0

Ayodhya: सभ्यता एवं संस्कृति के पुनर्प्रतिष्ठित होने का प्रतीक राम मन्दिर

गुरुवार,अगस्त 6, 2020
0
1
जीवन क्या है? क्या नहीं है? यह तय करना सरल भी है और चुनौतीपूर्ण! एक समझ यह भी है कि जीवन केवल जीवन है, उससे कम या ज्यादा कुछ भी नहीं। पर यह तो बात को बढ़ने ही नहीं देना है या शुरू होते ही खत्म करना है। जीवन सनातन होकर निरंतरता का एक ऐसा सिलसिला है, ...
1
2
उस वक्‍त के परासरण अपने घर पर परिवार के साथ टीवी पर राम जन्‍मभूमि का पूजन देखकर भावुक हो रहे थे।
2
3
दो समय काल में मोदी ने एक बार लोकतंत्र के मंदिर में साष्‍टांग किया था तो दूसरी बार अब भगवान राम के मंदिर ठीक वैसा ही किया।
3
4
अयोध्‍या जो भाजपा की राजनीति और धार्मिक मुद्दों‍ का केंद्र रही है, वहां नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद कभी नहीं गए।
4
4
5
भारत के ये शुभ समाचार सुनकर बेचैन बाबर अंधेरी कब्र में करवट बदल रहा होगा।
5
6
चौबीस जुलाई के दिन जब लगभग पांच लाख की आबादी वाले अयोध्या में मंदिर निर्माण के भूमि पूजन की तैयारियों के साथ-साथ शहर की कोई बीस मस्जिदों में मुस्लिम शुक्रवार की नमाज़ पढ़ते रहे थे, भारतीय जनता पार्टी और पूर्ववर्ती जनसंघ के संस्थापकों में से एक 92 ...
6
7
जिन लोगों के जीवन में उपर्युक्त दृश्यों का अभाव था, जरा उनसे जाकर पूछिए कि कैसे उनकी आत्मा अपनों के साथ ना होने से गहरी व्यथा से भर उठती थी।
7
8
सच यह है कि जन्म भूमि के मूल निवासी यही चाहते थे कि मंदिर अयोध्या में ही बने और रामलला जहां थे वहीं विराजें।
8
8
9
न्‍याय हो या न हो, लोगों को यह भी समझ आ गया है कि सुशांत के मामले में जो कुछ भी हुआ है वो एक ‘ऑर्गनाइज्‍ड क्राइम’ है।
9
10
स्कूल से अपनी बहन को लेकर आता एक छोटा-सा भाई। भाई के छोटे लेकिन सुरक्षित हाथों में जब बहन का कोमल हाथ आता है तब देखने योग्य होता है, भाई के चेहरे से झलकता दायित्व बोध, उठते हुए कदमों में बरती जाने वाली सजगता और कच्ची-कच्ची परेशान आंखें। घर पर जो बहन ...
10
11
इसी माह में मित्रता दिवस आज है और कल रक्षाबंधन है,आइए बात करते हैं दोनों त्योहारों के मद्देनजर भाई और बहन की दोस्ती की....
11
12
अमर सिंह को शायद यह अहसास हो गया था कि इस दुनिया में कोई ‘अमर’ नहीं होता है।
12
13
भारत राष्ट्र की एकता-अखण्डता-संस्कृति को खण्डित करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्रों के जाल बिछाए जा रहे हैं
13
14
आज तक इस देश की राजनीति में हिंदुओं ने उदारवादी मुस्लिमों के स्थान पर कट्टर कठमुल्लाओं को ही सिर पर बैठाया।
14
15
कोरोना महामारी से निबटने के लिए 4 महीने पहले जब देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था तब देश में कोरोना से संक्रमण के करीब 450 मामले थे और महज 18 लोगों की मौत हुई थी। लॉकडाउन लागू होने से 4 दिन पहले जनता कर्फ्यू भी लगाया था और उसी दिन से सब कुछ बंद हो ...
15
16
इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बांधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें.... यह राखी है प्यार, विश्वास, मुस्कान, स्वतंत्रता और क्षमा की।
16
17
सचाई, ईमानदारी, परस्पर समझदारी, अमिट विश्वास, पारदर्शिता, समर्पण, सम्मान जैसे श्रेष्ठ तत्व दोस्ती की पहली जरूरत है। दोस्त वह विश्वसनीय शख्स होता है जिसके समक्ष आप अपने मन की अंतिम परत भी कुरेद कर रख देते हैं। एक सच्चा दोस्त आपके विकसित होने में ...
17
18
हमारे अब तक के अनुभव यही रहे हैं कि जब-जब भी बाहरी ताक़तों की तरफ़ से देश की संप्रभुता पर आक्रमण हुआ है,समूचा विपक्ष अपने सारे मतभेदों को भूलकर तत्कालीन सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो गया है। जिस चर्चित ‘कारगिल युद्ध ‘को लेकर हाल ही में ...
18
19
सब लोग एक समान आर्थिक परिस्थिति के नहीं होते हैं। आज की हमारी दुनिया में अति संपन्न से लेकर अति विपन्न आर्थिक परिस्थिति के लोग अपना-अपना जीवन अपने हिसाब से जी रहे हैं। भारत में लोकतंत्र और लिखित संविधान है। लोकतंत्र में लोगों को गरिमामय तरीके से ...
19