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आखि‍र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्‍यों बोले?

मंगलवार,अक्टूबर 20, 2020
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खेती के अपशिष्ट से बनने वाली यह प्लाई आज बाजार में उपलब्‍ध सभी प्लाई से न केवल चार गुना ज्यादा मजबूत होगी बल्कि सस्ती भी. पराली से लेमिनेटेड और गैर लेमिनेटेड दोनों तरह की प्लाई बनेंगी जिसकी कीमत गुणवत्ता के हिसाब से 26 से 46 रुपए वर्गफीट तक होगी।
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देवी क्या है, यह नवरात्रि में एकांत में बैठे किेसी साधक से पूछिए... ध्यान के दौरान होने वाले उसके साथ होने वाले चमत्कार को जानिए... उस शक्ति और विराट स्वरूपा के अंश को महसूस कीजिए...
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मुझे बड़ा अजीब ही समझे, मुझे लेख लिखना है फूलों की पंखुडियों पर, परंतु लिखूं तो लिखूं कैसे और लिखने के लिए लाने है, पखुंडियों जैसे कोमल शब्द।
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बात यहां से शुरू करते हैं : मौके का फायदा उठाकर अपना प्रोफाइल कैसे बड़ा किया जाए यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से बेहतर और कोई नहीं समझता।
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गुजरात में बगैर गरबे की नवरात्रि न कभी देखी न सुनी..इस वर्ष माँ चाचर चौक में नही पधारी..शहर सूना.. गरबा ग्राउंड सूने..रातें सूनी..
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हम पिछले अनेक चुनावों में देखते आ रहे हैं कि चुनावों की घोषणा के पहले तक तो सभी दल विकास और जनता की आवाज़ बनने का दावा करते हैं। लेकिन घोषणा होने के बाद ज्यों-ज्यों प्रचार रफ़्तार पकड़ता है त्यों-त्यों असली मुद्दे ग़ायब होते जाते हैं। व्यक्तिगत ...
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यह राजस्‍थान के एक सामुहिक दुष्‍कर्म मामले की घटना के सच का सिर्फ एक हिस्‍सा है। ऐसा भारत के कई शहरों और दूर-दराज के गांवों में अक्‍सर होता है जिसकी खबर मीडि‍या को कभी नहीं लगती है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जब महाराष्ट्र से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका से अपने साक्षात्कार में कहा होगा कि पूरी दुनिया में भारत के मुस्लिम ही सबसे ज़्यादा संतुष्ट हैं, तब वे निश्चित ही कल्पना नहीं कर पाए होंगे कि एक राष्ट्रभक्त ...
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ओम पुरी अपनी फिल्म आक्रोश में खुद को इस तरह साबित करते है कि हिंदी सिनेमा को उनमें एक नया एंग्री यंगमेन नजर आने लगता है। एक ऐसा एंग्री यंग मेन जिसे गुस्से में सांस फुलाने और हाथ-पैर मारने की जरुरत नहीं थी, वो अपनी आंखों, आंखों की पुतलियों और ...
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बाल जीवन के आनंद और कल्पनाशीलता का कोई ओर-छोर नहीं है। भारत और एशिया के बच्चों के खेलकूद की सादगी और कल्पनाशीलता का कोई सानी नहीं है। 'अष्ट चंग पे' ये कोई चीनी साम्राज्य के पुराने राजा का नाम नहीं है। ये नाम है पुरानी पीढ़ी के भारत और एशिया के कई ...
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जब एक अनुभवी गृहिणी किसी कार्यक्षेत्र में आती है तो हर कार्य के लिए उसका एक अलग ही नज़रिया होता है। यही बात इंदौर जिले की उत्कृष्ट ग्राम पंचायत कोदरिया की सरपंच श्रीमती अनुराधा जोशी पर सटीक बैठती है।
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मां जैसी दुर्लभ देन मनुष्य जाति के लिए कोई दूसरी नहीं। एक ओर वह वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है तो दूसरी ओर शक्ति का अजस्र स्रोत।भारतीय आस्था सृष्टि के उदय से ही इसी मां की आराधना करती रही है।हमारी परम्परा में सप्त मातृकाओं की पूजन और आराधना इतिहास के ...
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‘कोरोना वायरस’ और इसकी भयावह ‘त्रासदी’ के बीच ‘उम्‍मीद की इस नवजात’ तस्‍वीर को अपनी जिंदगी में हर कोई साकार कर लेना चाहता है।
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इसका दुखद पहलू यह है कि पढ़े-लिखे और एज्‍युकेटेड लोग अपनी व्‍हाट्सएप्‍प यूनिवर्सिटी से नफरत की यह पाठशाला तैयार कर रहे हैं। बि‍ना सोचे-समझे व्‍हाट्एप्‍प से फेक न्‍यूज, फोटो और वीडि‍यो वायरल कर देने वाली यह मानसिकता एक होड़ में तब्‍दील हो चुकी है।
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मां, मुझे आपकी क्षमता पर तो कोई सवाल है ही नहीं, पर आप क्यों मौन हैं मैं आपकी हुंकार सुनना चाहती हूं, धनुष की टंकार सुनना चाहती हूं।
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क्या चिंता केवल यहीं तक सीमित कर ली जाए कि कुछ टीवी चैनलों ने विज्ञापनों के ज़रिए धन कमाने के उद्देश्य से ही अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए उस बड़े फ़र्जीवाड़े को अंजाम दिया होगा जिसका कि हाल ही में मुंबई पुलिस ने भांडाफोड़ किया है?
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भारत सरकार ने वंदे भारत मिशन की घोषणा कर दी। इस मिशन के तहत घर वापस जाने के लिए अकेले दुबई सीजीआई ऑफिस में साढ़े 6 लाख लोगों ने आवेदन दे दिया। बड़ी संख्या में आवेदन अबुधाबी स्थित दूतावास में भी पहुंचे।
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बॉलीवुड भी तभी तमतमाया और एकजुट होकर सामने आया जब मीडि‍या ने उसके ऊपर कीचड़ उछाला। बॉलीवुड को इसलिए भी संदिग्‍ध नजरों से देखा जाना चाहिए, क्‍योंकि इसके पहले वो कभी किसी दूसरे मुद्दे पर मुखर नहीं हुआ और सामने नहीं आया।
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विज्ञापन का विरोध करने वालों का कहना है कि यह सांप्रदायिक सौहार्द हमेशा बहुसंख्‍यक लड़कि‍यों और महिलाओं को लेकर ही क्‍यों दिखाया जाता है, इसकी जगह अल्‍पसंख्‍यक लड़की को इस तरह दिखाने की हिम्‍मत विज्ञापन और बॉलीवुड वाले क्‍यों नहीं करते हैं।
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