं करने देने का आरोप भी लगाया। इस तरह, जहां पुलिस वीडियो के आधार पर सहायता की पेशकश किए जाने की बात कह रही है, वहीं दिपके ने हिरासत के दौरान फोन और वकील से संपर्क को लेकर अपनी शिकायतें दोहराई हैं।
रिहाई के बाद महाराष्ट्र रवाना हुए अभिजीत दिपके
हिरासत से रिहा होने के बाद दिपके रविवार को महाराष्ट्र के लिए रवाना हुए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह अपनी दादी के निधन के बाद परिवार के साथ रहने के लिए घर जा रहे हैं। CJP की ओर से प्रदर्शन फिर शुरू करने के ऐलान और बॉन्ड की शर्तों को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी आगे किस तरह अपना आंदोलन जारी रखती है और इस संबंध में संबंधित कानूनी शर्तों की व्याख्या क्या होती है।

