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  4. If symptoms are identified in time, the treatment of diseases like cancer is also possible

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

4th Bronchopulmonary World Congress 2026
इंदौर, 04 जुलाई 2026। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की मुख्य कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक शामिल हुए। पहले दिन विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई रिसर्च और उन्नत तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस कॉन्फ्रेंस में 700 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया है।
 
पहले दिन पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र (साइंटिफिक सेशंस) आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान व उपचार में हो रहे नए बदलावों, आधुनिक तकनीकों और क्लिनिकल अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन पहले दिन शाम 07 बजे इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ. अतुल सी. मेहता द्वारा किया गया।
 
कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। वहीं, 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज़ प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी एकेडमिक और क्लिनिकल जानकारी का प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन तथा वैज्ञानिक संवाद के ज़रिए युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर मिला।
 
कॉन्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव एवं अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, पद्मश्री से सम्मानित विशेषज्ञों और देश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों को संबोधित किया। इस दौरान अमेरिका (यूएस) में चिकित्सा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुके डॉ. अतुल सी. मेहता को 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।
 
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने कहा कि “बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और एलर्जी फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। यही वजह है कि अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों के संक्रमण और लंग कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर लक्षणों की पहचान कर समय पर इलाज शुरू हो जाए, तो कैंसर जैसी घातक बीमारियों को भी हराना संभव है। धूम्रपान से दूरी, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, टीकाकरण और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।"
 
डॉ. डोसी ने आगे बताया कि “कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। विभिन्न विषयों पर हुए गहन विचार-विमर्श से चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों और आधुनिक उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला। कोविड के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभावों तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं, ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचार फेफड़ों की बीमारियों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”
 
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल को एक नई दिशा देते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन जारी रहेंगे, जिनमें देश-विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा करेंगे।
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