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  4. Feminist women should also write this for men on a placard

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

Feminist
आख़िरकार औरतों ने मर्दों पर कविताएं लिखीं, भले वे बहुत बेहूदा और ख़राब ही क्यों न थीं!

औरतों ने वो काम कर दिखाया जो मर्द ख़ुद अपने लिए नहीं कर सका। अब किसी औरत से मैं चाहता हूं कि वो मर्द के पसीने पर पसीने से भीगी हुई कोई कविता लिखेगी।

मैं चाहता हूं कि एक तख्ती पर यह भी लिखा जाना चाहिए कि कैसे मर्दों ने घर बनाए। खेत उगाये। फ़सल उगाई। बाग़ लगाए और बागों में फूल उगाए। भले तोड़कर नहीं ला सके, पर कैसे औरतों को उनके लिए चांद- तारे तोड़ लाने के ख़्वाब दिखाए?

लिखो कि मर्दों ने तुमसे वो भी कहा जो वो नहीं कर सकते थे!

एक तख्ती पर लिखो कि कैसे मर्दों ने औरतों को सुंदर कहा, लिखो कि जब औरतों को यकीन नहीं हुआ कि वे सुंदर हैं तो उसने उनके लिए शीशे भी बना डाले।

औरतों को चाहिए कि एक तख्ती पर वो लिखे कि कैसे मर्द दफ़्तर के किसी कोने में ता-उम्र एक वक्त सिर्फ़ ठंडी रोटियां खाता रहा?

औरतों! यह भी लिखो कि वो कितना उदास दिखता है जब अकेले- अकेले खाना खाता है?

लिखो कि कैसे मर्द फोन करते- करते यह सोचकर रुक जाता है कि अभी वो सो रही होगी।

एक तख्ती पर यह भी लिखो कि जब वो बारिश में भीगकर घर लौटता है तो कैसे उसकी देह का एक हिस्सा सड़क के कीचड़ में बहकर चला जाता है? कैसे गर्म सड़कों पर धूप हमेशा के लिए उसका रंग चुरा लेती है?

यह भी लिखो कि कैसे वो सर्दियों में अपनी हड्डियां बेचकर घर लौटता रहा?

लिखो कि मर्द अक्सर अपने घर के लिए ही जल्दी घर लौटता है। एक तख्ती पर यह भी तो लिखो कि कई बार औरतों की वजह से ही वो घर नहीं लौटाता!

लिखो कि ज़्यादातर मर्दों ने सबसे पहले बेटियां ही क्यों पैदा करना चाही?

औरतों! साहस करो, एक तख्ती पर यह भी लिखो कि तुम्हारा भाई और बाप भी एक मर्द है।

लिखो कि आख़िर क्यों ज़्यादातर दोस्तियां मर्द ही निभाते रहे?

यह भी तो लिखो कि वो तभी रोता है जब उसके आसपास कोई नहीं होता और तभी हंसता है जब सभी उसके साथ होते हैं।

कुछ पड़ताल यह भी करो कि मर्द किसी के मरने पर भी दहाड़ मारकर क्यों नहीं रोता?

लिखो कि जो प्रेम में रो पड़ता है, वो श्मशानों में पत्थर क्यों हो जाता है?

पता करो, मर्द क्यों चाहता है कि मरे हुए मर्दों की आत्माएं हमेशा के लिए मुक्त हो जाए?

एक तख्ती पर लिखो कि तमाम मृत्युओं का बोझ वो कहां रखता होगा?

एक तख्ती पर लिखो कि क्यों वो ईश्वर के खिलाफ़ हर सुबह फिर से पैदा होकर उठ खड़ा हो जाता है?

एकआध तख्तियों पर यह भी लिखना चाहिए कि क्यों सबसे ज़्यादा उसकी पीठ और तलवों में छाले पड़ते हैं?
एक तख्ती पर मर्द की उदासी का भी ज़िक्र करो तो जानें!

लिखो कि ज़िंदगी के तमाम रंज ओ ग़म के बावजूद मर्द ने देवता क्यों नहीं बनना चाहा?

यह भी लिखो कि मर्द की देह आखिर थकती क्यों नहीं?

एक तख्ती पर लिखो कि एक बार जाने के बाद उसकी आत्मा वापस लौटना क्यों नहीं चाहती?
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें
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