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भारतीय क्षेत्र पर दावे संबंधी नेपाल के रवैये में कोई बदलाव नहीं

शुक्रवार,मई 29, 2020
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प‍िछले कुछ सालों में पत्रकार और पत्रकार‍िता का स्‍वरुप बदल गया है। इसकी पर‍िभाषा और उदा‍हरण भी।
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गुजरात उच्च न्यायालय ने जब पिछले सप्ताह एक स्व-प्रेरित जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने 143 पृष्ठों के ऑर्डर में यह टिप्पणी की होगी कि राज्य की स्थिति एक डूबते हुए टायटेनिक जहाज़ और अहमदाबाद स्थित सिविल अस्पताल एक काल कोठरी या उससे भी बदतर है ...
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राजनीति में आये तो सीधे राज्यसभा सांसद और उसके बाद मध्यप्रदेश से टूटकर बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बन गए।
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आज से करीब 30 साल पहले स्वाधीनता संग्राम और समाजवादी आन्दोलन के अग्रणी मामा बालेश्वरदयाल से एक शाम उनकी बामनिया स्थित कुटिया में देश की राजनीति पर लम्बी चर्चा के दौरान मैंने मामाजी से पूछा था आगे आने वाले समय में हमारा देश कैसा होगा? मामाजी ने जवाब ...
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लॉक डाउन के दौरान सोशल मीडिया पर ही पूरा घर-बंद देश उमड़ पड़ा... क्योंकि बाकि बचे हुए तो जीने मरने, अपने देश-गांव की मिटटी में लौटने की, जान की परवाह किए बिना, भूखे-प्यासे अपने परिवारों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। देश इन्हीं दो वर्गों में बंट गया।
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कोरोना एक वैश्विक महामारी है। यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व इसकी चपेट में है। लगभग 2 लाख से अधिक लोगों की इस बीमारी से दुखद मृत्यु हो गई है। 25 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, हालांकि काफी लोग ठीक भी हुए हैं, ...
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इन दिनों लद्दाख और सिक्किम से सटी भारत-चीन सीमा पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन इलाकों में चीन ने न सिर्फ अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है, बल्कि उसकी वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार आसमान में मंडरा रहे हैं। उधर नेपाल ने भी तिब्बत, चीन और नेपाल से ...
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लोग यानी खालिस मनुष्य।लोग यानी जिनकी विशिष्ठ या अलग पहचान नहीं।लोग भीड़ नहीं, जीवन की सनातन पहचान होतेहैं।लोगों से कुछ छिपा नहीं होता,वे सब जानते,मानते और पहचानते हैं।दुनियाभर में लोग अपनी सभ्यता को जानते और मानते हैं।लोगों को लोगों के साथ ...
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सावरकर क्रांतिकारी तो थे ही, लेकिन वे कवि थे, साहित्‍यकार और लेखक भी थे। हो सकता है, क्रांतिकारी मकसद की वजह से उन्‍होंने अपने इस हिस्‍से को हाशिए पर ही रख छोड़ा हो।
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बिहार में दरभंगा क्षेत्र के एक छोटे से गांव की पंद्रह-वर्षीय बहादुर बालिका ज्योति कुमारी पासवान के अप्रतिम साहस और उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि को अब सत्ता प्रतिष्ठानों से जुड़े हुए लोग लॉकडाउन की देन बताकर उसे सम्मानित और पुरस्कृत करना चाह रहे हैं।
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उन्‍हें हाल ही में एक मामूली द‍िल का दौरा आया था। इसके बाद उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था
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जिसने अपने पौरुष, साहस, धैर्य एवं अपने धर्म की रक्षा एवं संरक्षण हेतु कभी भी किसी से समझौता नहीं किया
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कोरोना काल में पुल‍ि‍स ने अपनी सख्‍त छव‍ि को मानवीयता में बदलने का काम बखूबी क‍िया है।
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ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन लिए हुए हो पर जिसकी जेब में ये बसते हैं वो ही इस दुनिया में सबसे रुतबेदार है। इसी के आस-पास सारी दुनिया घूमती है। फिर भी पैसा ...
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हम अपने शरीर को कितना जानते हैं,आइए आज इस पर चर्चा करते हैं... मानव शरीर में इतना सल्फर होता है कि एक कुत्ते पर मौजूद सारे कीटों को मार सके। 900 पेंसिल बनाने के लिए पर्याप्त कार्बन, एक खिलौना तोप को आग लगाने के लिए पर्याप्त पोटेशियम, साबुन के सात ...
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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गांव फुलेरा, जहां उसकी नौकरी लगी है वहां कई समस्‍याएं भी हैं।
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सरकार तुम चलाओ संगठन हमें चलाने दो, कुछ इसी तर्ज पर इन दिनों मध्यप्रदेश भाजपा काम कर रही है। संगठन में हो रही नियुक्तियों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कोई दखल नहीं। जैसा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत चाह रहे हैं, वही ...
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कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री केयर्स फंड से सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बीच खबरें हैं कि एक आयुर्वेदिक फ़ाउंडेशन के प्रस्ताव पर कुछ अस्पतालों में कोरोना मरीज़ों पर आयुर्वेदिक दवाओं के परीक्षण की अनुमति भी स्थानीय ...
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