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सुपर El Niño का खतरा : भारत में 45°C पार तापमान, मानसून कमजोर और भीषण गर्मी का अलर्ट

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दुनियाभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। खासतौर पर भारत में तापमान पहले ही 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इस बीच वैज्ञानिक प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं, जो वैश्विक तापमान को और बढ़ा सकती हैं और गर्मी के पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल विकसित हो रहा ‘सुपर एल नीनो’ दुनियाभर में मौसम को और ज्यादा चरम बना सकता है।

22 अप्रैल को भारत ने दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 शहर दर्ज किए, क्योंकि देश के कई हिस्सों में भीषण लू का प्रकोप देखने को मिला। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जिससे गर्मी का असर और भी गंभीर हो गया। 
 
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के हिस्सों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों ने सरकारों को पहले से तैयारी करने, जल प्रबंधन मजबूत करने और कृषि रणनीतियों में बदलाव लाने की सलाह दी है, ताकि संभावित संकट से निपटा जा सके।
 
विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो इस साल सामान्य से पहले, यानी मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकता है। इसका सीधा असर तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ेगा। पहले इसके अगस्त-सितंबर में आने की संभावना जताई गई थी, लेकिन इसके जल्दी आने के संकेतों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।

‘सुपर एल नीनो’ क्या है?

 
‘सुपर’ या ‘मेगा’ एल नीनो एक अधिक शक्तिशाली जलवायु घटना को कहा जाता है। यह तब विकसित होता है जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ जाता है। यह एक दुर्लभ घटना है और 1950 के बाद से अब तक केवल चार बार ही दर्ज की गई है। खास बात यह है कि समुद्री तापमान में 2.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि अब तक सिर्फ एक बार ही देखी गई है।

इस साल कम बारिश की आशंका

एल नीनो के खतरे के चलते भारत में इस साल मानसून को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही “सामान्य से कम” बारिश का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एल नीनो मजबूत होता है, तो इसका गहरा असर कृषि, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर खेती वाले क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बनने की भी आशंका है।
 

दुनियाभर में बढ़ेगी भीषण गर्मी

WMO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मई, जून और जुलाई के दौरान वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इससे भारत में भीषण लू चलने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे बिजली की मांग, पानी की खपत और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। Edited by: Sudhir Sharma
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