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Ravi Pushya Yoga 2026: दिवाली से पहले बना दुर्लभ रवि पुष्य योग, जानें खरीदारी के शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि

Ravi Pushya nakshatra Yoga 2026
Today Ravi Pushya Nakshatra 2026: दिवाली और धनतेरस से पहले खरीदारी का सबसे बड़ा महामुहूर्त रवि पुष्य योग आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों का राजा माना गया है। 1 नवंबर 2026 को रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ने से यह अत्यंत फलदायी 'रवि पुष्य योग' और 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का निर्माण कर रहा है। इसी दिन अहोई अष्टमी का व्रत और राधा कुंड स्नान भी संपन्न होगा। भानु सप्तमी का संयोग भी बन रहा है।
 

1. तिथि, समय और शुभ योग (1 नवंबर 2026)

पुष्य नक्षत्र प्रारंभ: 01 नवंबर 2026, सुबह 05:39 बजे से
पुष्य नक्षत्र समाप्त: 02 नवंबर 2026, सुबह 04:30 बजे तक
रवि पुष्य एवं सर्वार्थ सिद्धि योग: 01 नवंबर, सुबह 06:33 बजे से 02 नवंबर, सुबह 04:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:42 बजे से 12:27 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:36 बजे से 06:02 बजे तक

2. खरीदारी के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातःकाल मुहूर्त (शुभ/अमृत): सुबह 06:30 बजे से 09:30 बजे तक (सोना, चांदी, जेवर और धार्मिक सामग्री)
दोपहर का मुहूर्त (लाभ): दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक (वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या प्रॉपर्टी डील)
अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक (बैंक कार्य, बही-खाते और नई बुकिंग)
सायंकाल मुहूर्त (अमृत/चल): शाम 06:00 बजे से 07:30 बजे तक (लक्ष्मी पूजन और खाता पूजन)
 

3. पुष्य नक्षत्र में क्या खरीदना शुभ है और क्यों?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति और स्वामी शनिदेव हैं, जबकि इस पर चंद्रमा का भी प्रभाव रहता है। इस दिन खरीदी गई वस्तु स्थायी समृद्धि देती है:
सोना व जेवर: देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव से सोना और हल्दी खरीदना अत्यंत शुभ होता है।
चांदी व बर्तन: चंद्रमा के प्रभाव से चांदी के सिक्के, बर्तन और मोती खरीदना समृद्धिदायक है।
वाहन व प्रॉपर्टी: शनिदेव के प्रभाव से कार, बाइक, मशीनरी, लोहा, मकान या जमीन में निवेश करना फलदायी रहता है।
व्यापारिक सामग्री: बही-खाता, कलम, स्टेशनरी, श्रीयंत्र, एकाक्षी नारियल, दक्षिणवर्ती शंख और कौड़ियां।

4. लक्ष्मी-नारायण विशेष पूजन विधि

तैयारी: प्रातः स्नान के बाद पीले या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
स्थापना: पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
अर्पण व पाठ: श्रीहरि और माँ लक्ष्मी को हल्दी, केसर, चमेली या कमल के फूल अर्पित करें। इसके बाद 'कनकधारा स्तोत्र' या महालक्ष्मी मंत्र का जप करें:
"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः"
खरीदी वस्तु का पूजन: इस दिन खरीदकर लाई गई नई वस्तु (सोना, सिक्के, वाहन की चाबी या बही-खाता) को पूजा स्थल पर रखकर कुमकुम-अक्षत लगाएं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लें।
 
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