चंपत राय समेत 3 दिग्गजों की डिजिटल ID ब्लॉक, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
Champat Rai digital ID blocked: अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण के बाद अब एक और बड़ा भूचाल आ गया है। राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल ID को तुरंत प्रभाव से डीएक्टिवेट (ब्लॉक) कर दिया है। अब अयोध्या में इन दिग्गजों की सिफारिश पर VIP या VVIP एंट्री नहीं मिल पाएगी। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा माजरा और क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला।
क्यों ब्लॉक हुई डिजिटल ID?
दरअसल, यह पूरा एक्शन राम मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच कर रही SIT (विशेष जांच दल) की तफ्तीश में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सूत्रों और SIT जांच के मुताबिक, ट्रस्ट के इन वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल ID का दुरुपयोग करके भारी संख्या में VIP और VVIP दर्शन पास जारी किए गए थे। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'
डिजिटल ID का मुख्य काम मंदिर दर्शन के लिए विशेष पास बनाना था। पास जारी करने में किसी भी तरह की और अनियमितता या हेरफेर न हो, इसलिए ट्रस्ट ने यह 'डिजिटल स्ट्राइक' की है। दूसरी तरफ, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से SIT लगातार सघन पूछताछ कर रही है, जिससे कई और राज खुलने की उम्मीद है।
अब किसे मिली यह जिम्मेदारी?
ट्रस्ट में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब जिम्मेदारी के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यह सख्त फैसला ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी मिलने के ठीक बाद लिया गया है। अब चंपत राय और अनिल मिश्रा की जगह ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास को विशिष्ट (VIP) पास जारी करने का अधिकार सौंप दिया गया है। ALSO READ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में हेराफेरी (चोरी) का मामला सामने आया था। करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच SIT को सौंपी गई।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें न सिर्फ पैसों की चोरी बल्कि VIP पास के काले खेल का भी पर्दाफाश हुआ। वीआईपी पास के जरिए अवैध रूप से लोगों को दर्शन कराने और उसमें इन डिजिटल आईडी के दुरुपयोग की आशंका सच साबित होती दिख रही है। इसी के बाद ट्रस्ट को अपनी साख बचाने और पारदर्शिता लाने के लिए अपने ही सबसे बड़े चेहरों (चंपत राय व अन्य) के खिलाफ इतना सख्त कदम उठाना पड़ा।

