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जन्म नक्षत्र अनुसार जानिए कौनसा पौधा लगाएं

गुरुवार,जून 4, 2020
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सूर्य जब चंद्र के रोहणी नक्षत्र में जाता है, तो सूर्य की तपन कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। कहते है यदि रोहिणी नौतपा व रोहिणी नक्षत्र के कम से कम 9 दिन के अंतराल में बारिश ना हो तो वर्षा उस वर्ष अधिक होती है।
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सूर्य ने परिभ्रमण चक्र में चलते हुए अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है और सूर्य मेष राशि में परिभ्रमण कर रहा है।
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ज्योतिष के अनुसार ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति का जीवन उसकी जन्म कुंडली के अनुसार चलता है। कब अच्छा समय आएगा और कब समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, यह सब कुंडली को देखकर जाना जा सकता है।
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पुष्‍य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है। प्रत्येक नक्षत्र का एक प्रतिनिधित्व वृक्ष या पौधा होता है। इसी तरह पुष्‍य नक्षत्र का भी एक पेड़ है जिसकी पूजा करने से सभी तरह का संकट मिटता है और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है
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पुष्य नक्षत्र को खरीददारी के लिए शुभ दिन माना गया है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, वाहन, भूमि और मकान आदि खरीदे जाते हैं। लेकिन इस दिन ज्योतिष के कुछ ऐसे भी उपाय होते हैं जिन्हें करने से कई तरह की परेशानी दूर हो सकती है। आओ जानते हैं ऐसे ही 6 उपाय।
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पुष्य नत्रक्ष में अक्सर लोग सोना या चांदी खरीदते हैं लेकिन लोहा खरीदना चाहिए या नहीं इस बारे में लोगों में संशय रहता है। हालांकि जयोतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए विशेष मुहूर्त माना गया है। कहते हैं कि इस मुहूर्त में खरीदी गई कोई भी ...
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ज्योतिषियों के अनुसार इस बार पुष्‍य नक्षत्र दो दिन रहेगा। 21 को सोम पुष्य और 22 को मंगल पुष्य नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र 21 अक्टूबर शाम 5:33 बजे से प्रारंभ होकर 22 अक्टूबर मंगलवार को शाम 4:40 बजे तक रहेगा। इन दोनों दिन अन्य शुभ योगों का संयोग भी ...
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ज्योतिष के अनुसार वैसे तो पुष्‍य नक्षत्र बहुत ही शुभ दिन होना है लेकिन कुछ स्थिति में इस दिन कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं।
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ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगलकर्ता भी कहा गया है। इसीलिए पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए विशेष मुहूर्त माना जाता है। कहते हैं कि इस मुहूर्त में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी, शुभ फल देने वाली और अक्षय होती है। पुष्य नक्षत्र किसी भी ...
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हिंदू कालगणना का आधार नक्षत्र, सूर्य और चंद्र की गति पर आधारित है। इसमें नक्षत्र को सबसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। हमारे आकाश या अंतरिक्ष में 27 नक्षत्र दिखाई देते हैं। जिस तरह सूर्य मेष से लेकर मीन तक भ्रमण ...
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क्या आप जानते हैं की दुनिया में जितने लोग हैं सभी की बनावट, रंग, गुण, स्वभाव एवं कार्य क्षेत्र इत्यादि-इत्यादि में भिन्नता क्यों होती है? तारा मंडल को ग्रह, नक्षत्र एव राशि में कैसे विभाजित करते हैं? नक्षत्र का पौराणिक महत्व क्या है? नक्षत्र और राशि ...
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आर्द्रा का अर्थ होता है नमी। आकाश मंडल में आर्द्रा छठवां नक्षत्र है। यह राहु का नक्षत्र है व मिथुन राशि में आता है।
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रोहिणी नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या 5 है। भूसे वाली गाड़ी जैसी आकृति का यह नक्षत्र फरवरी के
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1.आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। प्राचीन आचार्यों ने हमारे आकाश मंडल को 28 नक्षत्र मंडलों में बांटा है। नक्षत्रों की जानकारी की इस सीरीज में इस बार जानिए पांचवां नक्षत्र मृगशिरा।
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1.आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। प्राचीन आचार्यों ने हमारे आकाश मंडल को 28 नक्षत्र मंडलों में बांटा है। नक्षत्रों की जानकारी की इस सीरीज में इस बार जानिए चौथा नक्षत्र रोहिणी।
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1.आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। प्राचीन आचार्यों ने हमारे आकाश मंडल को 28 नक्षत्र मंडलों में बांटा है। नक्षत्रों की जानकारी की इस सीरीज में इस बार जानिए तीसरा नक्षत्र कृतिका या कृत्तिका।
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1.आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। प्राचीन आचार्यों ने हमारे आकाश मंडल को 28 नक्षत्र मंडलों में बांटा है। इन्हें आसमान के 12 भागों अर्थात 12 राशियों के अंतर्गत 27 नक्षत्रों में विभाजित किया है। नक्षत्रों की जानकारी की इस सीरीज में इस ...
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1.आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। वैज्ञानिकों ने हमारे आकाश मंडल को 88 नक्षत्र मंडलों में बांटा है, तो वैदिक ऋषियों ने 28 नक्षत्र मंडलों में। आसमान के 12 भागों (राशियों) में बंटवारा कर देने के बाद भी ऋषि-मुनियों ने इसके और सूक्ष्‍म ...
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मृगशिरा का अर्थ है मृग का शीष। आकाश मंडल में मृगशिरा नक्षत्र 5वां नक्षत्र है। यह सबसे महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है। आकाश में यह हिरण के सिर के आकार का नजर आता है।
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