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जिम्मी मगिलिगन सेंटर जाकर, पहली बार शुद्ध हवा, पानी और मिट्टी से उगा, सोलर कुकर पर पका हुआ भोजन देख मंत्रमुग्ध हुए छात्र
लॉरेल्स स्कूल इंटरनेशनल के कक्षा आठ के छात्र अपने टीचर्स फ़िरदौस ग़ोरी खान, अतिसुची सिन्हा और अंजलि बालखे के साथ, जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' शैक्षणिक भ्रमण पर आए। इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य क्लासरूम की थ्योरी और असल दुनिया की प्रैक्टिकल ग्रीन टेक्नोलॉजी के बीच के अंतर को कम करना था।
पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन की इस 'लिविंग लेबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) में जाकर, ग्रामीण परिवेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी; जैव-विविधता: दुर्लभ, स्थानीय पेड़-पौधों की पहचान करना और पर्यावरण संरक्षण को देखना और समझना; सर्कुलर इकोनॉमी का अध्ययन।
ज़ीरो-वेस्ट सिस्टम कृषि-अवशेषों से फ़ूड प्रोसेसिंग, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली और आत्मनिर्भरता से परिचित हुए, वह भी उनसे, जिन्हें प्यार से 'जनक दीदी' या 'ग्रीन हीरो' कहा जाता है। जीवन भर सोलर कुकर और साफ़-सुथरे खाना पकाने के तरीकों को आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को टिकाऊ कौशल का प्रशिक्षण दिया है, जिससे हज़ारों ग्रामीण समुदायों में बदलाव आया है।
सेंटर कैंपस पूरी तरह से ऑफ़-ग्रिड चलता है, जो ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन उदाहरण है। छात्रों ने सोलर और विंड पावर से साल भर रिन्यूएबल एनर्जी की लगातार आपूर्ति आंखों से देखी जनक दीदी ने एडवांस्ड सोलर ड्रायर सोलर डिहाइड्रेटर का इस्तेमाल करके दिखाया।
खुली हवा में धूप में सुखाने के विपरीत, ये बंद संरचनाएं खाने को धूल और कीड़ों से बचाती हैं और साथ ही गर्मी को अच्छी तरह बनाए रखती हैं। छात्रों ने देखा कि कैसे यह टेक्नोलॉजी बिना किसी केमिकल प्रिजर्वेटिव या बिजली की खपत के फलों और जड़ी-बूटियों के पोषक तत्वों, रंग और खुशबू को बनाए रखती है।
वनस्पति संबंधी चमत्कार: खास पेड़-पौधे और संरक्षण: यह फ़ार्म एक जीवित जीन बैंक के रूप में काम करता है, जो कई दुर्लभ और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों को संरक्षित करता है। डॉ. जनक ने व्यक्तिगत रूप से समूह को ऑर्गेनिक बाग की सैर कराई और खास प्रजातियों के बारे में बताया:
अरिठा, कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट और पर्सनल हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए 100% बायोडिग्रेडेबल और केमिकल-फ्री विकल्प के तौर पर काम करते हैं।
पारिजात: अपनी तेज़ खुशबू के लिए मशहूर इस पौधे के बारे में चर्चा हुई कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं, सूजन कम करने वाले इलाज और ज़रूरी तेल निकालने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
हनुमान जी वाला सिंदूर (बिक्सा ओरेलाना/ एनाट्टो): इस अनोखे पौधे ने छात्रों का ध्यान खींचा क्योंकि इसके बीजों से एक चमकदार, प्राकृतिक लाल रंग मिलता है। यह खाने की चीज़ों और कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाले ज़हरीले सिंथेटिक रंगों का एक सुरक्षित विकल्प है।
इस विज़िट की एक खास बात थी फ़ार्म की ज़ीरो-वेस्ट किचन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के बारे में जानना। खेतों में फ़सल के बचे हुए हिस्से, सूखी पत्तियां और टहनियां जलाने के बजाय—जिससे बहुत ज़्यादा वायु प्रदूषण होता है—फ़ार्म इस बिखरे हुए कचरे को इकट्ठा करके स्मोकलेस (धुआं-रहित) ब्रिकेट बनाते हैं।
डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अनूठी मिसाल है। उनका सनावादिया स्थित घर और फ़ार्म, ज़ीरो वेस्ट और ज़ीरो यूटिलिटी बिल के साथ चलते हैं, जो यह साबित करता है कि पूरी तरह से सस्टेनेबल (टिकाऊ) जीवनशैली अपनाना मुमकिन है। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को न केवल पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग की जानकारी से अवगत कराना था अपितु उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी था।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण-अनुकूल आवास तथा 'जीरो वेस्ट' एवं 'जीरो डिस्चार्ज' की अवधारणा को सरल एवं रोचक ढंग से समझा। फ़िरदौस ग़ोरी ने इस अवसर को अत्यंत गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. पलटा मगिलिगन से प्रत्यक्ष संवाद एवं उनके सतत विकास मॉडल का अवलोकन विद्यार्थियों के लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव रहेगा।
संकाय नेतृत्वकर्ता: श्रीमती फिरदौस गोरी खान
