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Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी अमावस्या कब है, क्या करते हैं इस दिन?

The image shows a woman performing Shiva worship on the occasion of Halharini Amavasya 2026, along with a view of the pilgrimage site
Ashadha Amavasya 2026: हलहारिणी अमावस्या हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की एक अत्यंत पवित्र अमावस्या मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र स्नान, दान, जप-तप, पितृ तर्पण और भगवान शिव-विष्णु की पूजा करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कई स्थानों पर इसे खेती, प्रकृति और पितृ आराधना से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।ALSO READ: आज से भद्र राजयोग शुरू, 5 राशियों के लिए कर्म और भाग्य के फल मिलने का खुलेगा ताला
 
हलहारिणी अमावस्या के धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कर्म अनेक गुना फलदायी होते हैं। पितरों की कृपा प्राप्त करने, नकारात्मकता दूर करने, मानसिक शांति पाने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। तंत्र और शक्ति साधना के लिए भी इस अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है।
 

आइए यहां जानते हैं कब है यह अमावस्या, और इस दिन कौन-कौनसे कार्य करें...

 

इस दिन क्या करते हैं?

हलहारिणी अमावस्या के दिन मुख्य रूप से निम्नलिखित धार्मिक और पारंपरिक कार्य किए जाते हैं:
 

1. पवित्र नदी में स्नान और दान

इस दिन सुबह जल्दी, यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या गंगाजी में स्नान करने का बहुत महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल या जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

2. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा

इस अवसर पर स्नानादि से निवृत्त होकर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन घी का दीपक जलाकर आरती करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
 

3. पितृ तर्पण और श्राद्ध

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पितरों/ पूर्वजों को समर्पित होती है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं तथा घर की दक्षिण दिशा में या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

4. कृषि यंत्रों और हल की पूजा

यह त्योहार विशेष रूप से किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन किसान खेती में इस्तेमाल होने वाले अपने मुख्य उपकरण 'हल' और अन्य कृषि यंत्रों को साफ करके उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से सालभर फसल अच्छी होती है और अन्न के भंडार भरे रहते हैं।
 
एक छोटा सा नियम: इस दिन प्याज, लहसुन या मांसाहार तथा किसी भी तरह के तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए और पूरी तरह सात्विकता बनाए रखनी चाहिए।
 

हलहारिणी अमावस्या- FAQs

 
1. हलहारिणी अमावस्या 2026 कब है?
वर्ष 2026 में हलहारिणी अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी।
 
2. हलहारिणी अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
प्रातः स्नान करें, भगवान शिव और विष्णु की पूजा करें, पितरों का तर्पण करें, पीपल की पूजा करें तथा अन्न, वस्त्र और तिल आदि का दान करें।
 
3. हलहारिणी अमावस्या का क्या महत्व है?
इस दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण, जप और पूजा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होने तथा जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।

4. क्या हलहारिणी अमावस्या पर पितृ तर्पण किया जाता है?
हां, इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 
5. हलहारिणी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?
क्रोध, विवाद, तामसिक भोजन, नशा और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। साथ ही इस दिन धार्मिक कार्यों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
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