भारत में जब्त हुई 182 करोड़ की कैप्टागन, इसे क्यों कहा जाता है जिहादी ड्रग, क्या हैं इसके साइड इफेक्ट
Captagon drug seized in India: स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए कैप्टागन ड्रग की तस्करी में शामिल अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एजेंसी ने 182 करोड़ रुपए मूल्य का 227.7 किलोग्राम जिहादी ड्रग जब्त किया है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कैप्टागन की खेप जब्त करने के लिए एजेंसी की सराहना की।
कैप्टागन (Captagon), जिसे अक्सर 'जिहादी ड्रग' (Jihadist Drug) कहा जाता है। इसे टेरर ड्रग भी कहा जाता है। यह बेहद खतरनाक और एडिक्टिव (लत लगाने वाली) सिंथेटिक दवा है। पिछले कुछ सालों में मिडिल ईस्ट (खासकर सीरिया) और आतंकवादी संगठनों के बीच इसकी भारी मांग देखी गई है। आइए जानते हैं कि यह ड्रग क्या है और यह कैसे काम करती है तथा आतंकवादी या जिहादी इसका उपयोग क्यों करते हैं?
कैप्टागन ड्रग क्या है?
कैप्टागन मूल रूप से फेनेथिलाइन (Fenethylline) नामक केमिकल का ब्रांड नाम है। इसे 1960 के दशक में जर्मनी में डिप्रेशन, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और नार्कोलेप्सी (नींद की बीमारी) के इलाज के लिए बनाया गया था। इसके अत्यधिक एडिक्टिव होने और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर के कारण 1980 के दशक में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। आजकल जो कैप्टागन ब्लैक मार्केट में बिकती है, वह असली दवा नहीं है। यह एम्फ़ैटेमिन (Amphetamine) और कैफीन को मिलाकर अवैध लैब में बनाई जाने वाली एक सस्ती और नकली टैबलेट हैं।
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आतंकियों या जिहादियों में क्यों लोकप्रिय है?
आतंकवादी संगठनों जैसे ISIS, हमास और सीरिया के विद्रोही गुटों द्वारा इसके इस्तेमाल के दो मुख्य कारण हैं। पहला, लड़ाकों को 'सुपर-सोल्जर' बनाने के लिए यह ड्रग इंसानी दिमाग के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को बहुत ज्यादा उत्तेजित (stimulate) कर देती है।इसे लेने के बाद व्यक्ति का खुद पर काबू नहीं रहता। उसे दर्द महसूस नहीं होता और मौत का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है। वह क्रूर से क्रूर अपराध (जैसे सिर काटना या मासूमों की जान लेना) बिना किसी हिचकिचाहट के कर देता है। कैप्टागन शरीर में डोपामाइन और एड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा देती है। इससे लड़ाके बिना थके, बिना सोए और बिना खाए कई-कई दिनों (48 से 72 घंटे) तक लगातार लड़ सकते हैं।
काली कमाई का जरिया
आज के समय में कैप्टागन आतंकवादियों और कुछ युद्धग्रस्त देशों के लिए पैसे कमाने का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है। यह दवा सीरिया और लेबनान की अवैध प्रयोगशालाओं में बहुत कम खर्च में बनती है, लेकिन इसे सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में भारी कीमतों (10 से 20 डॉलर प्रति टैबलेट) पर बेचा जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया इस समय दुनिया का सबसे बड़ा कैप्टागन उत्पादक है। इस ड्रग की तस्करी से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई का इस्तेमाल आधुनिक हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए किया जाता है।
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इस ड्रग के दुष्प्रभाव?
जब इस ड्रग का नशा उतरता है, तो इंसान का शरीर और दिमाग पूरी तरह टूट जाता है। इसके लगातार इस्तेमाल से भयानक डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन होता है। दिल का दौरा पड़ने या ब्रेन हैमरेज का खतरा बढ़ जाता है। यह दिमाग के सोचने-समझने की क्षमता को हमेशा के लिए नष्ट कर देती है। यादि कहें कि कैप्टागन एक ऐसी अवैध नशीली दवा है जो इंसान को एक 'बिना दिमाग वाले रोबोट' या 'क्रूर हत्यारे' में बदल देती है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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