CJP नेताओं की गिरफ्तारी और रिहाई पर दिल्ली पुलिस का बयान, किन धाराओं में हुई कार्रवाई? जानिए पूरी बात
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था, लेकिन रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया। कॉजपा और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इससे पूर्व रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में कॉजपा नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।
रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में कॉजपा नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था। सूत्रों के अनुसार, कॉजपा नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए प्रतिभूति) और धारा 170 (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई की गई।
दिल्ली पुलिस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर 2026 को बीएनएसएस की धारा 126/170 के तहत एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली कैंट स्थित एसईएम अदालत में पेश किया गया।
पोस्ट में कहा गया कि एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50,000 रुपए का जमानत बांड भरवाया गया। इसके बाद एसईएम की अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अभिजीत, सौरव और आशुतोष को रिहा कर दिया।
शनिवार को सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई दिल्ली में सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के बीच हुई, जहां प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार सहित विपक्ष के कई नेताओं को भी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिया गया था।

