कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार
Guru Nanak Dev Ji Punyatithi 2026: प्रति वर्ष अनुसार सिख धर्म के संस्थापक तथा सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की पुण्यतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर को थी, लेकिन साल 2026 में तिथिनुसार उनकी पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण दशमी तिथि के दिन भी मनाई जा रही है, जो कि 5 अक्टूबर, सोमवार को आ रही है। गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। आइए, जानते हैं गुरु नानक देव जी के प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार के बारे में विस्तार से...
गुरु नानक देव के प्रमुख उपदेश और सिद्धांत
गुरु नानक देव जी धर्मगुरु, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, राष्ट्रप्रेम, एकता और शांति के प्रेरक, महान महापुरुष तथा सिख पंथ के प्रथम गुरु एवं संस्थापक थे। जब समाज में पाखंड, अंधविश्वास व कई असामाजिक कुरीतियां सिर उठाए खड़ी थीं, हर तरफ असमानता, छुआछूत व अराजकता का वातावरण जोरों पर था, ऐसे नाजुक समय में गुरु नानक देव ने आध्यात्मिक चेतना जाग्रत कर समाज को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया।
गुरु नानक देव ने की सिख धर्म की स्थापना
गुरु नानक देव ने जहां सिख धर्म की स्थापना की, वही उदारवादी दृष्टिकोण से सभी धर्मों की अच्छाइयों को भी समाहित किया। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, पुरानी रुढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाईचारे की दृढ़ नींव पर सिख धर्म की स्थापना की। उनका मुख्य उपदेश था, ईश्वर एक है, हिन्दू-मुसलमान सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं, ईश्वर के लिए सभी समान हैं और उसी ने सबको बनाया है।
गुरु नानक देव के अनमोल विचार
गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से अपना धन कमाकर जीवन जीना चाहिए। हमेशा तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए। धन को कभी भी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए, उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए। तभी आप लालच और अहंकार से दूर रह पाएंगे।
गुरु नानक देव कहते हैं हर मनुष्य को सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए। हर इंसान को हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए, क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, अत: मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।
गुरु नानक देव ने की 4 लंबी यात्राएं
गुरु नानक देव जी ने सत्य और मानवता के प्रचार के लिए लगभग 24 वर्षों तक चार दिशाओं में हजारों किलोमीटर की पैदल यात्राएं कीं, जिन्हें उदासी कहा जाता है। इन यात्राओं में उनके साथ उनके मुस्लिम साथी और संगीतकार भाई मरदाना (जो रबाब बजाते थे) भी रहते थे।
अंतिम समय और करतारपुर साहिब
अपनी यात्राओं के बाद गुरु नानक देव जी ने रावी नदी के तट पर करतारपुर (वर्तमान पाकिस्तान) नगर बसाया और एक किसान के रूप में जीवन व्यतीत किया।

