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  4. Today marks the convergence of Ashadh Krishna Chaturdashi and Amavasya; performing five specific tasks could transform your fortune

आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी और अमावस्या का संयोग आज, यदि कर लिए ये 5 कार्य तो चमक जाएगी किस्मत

Photograph of the worship performed during the confluence of Ashadha Krishna Chaturdashi and Amavasya
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या का संयोग बेहद पवित्र और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सनातन परंपरा में यह समय पितरों को प्रसन्न करने, जीवन से नकारात्मकता को दूर करने और सुख-समृद्धि के द्वार खोलने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए कुछ शुभ कार्य जीवन के कष्टों को कम करने, पितृ कृपा प्राप्त करने तथा सुख-समृद्धि के मार्ग खोलने में सहायक माने जाते हैं। अमावस्या और चतुर्दशी के इस संधिकाल या मिलन के समय में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से पूरी तरह दूर रहें और घर में शांति का माहौल बनाए रखें।ALSO READ: Halharini Amavasya: हलहारिणी अमावस्या पर किए जाने वाले पितृ दोष निवारण के 10 विशेष उपाय
 

यदि आप आज के दिन ये 5 विशेष कार्य कर लेते हैं, तो भाग्य का साथ मिलने लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं:

 

1. पितरों के नाम तर्पण और दान

अमावस्या तिथि मुख्य रूप से पितरों को समर्पित होती है। आज के दिन सुबह स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, काले तिल और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न जैसे- गेहूं, चावल, वस्त्र या काले तिल का दान करें। इससे पितृ दोष शांत होता है और तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
 

2. पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान

शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। आज शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाएं, वहां जल अर्पित करें और सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। पीपल की सात परिक्रमा करें और अपने सुखद भविष्य की कामना करें। इससे शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
 

3. हनुमान चालीसा का पाठ

चतुर्दशी और अमावस्या की रातों में नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं। इनसे बचने और मानसिक शांति के लिए आज के दिन हनुमान जी की पूजा अवश्य करें। हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। यह कार्य आपके जीवन से बड़े से बड़े संकट और डर को दूर कर देगा।ALSO READ: हलहारिणी अमावस्या की पौराणिक कथा

 

4. मुख्य द्वार पर दीपक और गंगाजल का छिड़काव

शाम के समय यानी प्रदोष काल में अपने घर के मुख्य द्वार को साफ करें और वहां हल्दी मिले जल या गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद मुख्य दरवाजे के बाहर दाहिनी ओर एक दीपक जलाकर रखें। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और दरिद्रता दूर होती है।
 

5. बेजुबान जीवों को भोजन कराना

आज के दिन चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालें, काले कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं और मछलियों के लिए आटे की गोलियां नदी या तालाब में डालें। शास्त्रों में माना गया है कि जब हम बेजुबान जीवों की सेवा करते हैं, तो हमारे संचित पाप कटते हैं और सोया हुआ भाग्य जाग उठता है।
 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी और अमावस्या का संयोग आत्मशुद्धि, पितृ तृप्ति और ईश्वर आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धा, संयम और अच्छे विचारों के साथ किए गए शुभ कर्म आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बनते हैं। सकारात्मक सोच और सेवा भाव ही आपकी किस्मत को चमकाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी अमावस्या कब है, क्या करते हैं इस दिन?
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