1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Situation worsens due to sanitation workers' strike during Dhanteras-Diwali

धनतेरस-दिवाली पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़े हालात, भोपाल में जगह-जगह कचरे के ढेर

मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत पर अड़े सफाई कर्मचारी

Madhya Pradesh News
भोपाल। धनतेरस और दीपावली के त्योहार से ठीक पहले मध्य प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने शहरी व्यवस्थाओं को प्रभावित कर दिया है। राजधानी भोपाल की सड़कों और कॉलोनियों में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। त्योहार के मौके पर सफाई व्यवस्था चरमराने से आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। प्रदेश के करीब ढाई लाख दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इसका असर प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं में देखने को मिल रहा है।
 
हड़ताल कर रहे कर्मचारी मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत करने की मांग पर अड़े हुए हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे सांसद, विधायक या किसी अन्य मध्यस्थ के जरिए बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर सीधे संवाद करना चाहिए। कर्मचारियों ने शुक्रवार को अटल भवन में तालाबंदी करने और जलापूर्ति रोकने की भी चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में शहरों की सफाई के साथ पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।
 
नियमितीकरण, वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग-सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, 25 हजार रुपये मासिक वेतन, ठेका प्रथा समाप्त करना और अनुकंपा नियुक्ति देना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में करीब 9 हजार रुपये के वेतन में परिवार चलाना मुश्किल है। वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
 
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर उठाए सवाल-नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाल्मीकि समाज के लोगों के पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सिर्फ दिखावा था? सरकार सफाई कर्मचारियों से संवाद क्यों नहीं कर रही है?
 
सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश के शहरों में फैले कचरे की जिम्मेदारी कौन लेगा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय या मुख्यमंत्री? दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी शहरों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। सरकार को बड़े-बड़े आयोजन करने का समय है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मांगें सुनने और उन्हें अधिकार देने का समय नहीं है।
 
उन्होंने सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में चैंबर की सफाई के दौरान हुई आठ घटनाओं में कई कर्मचारियों की मौत हुई है। सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का हवाला दिया, जिसके मुताबिक सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान किसी कर्मचारी की मौत होने पर 30 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में ऐसे मामलों में केवल 2 से 4 लाख रुपये दिए जाते हैं और कर्मचारियों को नियमित करने के नियमों का भी पालन नहीं हो रहा है।
 
सिंघार ने कहा कि सरकार कर्मचारियों को नियमित नहीं करना चाहती और न ही 25 हजार रुपये वेतन देने को तैयार है। आज के महंगाई के दौर में 9 हजार रुपये की सैलरी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में तत्काल नीति बनाने, ठेका प्रथा बंद करने और सफाई कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की।
 
दीपावली पर सफाई व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता-दीपावली के मौके पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने नगर निकायों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बाजारों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में कचरा जमा होने से नागरिकों की चिंता बढ़ रही है। अब सबकी नजर सरकार और हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के बीच होने वाली बातचीत पर है। सवाल यह है कि त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था कब तक सामान्य होगी और कर्मचारियों की मांगों पर सरकार क्या फैसला लेगी।
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
अगला लेख
UPI MDR Charges: क्या अब यूपीआई पेमेंट पर देना होगा चार्ज? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के जवाब से मची हलचल