'अवैध होर्डिंग्स' के जंजाल में फंसा सबसे स्वच्छ शहर, हादसों से भी नहीं सबक, स्वच्छता के तमगे पर बट्टा, ट्रैफिक में कैसे होंगे नंबर वन
सफाई में नंबर वन इंदौर के लिए दावा तो यह किया जाता है कि ट्रैफिक में भी नंबर वन बनेंगे, लेकिन इस वक्त शहर में अवैध होर्डिंग का जो जंजाल नजर आ रहा है, उसने शहर के सारे नंबर वन के तमगों पर बट्टा लगा दिया है। गणेश उत्सव पांडालों के आसपास कई जगहों पर अवैध होर्डिंग से कब्जा कर लिया गया है। कहीं सड़क पर ही स्वागत द्वार लगा रखे हैं तो कहीं किसी दीवार या छज्जे के सहारे होर्डिंग लटका रखे हैं। बुधवार को ही पाटनीपुरा पर एक होर्डिंग गिरने की घटना में 6-7 लोग घायल हो गए।
पाटनीपुरा से मालवा मिल और पंढरीनाथ जैसे व्यस्ततम व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में बिना अनुमति और घटिया संरचना के लगाए गए भारी-भरकम होर्डिंग्स न केवल शहर की खूबसूरती को बदरंग कर रहे हैं, बल्कि नागरिकों की जिंदगी के लिए भी सीधा खतरा बन चुके हैं।
इस संबंध में चर्चा करने के लिए वेबदुनिया ने नगर निगम कमिश्नर क्षितीज सिंघल से संपर्क किया तो उनका मोबाइल बंद मिला। उनके कार्यालय पहुंचकर उनसे चर्चा करना चाही तो बताया गया कि वे अभी ऑफिस नहीं आए हैं।
बुधवार की घटना सीधी चेतावनी : बुधवार को पाटनीपुरा चौराहे पर अचानक एक बड़ा अवैध होर्डिंग गिर गया, जिसकी चपेट में आने से 6 लोग घायल हो गए। इनमें से एक शख्स को गंभीर चोटें आई थीं। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का सबूत है, जिसे समय रहते सुधारा नहीं गया।
बधाई के होर्डिंग कहीं किसी की जान न ले ले : पाटनीपुरा, मालवा मिल, जवाहर मार्ग, परदेशीपुरा, नंदा नगर, बजरंगनगर और पंढरीनाथ समेत शहर के कई इलाकों में राजनीतिक, गणेशोत्सव की बधाई और जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ होर्डिंग नजर आ रहे हैं। ये ऐसे इलाके हैं, जहां दिन-रात वाहनों और राहगीरों की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में इन होर्डिंग्स का गिरना किसी बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है।
नगर निगम प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल : इंदौर प्रशासन यूं तो शहर को ट्रैफिक में भी नंबर वन बनाने का दावा करता है।, लेकिन यह दावा सिर्फ एक खोखला बहाना साबित हो रहा है। जब शहर स्वच्छता में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, तब इस प्रकार की अनियंत्रित और अवैध गतिविधियों पर नगर निगम प्रशासन की निष्क्रियता समझ से परे है।
कार्रवाई में ढिलाई क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बता दें कि बिना स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच के बड़े-बड़े फ्रेम खड़े कर दिए गए हैं, जो हल्की हवा या बारिश में भी गिर सकते हैं। शहर भर में लगे इन अवैध होर्डिंग्स से न केवल सुरक्षा जोखिम बढ़ा है, बल्कि नगर निगम को मिलने वाले राजस्व को भी चूना लग रहा है।
ब्रांड इंदौर की साख पर धब्बा और ट्रैफिक पर असर
बता दें कि इंदौर स्वच्छता में नंबर 1 है, लेकिन सडकों से गुजरने वाले वाहन चालक और आम नागरिक इन अवैध होर्डिंग्स के खौफ में ही जी रहे हैं। पता नहीं कब कौनसा होर्डिंग या बैनर उन पर आ गिरे।
स्वच्छता के तमगे पर बट्टा: शहर की दीवारों को चमकाने और सड़कों को साफ रखने के बाद सिर के ऊपर लटकते ये लोहे के छज्जे और होर्डिंग शहर की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
ट्रैफिक के लिए मुसीबत बने होर्डिंग : एक तरफ इंदौर ट्रैफिक में भी नंबर वन बनने का सपना देख रहा है, लेकिन जब प्रमुख चौराहों और सड़कों पर विजिबिलिटी बाधित करने वाले और दुर्घटना का कारण बनने वाले अवैध होर्डिंग्स का कब्जा रहेगा, तो सुरक्षित और सुचारू यातायात का दावा सिर्फ एक ढकोसलाभर है।
चालकों का ध्यान भटकता है: चौराहों पर लगे अनधिकृत विज्ञापन बोर्ड वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं इंदौर के नागरिक : शहर के जागरुक नागरिकों का कहना है कि पाटनीपुरा, मालवा मिल, पंढरीनाथ समेत पूरे शहर में विशेष अभियान चलाकर 24-48 घंटों के भीतर सभी अवैध/कमजोर होर्डिंग्स को ध्वस्त किया जाए। हादसों के जिम्मेदारों और बिना अनुमति होर्डिंग लगाने वाली एजेंसियों पर सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर भारी जुर्माना लगाया जाए। इसके साथ ही शहर के सभी वैध होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाए। संबंधित जोन के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि अवैध रूप से होर्डिंग खड़े ही न हो सकें। अगर नगर निगम प्रशासन ने अब भी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कोई ठोस और स्थायी नीति नहीं बनाई, तो इंदौर का स्वच्छता और ट्रैफिक सुधार का संकल्प सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।
