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स्वतंत्रता दिवस 2022 विशेष सामग्री

शनिवार,अगस्त 13, 2022
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आइए जानते हैं 15 अगस्त पर 15 ऐसे संवाद जो देशभक्ति से भरे हैं और जोश जगा देने वाले हैं.... 1. हमारा हिन्दुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा।- गदर एक प्रेम कथा
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भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी के साथ ही विभाजन की त्रासदी भी देखने को मिली। आओ जानते हैं कि आजादी के पहले देश में चल क्या रहा था। Amrit Festival of Independence
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गजल, ठुमरी, दादरा हो या नृत्‍य कलाएं। साहित्‍य हो या चित्रकला। ये सब महाराजाओं के सभाकक्षों में उनके मनोरंजन के साधन हुआ करते थे। ऐसा नहीं है कि यह प्रश्रय गलत था, राजाश्रय की वजह से उस दौर में कला और कलाकारों का सम्‍मान भी बहुत होता था। कलाकारों को ...
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स्‍त्री लेखन पर तो मुझे लगता है कि कुछ लोगों का महिलाओं को मुख्‍य धारा में नहीं आने देने का कोई षड़यंत्र था। इसलिए उन्‍होंने महिलाओं से कहा कि वो एक गोला बना रखा है, जाओ, उसमें जाकर खेलो। यही दलितों के साथ लेखन में हुआ। हालांकि वहीं मनु भंडारी की ...
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लोक-गायन कर रहे कलाकार अपने दम पर ही जिंदा है, उन्‍हें किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिलती। हमारे सिस्‍टम में कहीं भी लोक-कलाओं, लोक-संस्‍कृति और कलाकारों के संवर्धन में दिलचस्‍पी नजर नहीं आती। सीधे-सादे बंजारा और कबिलाई संस्‍कृति के कलाकार अपनी ...
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1857 से लेकर 1947 तक चले लंबे संघर्ष के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को विभाजित आजादी मिली। मध्यरात्रि में भारत को आजाद कर दिया था। भारत की ही तरह और भी कई देशों को 15 अगस्त के दिन आजादी मिली थी। आओ जानते हैं उन देशों के नाम।
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किसी भी देश का विकास वहां के लोगों के विकास से सम्बद्ध होता है। निरंतर प्रगति करती इस दुनिया में जिस प्रकार तकनीक ने हमारे दैनिक जीवन में प्रतिक्षण हस्तक्षेप किया है, उसी प्रकार आवश्यक है कि हम भी विज्ञान और प्रोद्योगिकी को आत्मसात करें –
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लगभग दो दशकों तक अपने भोजपुरी गायन से बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बिहार का नाम रौशन करने वाले व्यास शैली के बेजोड़ लोकगायक जंगबहादुर सिंह आज 102 वर्ष की आयु में गुमनामी के अंधेरे में जीने को विवश हैं। भोजपुरी के विकास का दंभ भरने वाली ...
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आधुनिकता का हौवा ज़्यादा है। उसका आतंक फैला है। हर मनुष्य आधुनिक होना चाहता है बिना यह जाने कि वह है क्या। यह कुछ इस तरह है कि आप एक रेल में सवार होना चाहते हो बिना यह जाने कि वह जा किधर रही है। इसलिए नहीं कि आपको कहीं जाना है, बल्कि उस रेल का आतंक ...
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साहस आत्मबलिदान स्वरूप रंग वीरों का केसरिया, हृदय से उसका सम्मान करें ! श्वेत रंग परिचायक शांति का पवित्रता का ये आह्वान करे ! अशोक चक्र की धर्मचक्र प्रतीक चौबीस तीलियां चहुंमुखीं विकास का प्रतिनिधित्व करे!
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नील चक्र, चौबीस ती‍लियों वाला तिरंगा ध्वज, आगे बढ़ने की, बात करे मतवाला। बस बढ़े देश का मान, न हो कुछ बांका, हमको प्राणों से बढ़कर राष्ट्र-पताका। Poem on Tiranga Flag
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आपको यह याद रखना है कि पूरे 75 साल समेटना संभव नहीं है तो आप मुख्य बिंदू पर फोकस करें कि क्या बोलना है और किन बातों से बचना है। आप अपनी स्पीच को कल, आज और कल की थीम में समेट सकते हैं।Amrit Festival of Independence Speech in Hindi
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Azadi ka amrit mahotsav Speech in Hindi आजादी के 75 साल: अमृत महोत्सव पर कैसे दें स्पीच, कैसे करें तैयारी हम सभी साल 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा अभियान ने जोर पकड़ लिया है। आइए जानते हैं इस ...
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जश्न-ए-आजादी के 75वें साल का जश्न पूरा देश धूमधाम से मना रहा है। आजादी के इस सफर में देश के इतिहास में कई ऐसे पड़ाव आए जोकि हर देशवासी के लिए गर्व और स्वाभिमान के प्रतीक बन गए। आजादी के बाद ‘भारत’ ने ‘इंडिया’ तक का सफर भी पूरा कर लिया है। आज जब हम ...
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भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी के साथ ही विभाजन की त्रासदी भी देखने को मिली। आओ जानते हैं कि आजादी के पहले देश में चल क्या रहा था।
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स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं... वर्तमान में स्वतंत्रता दिवस के समय ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सितारे कहते हैं कि...
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स्वाधीनता दिवस की 75वीं सालगिरह पर वेबदुनिया की विशेष प्रस्तुति....देश के नाम, देश की आजादी के नाम...देश की संस्कृति और क्रांतिकारियों के नाम...हमने संजोई है दो तरह की सामग्री....स्वतंत्रता दिवस 2021 के अवसर विशेष आलेख, जानकारियां और ऐतिहासिक ...
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भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है।
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भारत में देश‍भक्ति पर कई फिल्में बनी है जैसे शहीद (1965), गांधी (1982), नेताजी सुभाष चन्द्र बोस : द फॉरगॉटन हीरो (2004), मंगल पांडे : द राइजिंग (2005), सरदार (1993), झांसी की रानी (1953), हकीकत (1964), स्वदेस (2004), रंग दे बसंती (2006), ए वेडनेसडे ...
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