0

आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य आने से धरती होती है रजस्वला, खीर-पूड़ी और पंछी के आशियाने देंगे शुभ फल

बुधवार,जून 22, 2022
0
1
Rohini nakshatra me surya: प्रतिवर्ष ग्रीष्म ऋतु के ज्येष्ठ माह में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करने लगता है। सूर्य का यह गोचर काल लगभग 15 दिनों तक के लिए रहता है। इस बार सूर्य ने 25 मई बुधवार को 8 बजकर 16 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया ...
1
2
ज्येष्‍ठ माह में सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए भ्रमण करने लगता है तब शुरुआता के 9 दिन नौतपा रहता। इस बार नौतपा 25 मई 2022 को प्रारंभ होगा, जो 3 जून तक चलेगा। आओ जानते हैं कि रोहिणी नक्षत्र क्या है और क्या है इसकी कथा।
2
3
Effect of 27 constellations: यदि आप आकाश को 12 समान भागों में विभाजित करते हैं, तो प्रत्येक भाग को राशि कहा जाता है, लेकिन अगर आप आकाश को 27 समान भागों में विभाजित करते हैं तो प्रत्येक भाग को नक्षत्र कहा जाता है।
3
4
Pushya Nakshtra पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। 27 नक्षत्रों के क्रम में आठवें स्थान पर पुष्य नक्षत्र आता है।
4
4
5
पुष्य नक्षत्र (pushya nakshatra) को सभी नक्षत्रों का राजा कहा गया है। यह 27 नक्षत्रों (27 nakshatra) में आठवें क्रम पर आता है। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि हैं। पुष्य नक्षत्र के सिरे पर बहुत से सूक्ष्म तारे हैं जो कांति घेरे के ...
5
6
हमारे ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्र के अनुसार रोगों (Nakshatra and your Health) का वर्णन किया गया है। व्यक्ति की कुंडली में नक्षत्र अनुसार रोगों का विवरण निम्नानुसार है। आपके कुंडली में नक्षत्र (Constellation n Kundali) के अनुसार परिणाम आप देख सकते ...
6
7
18 जनवरी 2022 को माघ माह प्रारंभ हो रहा है और इसी दिन ज्योतिष मान्यता के अनुसार पुष्य नक्षत्र रहेगा। माघ माह प्रारंभ होने के कारण मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो जाएंगे। पुष्य नक्षत्र को अत्यंत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। आओ जानते हैं कि पुष्य नक्षत्र ...
7
8

पुष्य नक्षत्र : एक नजर में

बुधवार,अक्टूबर 27, 2021
guru pushya nakshatra 2021 हर महीने में पुष्य नक्षत्र का शुभ योग बनता है। दीपावली के पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र सबसे खास माना जाता है।
8
8
9
ज्योतिष विद्या के अनुसार नक्षत्रों का मानव जीवन पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। अशुभ प्रभाव के चलते रोग और शोक उत्पन्न होता है। किसी भी नक्षत्र में जन्म लेने से जातक का उस नक्षत्र अनुसार स्वभाव भी ज्योतिष ग्रंथों में उल्लेखित है उसी तरह से यह भी ...
9
10
ज्योतिष के अनुसार ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति का जीवन उसकी जन्म कुंडली के अनुसार चलता है। कब अच्छा समय आएगा और कब समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, यह सब कुंडली को देखकर जाना जा सकता है।
10
11
सावन के तीसरे सोमवार को अश्लेषा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है... कुल मिलाकर इस दिन यह संयोग सभी के लिए बहुत सौभाग्यशाली कहा जा सकता है। रूप, गुण, कला, ज्ञान, विवेक आदि के लिए यह नक्षत्र बहुत महत्वपूर्ण होता है।
11
12
चंद्र की पत्नी माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र में गरम आंधियां ज्यादा प्रभाव दिखाती हैं। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है उस समय चंद्र नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।
12
13
पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ होता है। इस बार 18 मई, मंगलवार को पुष्य का शुभ योग बन रहा है। आज हम आपको पुष्य नक्षत्र से जुड़ी ऐसी खास बातें बता रहे हैं,
13
14
नक्षत्र मंडल में मूल का स्थान 19वां है। 'मूल' का अर्थ 'जड़' होता है। राशि और नक्षत्र के एक ही स्थान पर उदय और मिलन के आधार पर गण्डमूल नक्षत्रों का निर्माण होता है। इसके निर्माण में कुल छह 6 स्थितियां बनती हैं। इसमें से तीन नक्षत्र गण्ड के होते हैं ...
14
15
मृगशिरा का अर्थ है मृग का शीष। आकाश मंडल में मृगशिरा नक्षत्र 5वां नक्षत्र है। यह सबसे महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है। आकाश में यह हिरण के सिर के आकार का नजर आता है। शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष महीने का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से भी है। इन्हीं 27 ...
15
16
पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ मुहूर्त होता है। इसे खरीदारी का महामुहूर्त भी कहते हैं। आज हम आपको पुष्य नक्षत्र से जुड़ी ऐसी खास बातें बता रहे हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं।
16
17
हमारे भचक्र में ज्योतिष विद्या अनुसार 27 नक्षत्र होते हैं। अर्थात अंतरिक्ष में 27 नक्षत्र खास माने गए हैं। नक्षत्र तारों का एक समूह होता है। ज्योतिषियों में अभिजीत नक्षत्र को 28 वां नक्षत्र माना है। संपूर्ण ज्योतिष का आधार नक्षत्र ही है। ज्योतिष को ...
17
18
प्रत्येक व्यक्ति का जन्म किसी न किसी राशि के नक्षत्र में ही होता है। शास्त्रों ने जन्म नक्षत्र के अनुसार ही पौधा रोपण करने के बारे में उल्लेख मिलता है।
18
19
हिंदू कालगणना का आधार नक्षत्र, सूर्य और चंद्र की गति पर आधारित है। इसमें नक्षत्र को समसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। हमारे आकाश या अंतरिक्ष में 27 नक्षत्र दिखाई देते हैं। नक्षत्र और नक्षत्र मास को जानने के पहले ...
19