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15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस : आजादी की 73वीं वर्षगांठ पर पढ़ें जंग-ए-आजादी की प्रमुख घटनाओं का लेखा-जोखा

बुधवार,अगस्त 14, 2019
Independence Day
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15 अगस्त 2019 (गुरुवार) की कुंडली देखें तो इस वर्ष देश में सभी क्षेत्रों में अच्छी उन्नति होगी और वह विश्व के पटल पर सर्वोपरि बनकर उभरेगा।
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युग-युग की शांति अहिंसा की, लेकर प्रयोग गरिमा समस्त, इतिहास नया लिखने आया, यह पुण्य पर्व पन्द्रह अगस्त। पन्द्रह अगस्त त्योहार, राष्ट्र के चिरसंचित अरमानों का, पन्द्रह अगस्त त्योहार, अनगिनत मूक-मुग्ध बलिदानों का।
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ऐसे बहुत से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं जिनके नाम इतिहास की किताबों के पन्नों से गायब हैं। या लोग इन लोगों के बारे में बहुत कम जानते हैं, नीचे ऐसे ही कुछ गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और शहीदों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
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तिरंगा भारत के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 में सभी नियमों, रिवाजों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है।
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भारत 15 अगस्त को आजाद जरूर हो गया लेकिन उस समय उसका अपना कोई राष्ट्रगान नहीं था, हालांकि रवीन्द्रनाथ टैगोर 'जन-गण-मन' 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया।
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क्या आप जानते हैं कि गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर झंडा फहराने में क्या अंतर है? तो चलिए हम बताते हैं इन दोनों दिवसों के बीच के अंतर के बारे में 7 खास बातें
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जानिए, भारत के अलावा वे कौन से ऐसे देश है जिनके लिए 15 अगस्त की तारीख बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन इन देशों में भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
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स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी ये 6 रोचक बातें शर्तियां आप नहीं जानते होंगे, लेकिन इन्हें जानना हर किसी के लिए बहुत जरूरी है -
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रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित 'जन-गण-मन..' 27 दिसंबर, 1911 को राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।
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इस महान भारत की संस्कृति का यह गौरव गान है। न्याय-नीति का पालक अपना प्यारा हिन्दुस्तान है।। जहां सृष्टि निर्माण हुआ था वर्ष करोड़ों पहले,
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वो आजादी, मिली हमको बड़ी कुर्बानियां देकर। लुटाकर अपने मोती, लाजपत की पसलियां देकर। भगत, उधम, सुभाष, आजाद क्या खोए नहीं हमने। लहू से सींच दी 'जलियांवाला' की जमीं हमने
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आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वह सब भारत माता के उन सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपना सर्वस्व देश के नाम कर दिया था। भारत के प्रसिद्ध विद्वानों, कवियों, इतिहासकारों अथवा लेखकों ने भारत
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देश 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। यह आजादी हमें यूं ही नहीं मिली। इसके लिए न जाने कितने फांसी के फंदे पर झूले थे और न जाने कितनों ने गोली खाई थी, तब जाकर हमने यह आजादी पाई थी। देश ऋणी है उन क्रांतिवीरों का जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से ...
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ये गीत आजादी की लड़ाई के दौरान आजादी के उन परवानों के द्वारा लिखे गए थे, जिन्‍हें आज कोई नहीं जानता। ब्रिटिश हुकूमत के समय में ये गीत सरकार ने जब्‍त कर लिए थे और इन्‍हें लिखने वालों को अँग्रेज सरकार के उत्‍पीड़नों का शिकार होना पड़ा था। ये गीत आज भी ...
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इस आजादी की कीमत हमने शहीदों के खून और देशवासियों के बलिदान से चुकाई है। यदि गुजरे इतिहास के पन्‍नों को खँगालें तो उन बलिदानों पर से परदा उठता है और उन दिनों की स्‍मृतियाँ ताजा हो उठती हैं।
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दिलों में गुलामी के खिलाफ आग भड़काने वाले सिर्फ दो शब्द थे- 'वंदे मातरम्'। आइए बताते हैं इस क्रांतिकारी, राष्ट्रभक्ति के अजर-अमर गीत के जन्म की कहानी -
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15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर हिन्दुस्तान में जगह-जगह हवा में लहराता झंडा हमें स्वतंत्र भारत के नागरिक होने का अहसास कराता है। स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन हमारा हिन्दुस्तान आज से 71 साल पहले 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से स्वतंत्र ...
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बीआईएस रंगों की जांच करता है और केवल उसके बाद ही राष्ट्रीय ध्वजों को बेचने के लिए बाजार में भेजा जाता है। इस प्रकार पूरी होती है राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा।
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लोकतंत्र में प्रयुक्त 'लोक' शब्द अपने अपार विस्तार में समस्त संकीर्णताओं से मुक्त है। 'लोक’ जाति-धर्म-भाषा-क्षेत्र-वर्ग आदि समूह की संयुक्त समावेशी इकाई है, जिसमें सहअस्तित्व का उदार भाव सक्रिय रहकर 'लोक' को आधार देता है
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