बैठे-बैठे पैर हिलाना शुभ या अशुभ? ज्योतिष में छिपे हैं ये 5 बड़े संकेत
समाज में प्रचलित धारणा, मान्यता, ज्योतिष और सामुद्रिक शास्त्र की मान्यता के अनुसार बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत को अशुभ माना गया है। यदि व्यक्ति बिना किसी वजह के लगातार अपने पैर हिलाता रहता है, तो उससे दरिद्रता आती है। ज्योतिष शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र में इंसान की आदतों को उसके ग्रहों और भविष्य से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी 5 खास बातें।
1. धन की देवी लक्ष्मी की अप्रसन्नता (आर्थिक नुकसान)
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शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति बिना किसी वजह के बैठे-बैठे पैर हिलाता रहता है, उस घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता।
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ऐसा माना जाता है कि पैर हिलाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है और धन का संचय नहीं हो पाता।
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यह आदत व्यक्ति को कर्ज के जाल में फंसा सकती है और बने-बनाए काम बिगाड़ सकती है।
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कमाया हुआ पैसा भी बेवजह के कामों में बर्बाद होने लगता है और व्यक्ति को धन-संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
2. कुंडली में 'चंद्रमा' की कमजोरी
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बेवजह पैर हिलाने का सीधा संबंध व्यक्ति की मानसिक स्थिति और कुंडली के ग्रहों से होता है।
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पैर हिलाने की आदत इस बात का संकेत है कि व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या दूषित है।
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चंद्रमा मन का कारक है। जब यह कमजोर होता है, तो व्यक्ति के मन में चंचलता, घबराहट, नकारात्मक विचार और मानसिक अशांति बनी रहती है।
3. राहु का नकारात्मक प्रभाव
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पैर हिलाने की आदत को ज्योतिष में राहु और शनि के अशुभ प्रभाव से भी जोड़ा जाता है।
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पैर लगातार हिलाने से कुंडली में राहु दोष बढ़ता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में अचानक परेशानियां और मानसिक तनाव (Stress) आने लगता है।
4. शनि का नकारात्मक प्रभाव
इसके अलावा, बिना कारण पैर हिलाना शनि देव को भी अप्रसन्न करता है, जिससे कार्यों में रुकावटें आती हैं क्योंकि शनिदेव को कर्मफल दाता और कर्म करवाने वाले देव के रूम में जाना जाता है। पैरों को कर्म और धैर्य का कारक माना गया है। लगातार पैर हिलाने से व्यक्ति के भीतर का धैर्य खत्म होता है और उसके स्वभाव में चंचलता व अस्थिरता आती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस आदत के कारण कुंडली में 'शनि ग्रह' कमजोर होने लगता है। शनि के कमजोर होने से जीवन में सुख-शांति भी प्रभावित होती है और जरूरी काम में बाधाएं उत्पन्न होने लगती है।
5. पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में दोष
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शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, कथा या हवन के दौरान पैर नहीं हिलाने चाहिए।
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यदि कोई व्यक्ति पूजा के समय पैर हिलाता है, तो उसे उस पूजा का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता।
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शाम के समय (गोधूलि बेला) पैर हिलाना सबसे ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है, क्योंकि यह समय देवताओं के आगमन का होता है।
6. स्वास्थ्य और विज्ञान का नजरिया (Restless Legs Syndrome)
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सिर्फ ज्योतिष ही नहीं, विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र भी इस आदत को सही नहीं मानते।
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चिकित्सा विज्ञान में इसे 'रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम' (Restless Legs Syndrome - RLS) या 'विल्स-एकबॉम रोग' कहा जाता है।
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यह शरीर में आयरन (लोहे) की कमी, अनिद्रा (नींद न आना) या नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी के कारण होता है। लगातार पैर हिलाने से दिल की धड़कनें तेज हो सकती हैं और व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
समाधान: यदि आपको या आपके परिवार में किसी को यह आदत है, तो इसे जागरूक होकर सुधारने का प्रयास करें। ज्योतिष के अनुसार, सोमवार के दिन भगवान शिव को जल चढ़ाने या ध्यान (Meditation) करने से मन शांत होता है और इस आदत से छुटकारा मिलता है।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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