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मजदूरों का मसीहा, गली-मोहल्लों का सुपरस्टार: कैसे मिथुन चक्रवर्ती ने बॉलीवुड में बनाया अपना अलग साम्राज्य
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ सितारे ऐसे हुए हैं जिनकी लोकप्रियता को केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। मिथुन चक्रवर्ती उन्हीं कलाकारों में से एक हैं। एक दौर ऐसा था जब महानगरों के आलीशान सिनेमाघरों से ज्यादा उनकी लोकप्रियता छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में दिखाई देती थी। रिक्शा चलाने वाले, मजदूरी करने वाले, फैक्ट्री में काम करने वाले और समाज के निचले तबके के लोग उन्हें अपना हीरो मानते थे। मिथुन केवल अभिनेता नहीं थे, बल्कि उन लोगों की उम्मीद थे जो पर्दे पर खुद को देखना चाहते थे।
संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन
मिथुन चक्रवर्ती का फिल्मी सफर आसान नहीं था। उनका जन्म एक साधारण बंगाली परिवार में हुआ। युवावस्था में उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। कहा जाता है कि उनके करियर को लेकर पिता से उनके संबंध हमेशा सहज नहीं रहे। परिवार चाहता था कि वे एक सुरक्षित और पारंपरिक जीवन चुनें, लेकिन मिथुन की नजरें अभिनय की दुनिया पर टिकी थीं।
अपना सपना पूरा करने के लिए उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। अभिनय को गंभीरता से सीखने के उद्देश्य से उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित संस्थान एफटीआईआई से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उस समय अभिनय की औपचारिक शिक्षा लेना बहुत कम कलाकारों के लिए संभव होता था, लेकिन मिथुन ने अपने हुनर को निखारने के लिए यह रास्ता चुना।
आर्ट फिल्म से शुरुआत और राष्ट्रीय पुरस्कार
अधिकांश सितारे व्यावसायिक फिल्मों से पहचान बनाते हैं, लेकिन मिथुन का सफर बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रसिद्ध निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म मृगया से की। यह एक गंभीर और कलात्मक फिल्म थी।
पहली ही फिल्म में मिथुन ने ऐसा अभिनय किया कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह उपलब्धि किसी भी नए कलाकार के लिए असाधारण मानी जाती है। बाद में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता को और मजबूत साबित करते हुए तहादेर कता और स्वामी विवेकानंद के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए। इन फिल्मों ने साबित किया कि मिथुन केवल व्यावसायिक स्टार नहीं बल्कि एक उत्कृष्ट अभिनेता भी हैं।
डिस्को डांस की नई क्रांति
1980 का दशक आते-आते मिथुन चक्रवर्ती ने भारतीय सिनेमा में एक नई पहचान बना ली। फिल्म डिस्को डांसर ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया। इस फिल्म के बाद मिथुन केवल अभिनेता नहीं रहे, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन गए।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने पश्चिमी डांस स्टाइल की नकल भर नहीं की। उन्होंने अपने शरीर की लय, ऊर्जा और मंचीय उपस्थिति के आधार पर एक अलग डिस्को डांस शैली विकसित की। उनके डांस स्टेप्स की नकल देशभर के युवा करने लगे। छोटे शहरों के स्टेज शो से लेकर शादी-ब्याह तक हर जगह मिथुन का असर दिखाई देता था।
एक्शन की भी अलग पहचान
जिस तरह उन्होंने डांस में अपनी अलग शैली बनाई, उसी तरह एक्शन में भी वे दूसरों से अलग नजर आए। उनकी फाइट्स में केवल मारधाड़ नहीं होती थी बल्कि एक खास तरह की फुर्ती और लय होती थी। उनकी लंबी कद-काठी, तेज मूवमेंट और अलग बॉडी लैंग्वेज ने उन्हें एक विशिष्ट एक्शन हीरो बना दिया।
मिथुन के एक्शन में आम आदमी की लड़ाई दिखाई देती थी। वे अक्सर ऐसे किरदार निभाते थे जो अन्याय के खिलाफ खड़े होते थे। यही कारण था कि दर्शक उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते थे।
आम आदमी का सबसे बड़ा हीरो
बॉलीवुड में कई सुपरस्टार आए, लेकिन बहुत कम कलाकार ऐसे हुए जिनकी लोकप्रियता मजदूर वर्ग और निम्न आय वर्ग के बीच इतनी गहरी रही हो। मिथुन की फिल्मों के दर्शक वे लोग थे जो दिनभर मेहनत-मजदूरी करते थे और शाम को कुछ घंटों के मनोरंजन के लिए सिनेमा हॉल पहुंचते थे।
उनकी फिल्मों में अक्सर गरीबी, संघर्ष, बदला, प्रेम और न्याय जैसे विषय होते थे। उनके किरदार आम लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते थे। शायद यही वजह थी कि ठेला चलाने वाले, फैक्ट्री वर्कर, रिक्शा चालक और छोटे दुकानदार उन्हें अपना नायक मानते थे।
मिथुन की लोकप्रियता तथाकथित "मास ऑडियंस" के बीच इतनी मजबूत थी कि कई बार समीक्षक उनकी फिल्मों को गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन टिकट खिड़की पर दर्शक उन्हें लगातार सफल बनाते रहे।
रिकॉर्ड बनाने वाला स्टार
आज के दौर में बड़े सितारे साल में एक या दो फिल्में करते हैं, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती का दौर अलग था। वे एक साथ कई फिल्मों में काम करते थे। उनकी व्यस्तता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक समय ऐसा भी आया जब एक ही वर्ष में उनकी 17 फिल्में रिलीज हुईं।
यह उपलब्धि केवल मेहनत नहीं बल्कि उनकी अपार लोकप्रियता का प्रमाण भी थी। निर्माता जानते थे कि मिथुन का नाम पोस्टर पर होने भर से छोटे शहरों और कस्बों के दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आएंगे।
एक स्टार, जिसे जनता ने बनाया
मिथुन चक्रवर्ती की कहानी इस मायने में खास है कि उन्हें किसी फिल्मी परिवार का सहारा नहीं मिला। उन्होंने संघर्ष किया, अभिनय सीखा, आर्ट फिल्मों में अपनी प्रतिभा साबित की, फिर व्यावसायिक सिनेमा में ऐसा मुकाम हासिल किया जो बहुत कम कलाकारों को नसीब होता है।
वे उन दुर्लभ सितारों में शामिल हैं जिन्होंने समान सफलता के साथ कला और व्यावसायिक सिनेमा दोनों में अपनी पहचान बनाई। एक तरफ राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाला संवेदनशील अभिनेता और दूसरी तरफ डिस्को डांस तथा जनसामान्य के मनोरंजन का सबसे बड़ा चेहरा, मिथुन चक्रवर्ती का व्यक्तित्व भारतीय सिनेमा में अद्वितीय है।
यही कारण है कि दशकों बाद भी जब भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय जननायकों की चर्चा होती है, तो मिथुन चक्रवर्ती का नाम सम्मान और प्यार के साथ लिया जाता है। वे सिर्फ स्टार नहीं थे, बल्कि उस भारत के नायक थे जिसकी आवाज अक्सर बड़े पर्दे पर सुनाई नहीं देती है।
