अब इस तरह होगी अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति, कौन कर सकता है इस पद के लिए आवेदन
ayodhya ram mandir ceo: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ही एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति होने जा रही है। शनिवार को दिल्ली में संपन्न हुई चयन समिति (Search Committee) की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग चुकी है। इस प्रतिष्ठित पद के लिए पात्रता, नियम और योग्यताएं तय कर दी गई हैं। इच्छुक उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। ट्रस्ट की योजना है कि एक महीने के भीतर इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन हो जाए। हालांकि माना जा रहा है कि किसी रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
चयन कमेटी की बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO पद के लिए गठित सर्च कमेटी की पहली बैठक में देश की जानी-मानी हस्तियों ने दिशा-निर्देश तय किए। इस बैठक में मुख्य रूप से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावड़े मौजूद थे। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में नई समस्या! 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा
CEO पद के लिए अनिवार्य योग्यताएं और शर्तेंश्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र (न्यास) श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए योग्य जनों से आवेदन आमंत्रित करता है
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) July 13, 2026
आवेदन की अंतिम तिथि: शनिवार १८ जुलाई २०२६; सायं ४ बजे
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कमेटी द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, इस पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का ग्रेजुएट होने के साथ ही प्रशासन (Administration) या वित्त (Finance) के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का लंबा अनुभव होना जरूरी है। जिन उम्मीदवारों के पास पहले से किसी बड़े मंदिर प्रबंधन (Temple Management) का अनुभव है, उन्हें चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। इस पद के लिए आवेदक का हिन्दू होना आवश्यक है। अर्थात दूसरे धर्म का व्यक्ति इस पद के लिए आवेदन नहीं कर सकता।
जानकारी के मुतमाबिक CEO की शुरुआती नियुक्ति 3 वर्ष के लिए की जाएगी। चयनित व्यक्ति को अनिवार्य रूप से अयोध्या में रहकर ही अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। चयन प्रक्रिया और आगे के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए समिति ने एक सचिव नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है। इस पद के लिए शुरुआत में दो-तीन रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों के नाम सुर्खियों में आए थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से ही सीईओ का चयन किया जाएगा। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'
छवि सुधारने की बड़ी कवायद
सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी की कुछ घटनाओं ने ट्रस्ट की छवि को प्रभावित किया था। अब भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद मंदिर की साख को पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसी कड़ी में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर 22 जुलाई को होने वाली आगामी बैठक में कई और बड़े बदलावों पर भी चर्चा होना तय है।
CEO के समक्ष होंगी बड़ी चुनौतियां
राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का सफर आसान नहीं रहने वाला है। हालिया विवादों के बाद अब इस पद पर बैठे व्यक्ति पर विश्व के करोड़ों सनातनियों का अटूट विश्वास, आस्था और उम्मीदें टिकी होंगी। मंदिर के सीईओ को करोड़ों रुपए के चढ़ावे, चंदे और मंदिर के भारी-भरकम बजट का पारदर्शी प्रबंधन करना होगा साथ ही सुरक्षा व्यवस्था का भी ध्यान रखना होगा। प्रतिदिन आने वाले विशिष्ट अतिथियों के दौरे को सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी भी सीईओ की ही होगी।