25 सितंबर को अवैध होर्डिंग हटाने का आश्वासन : बता दें कि होर्डिंग को लेकर पिछले करीब 7 दिनों से प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि होर्डिंग अवैध तरीके से लगाया गया है। इसे लेकर उन्होंने नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर से भी शिकायत की थी। प्रह्लाद पांडेय से मंगलवार शाम प्रशासनिक अधिकारियों ने चर्चा की। शाम करीब 7 बजे एसडीएम धनगर धरना स्थल पर पहुंचे। उनके साथ नगर निगम के रिमूवल विभाग के अधिकारी बबलू कल्याणे और स्वास्थ्य विभाग की महिला चिकित्सक भी मौजूद थे। बता दें कि प्रहलाद पांडे का स्वास्थ्य खराब हो गया है, उन्हें इलाज के लिए सुपरस्पेशिलटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच खबर है कि प्रहलाद पांडे ने अनशन समाप्त कर दिया है, कहा जा रहा है कि नगर निगम प्रशासन ने उन्हें 25 सितंबर को अवैध होर्डिंग हटाने का आश्वासन दिया है।
इस संबंध में चर्चा करने के लिए वेबदुनिया ने नगर निगम कमिश्नर क्षितीज सिंघल से संपर्क किया तो उनका मोबाइल बंद मिला। उनके कार्यालय पहुंचकर उनसे चर्चा करना चाही तो बताया गया कि वे अभी ऑफिस नहीं आए हैं।
बुधवार की घटना सीधी चेतावनी : बुधवार को पाटनीपुरा चौराहे पर अचानक एक बड़ा अवैध होर्डिंग गिर गया, जिसकी चपेट में आने से 6 लोग घायल हो गए। इनमें से एक शख्स को गंभीर चोटें आई थीं। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का सबूत है, जिसे समय रहते सुधारा नहीं गया।
बधाई के होर्डिंग कहीं किसी की जान न ले ले : पाटनीपुरा, मालवा मिल, जवाहर मार्ग, परदेशीपुरा, नंदा नगर, बजरंगनगर और पंढरीनाथ समेत शहर के कई इलाकों में राजनीतिक, गणेशोत्सव की बधाई और जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ होर्डिंग नजर आ रहे हैं। ये ऐसे इलाके हैं, जहां दिन-रात वाहनों और राहगीरों की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में इन होर्डिंग्स का गिरना किसी बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है।
कार्रवाई में ढिलाई क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बता दें कि बिना स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच के बड़े-बड़े फ्रेम खड़े कर दिए गए हैं, जो हल्की हवा या बारिश में भी गिर सकते हैं। शहर भर में लगे इन अवैध होर्डिंग्स से न केवल सुरक्षा जोखिम बढ़ा है, बल्कि नगर निगम को मिलने वाले राजस्व को भी चूना लग रहा है।
ब्रांड इंदौर की साख पर धब्बा और ट्रैफिक पर असर
बता दें कि इंदौर स्वच्छता में नंबर 1 है, लेकिन सडकों से गुजरने वाले वाहन चालक और आम नागरिक इन अवैध होर्डिंग्स के खौफ में ही जी रहे हैं। पता नहीं कब कौनसा होर्डिंग या बैनर उन पर आ गिरे।
ट्रैफिक के लिए मुसीबत बने होर्डिंग : एक तरफ इंदौर ट्रैफिक में भी नंबर वन बनने का सपना देख रहा है, लेकिन जब प्रमुख चौराहों और सड़कों पर विजिबिलिटी बाधित करने वाले और दुर्घटना का कारण बनने वाले अवैध होर्डिंग्स का कब्जा रहेगा, तो सुरक्षित और सुचारू यातायात का दावा सिर्फ एक ढकोसलाभर है।चालकों का ध्यान भटकता है: चौराहों पर लगे अनधिकृत विज्ञापन बोर्ड वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं इंदौर के नागरिक : शहर के जागरुक नागरिकों का कहना है कि पाटनीपुरा, मालवा मिल, पंढरीनाथ समेत पूरे शहर में विशेष अभियान चलाकर 24-48 घंटों के भीतर सभी अवैध/कमजोर होर्डिंग्स को ध्वस्त किया जाए। हादसों के जिम्मेदारों और बिना अनुमति होर्डिंग लगाने वाली एजेंसियों पर सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर भारी जुर्माना लगाया जाए। इसके साथ ही शहर के सभी वैध होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाए। संबंधित जोन के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि अवैध रूप से होर्डिंग खड़े ही न हो सकें। अगर नगर निगम प्रशासन ने अब भी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कोई ठोस और स्थायी नीति नहीं बनाई, तो इंदौर का स्वच्छता और ट्रैफिक सुधार का संकल्प सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।

