1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. el nino 2026 threat india weak monsoon imd warning drought risk

भारत पर मंडरा रहा El Nino 2026 का खतरा, IMD ने कमजोर मानसून और सूखे की दी चेतावनी

Drought
भारत में वर्ष 2026 का मानसून पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है। प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे एल नीनो (El Nino) के कारण देश के कई हिस्सों में सूखे, पानी की कमी, फसलों को नुकसान और अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
 
IMD द्वारा अप्रैल 2026 में जारी पहले दीर्घकालिक मानसून पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह स्थिति 'सामान्य से कम'  मानसून की श्रेणी में आती है। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ गई है।

क्या होता है El Nino?

 
एल नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। भारत में एल नीनो आमतौर पर मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम होती है। इसके कारण सूखे जैसी स्थिति, जल संकट, तापमान में वृद्धि और कृषि उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है।
 

अगस्त-सितंबर में बढ़ सकता है खतरा

 
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की शुरुआत यानी जून और जुलाई का पहला हिस्सा अपेक्षाकृत सामान्य रह सकता है, लेकिन अगस्त और सितंबर में एल नीनो का प्रभाव तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसी दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश में भारी कमी आ सकती है।
 
IMD के मुताबिक, इस वर्ष कमजोर मानसून की संभावना करीब 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य वर्षों में यह जोखिम केवल 16 प्रतिशत के आसपास रहता है।

मध्यप्रदेश में सूखे जैसे हालात की आशंका

मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। इससे खरीफ फसलों और किसानों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान पर भी खतरा

उत्तर-पश्चिम भारत के पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मानसून के दूसरे चरण में बारिश की भारी कमी हो सकती है। ये राज्य खेती और भूजल पुनर्भरण के लिए मानसूनी बारिश पर काफी निर्भर हैं। यदि बारिश कम हुई तो कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज़ टीम
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।.... और पढ़ें