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आश्विन माह का महत्व और कथा एवं व्रत त्योहारों की लिस्ट

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हिंदू पंचांग में आश्विन माह (जिसे स्थानीय भाषा में 'कुआंर' भी कहा जाता है) वर्ष का सातवाँ महीना होता है। यह महीना आध्यात्मिक, धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। आश्विन माह की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से होती है और यह कार्तिक माह के आगमन के साथ समाप्त होता है। इस बार यह माह 27 सितंबर से प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगा। चलिए जानते हैं इस माह के प्रमुख व्रत त्योहार, महत्व और कथा।
 
26 सितंबर शनिवार : श्राद्ध पूर्णिमा, श्राद्ध पक्ष प्रारंभ
27 सिंतबर रविवार : श्राद्ध पक्ष प्रतिपदा
29 सितंबर, मंगलवार: महाभरणी श्राद्ध, पंचमी
03 अक्टूबर, शनिवार : महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, जीवित्पुत्रिका व्रत, कालाष्टमी 
04 अक्टूबर, रविवार : नवमी श्राद्ध
06 अक्टूबर, मंगलवार : इंदिरा एकादशी
07 अक्टूबर, बुधवार: मघा श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार: सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध 
11 अक्टूबर, रविवार: शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
17 अक्टूबर, शनिवार: नवपत्रिका पूजा, तुला संक्रांति, नवपद ओली प्रारंभ
18 अक्टूबर, रविवार: दुर्गा अष्टमी
19 अक्टूबर, सोमवार: दुर्गाष्टमी और नवमी संयुक्त, संधि पूजा
20 अक्टूबर, मंगलवार: नवरात्रि पारण, दशहरा आयुध पूजा, अपराजिता जयंती
21 अक्टूबर, बुधवार: माधवाचार्य जयंती, काशी भरत मिलाप
22 अक्टूबर, गुरुवार: पापकुंश एकादशी।
23 अक्टूबर, शुक्रवार: शुक्र प्रदोष
25 अक्टूबर, रविवार: कोजागार पूजा, शरद पूर्णिमा
26 अक्टूबर, सोमवार: वाल्मिकी जयंती
27 अक्टूबर, मंगलवार: कार्तिक मास प्रारंभ।

आश्विन माह का धार्मिक महत्व

आश्विन का महीना मुख्य रूप से पितरों की शांति और मां दुर्गा की शक्ति उपासना के लिए समर्पित है। इस महीने की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
पितृ पक्ष (कृष्ण पक्ष): आश्विन माह का पहला पखवाड़ा (कृष्ण पक्ष) 'पितृ पक्ष' या 'श्राद्ध पक्ष' कहलाता है। इसमें पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हुए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य किए जाते हैं।
शारदीय नवरात्रि (शुक्ल पक्ष): आश्विन माह का दूसरा पखवाड़ा (शुक्ल पक्ष) जगतजननी माँ दुर्गा की भक्ति का प्रतीक है। इसमें 9 दिनों तक 'शारदीय नवरात्रि' का पर्व मनाया जाता है।
विजयदशमी (दशहरा): आश्विन शुक्ल दशमी को भगवान श्री राम द्वारा रावण पर विजय और माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध के उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है।
शरद पूर्णिमा: आश्विन माह की पूर्णिमा को 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है।
 

आश्विन माह से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

आश्विन माह में दो प्रमुख पर्व आते हैं-पितृ पक्ष और नवरात्रि, इसलिए इससे जुड़ी मुख्य कथाएँ भी इन्हीं दोनों पर्वों से संबंधित हैं:
 

1. पितृ पक्ष की कथा (दानवीर कर्ण की कथा)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाभारत युद्ध में दानवीर कर्ण की मृत्यु हुई और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुँची, तो उन्हें भोजन में सोने और गहने परोसे गए। कर्ण ने इंद्रदेव से इसका कारण पूछा।
इंद्रदेव ने बताया, "कर्ण, तुमने जीवनभर केवल सोने-चांदी और धन-दौलत का दान किया, कभी अपने पितरों को अन्न और जल समर्पित नहीं किया।"
कर्ण ने उत्तर दिया कि उन्हें अपने वास्तविक माता-पिता या पूर्वजों का ज्ञान नहीं था। तब इंद्रदेव ने कर्ण को 16 दिनों के लिए पुनः पृथ्वी पर जाने की अनुमति दी। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में कर्ण ने पृथ्वी पर आकर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण किया और अन्न-जल का दान किया। तभी से आश्विन कृष्ण पक्ष में 'पितृ पक्ष' की परंपरा चली आ रही है।
 

2. शारदीय नवरात्रि की कथा (महिषासुर वध एवं श्री राम विजय)

महिषासुर मर्दिन कथा: असुर राज महिषासुर को वरदान प्राप्त था कि कोई देव या दानव उसका वध नहीं कर सकता। जब उसका अत्याचार चरम पर पहुँच गया, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध चला। आश्विन शुक्ल दशमी को देवी ने महिषासुर का वध किया, इसलिए आश्विन माह शक्ति पूजा का महीना बना।
भगवान राम का चंडी पूजन: मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में 9 दिनों तक माँ दुर्गा का अनुष्ठान (चंडी पूजन) किया था। देवी के आशीर्वाद से उन्होंने दशमी तिथि को रावण का वध कर विजय प्राप्त की।
 

आश्विन माह के नियम और सावधानियाँ

सात्विक जीवन: पितृ पक्ष और नवरात्रि दोनों के दौरान तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का त्याग करना चाहिए।
दूध और करेले का वर्ज: आयुर्वेद और धर्म शास्त्रों के अनुसार, आश्विन माह में करेला खाना और दूध का अत्यधिक सेवन करना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं माना जाता (इस दौरान छाछ और मट्ठे का प्रयोग अच्छा माना जाता है)।
दान का महत्व: इस माह में अन्न, जल, तिल, वस्त्र और जूते-चप्पलों का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
 
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