हनुमान अंश नीम करोली बाबा, जानिए 6 ऐसी बातें जिसे जानकर आश्चर्य करेंगे
Hanuman Ansh: बाबा नीम करोली एक दिव्य और चमत्कारिक संत थे, जिन्हें उनके भक्त भगवान हनुमानजी का अवतार मानते हैं। वे एक अत्यंत सरल और सादे स्वभाव के व्यक्ति थे। हाल ही में उनके जीवन पर आधारित बनी फिल्म 'हनुमान अंश' बहुत चर्चा में है। इसी संदर्भ में चलिए जानते हैं हनुमानजी के परम भक्त और दिव्य संत नीब करोली बाबा के बारे में 6 महत्वपूर्ण जानकारी।
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फिल्म हनुमान अंश:
फिल्म में शोभिनव सत्या ने नीम करोली बाबा का मुख्य किरदार निभाया है। उनके अलावा चंदन के. आनंद, विहान शेज, पूर्णिमा तिवारी और अनिल रस्तोगी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। यह फिल्म 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी यह फिल्म बिना किसी बड़े प्रमोशन के रिलीज़ हुई थी, लेकिन दर्शकों के वर्ड-ऑफ़-माउथ (प्रशंसा) और सोशल मीडिया के जरिए यह 2026 की एक सरप्राइज ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
1. प्रारंभिक जीवन एवं परिवार
जन्म और वास्तविक नाम: बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गाँव में लगभग 1900 में हुआ था। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था और उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था।
विवाह एवं ज्ञान प्राप्ति: मात्र 11 वर्ष की उम्र में उनका विवाह हो गया था। उन्हें 17 वर्ष की अल्पायु में ही आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।
परिवार: उनके दो पुत्र (ज्येष्ठ पुत्र अनेक सिंह और कनिष्ठ पुत्र दिवंगत धर्म नारायण शर्मा) तथा एक पुत्री हैं।
2. गृह त्याग एवं नामकरण कथा
गृह त्याग: वर्ष 1958 में बाबा ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया और पूरे उत्तर भारत में साधु के रूप में विचरण करने लगे। इस दौरान वे लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा, तिकोनिया वाले बाबा और तलईया बाबा (गुजरात के मोरबी में) जैसे कई नामों से जाने गए।
'नीम करोली' नाम पड़ने की कथा: एक बार बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। टीटीई ने उन्हें अगले स्टेशन 'नीब करोली' पर ट्रेन से उतार दिया। बाबा स्टेशन के पास ही चिमटा गाड़कर बैठ गए। इसके बाद ट्रेन को चलाने के तमाम प्रयास विफल रहे और वह एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। स्थानीय मजिस्ट्रेट की सलाह पर अधिकारियों ने बाबा से माफी मांगी और उन्हें सम्मानपूर्वक वापस ट्रेन में बैठाया, जिसके तुरंत बाद ट्रेन चल पड़ी। इस चमत्कार के बाद से उन्हें 'नीम करोली बाबा' कहा जाने लगा।
3. प्रसिद्ध चमत्कार: 'बुलेटप्रूफ कंबल'
बाबा हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़ा करते थे। वर्ष 1943 में फतेहगढ़ के एक बुजुर्ग दंपत्ति के घर रुके बाबा रातभर कंबल ओढ़कर कराहते रहे, जैसे कोई उन्हें मार रहा हो। सुबह बाबा ने वह कंबल (चादर) लपेटकर दंपत्ति को देते हुए कहा कि इसे बिना खोले गंगा में प्रवाहित कर दें और आश्वस्त किया कि उनका बेटा लौट आएगा।
जब दंपत्ति उस कंबल को ले जा रहे थे, तो उन्हें उसमें लोहे की गोलियों जैसी भारी चीज़ महसूस हुई। लगभग एक महीने बाद उनका बेटा (जो द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से बर्मा फ्रंट पर तैनात था) सुरक्षित घर लौट आया। उसने बताया कि उसी रात दुश्मनों की भीषण गोलीबारी में उसके सारे साथी मारे गए थे, लेकिन वह चमत्कारिक रूप से एक भी गोली लगे बिना बच गया।
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4. कैंची धाम और समाधि स्थल
स्थापना: उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम में बाबा पहली बार 1961 में आए थे। उन्होंने अपने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिलकर 1964 में इस आश्रम की स्थापना की। देवदार के पेड़ों और पहाड़ियों के बीच बसे इस धाम में हनुमानजी सहित 5 देवी-देवताओं के मंदिर हैं।
समाधि स्थल: बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अपने शरीर का त्याग किया। उनका समाधि स्थल पंतनगर (नैनीताल के पास) में स्थित है। प्रतिवर्ष 15 जून को कैंची धाम में भव्य मेले का आयोजन होता है।
5. देश-विदेश में प्रसिद्ध भक्त
अंतरराष्ट्रीय हस्तियाँ: बाबा के आश्रम में बड़ी संख्या में विदेशी भक्त आते हैं। लेखक रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) ने बाबा पर 'मिरेकल ऑफ़ लव' नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।
दिग्गज हस्तियाँ: एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स (1974 में आए), फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स (जो बाबा का चित्र देखकर उनकी भक्त बनीं) के जीवन में इस धाम की यात्रा से बड़ा बदलाव आया।
भारतीय हस्तियाँ: क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा भी बाबा के नियमित भक्तों में शामिल हैं।
6. नीम करोली बाबा के 6 मुख्य उपदेश
राम नाम जप: नित्य राम राम जपना चाहिए। बस यही एक काम आपके जीवन के सभी संकट हटा देगा।
नियमित पूजन: प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करना चाहिए।
ब्रह्म मुहूर्त का महत्व: रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गौ सेवा: प्रतिदिन भोजन का पहला निवाला गौ माता को दें; इससे समस्त देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
मौन की शक्ति: व्यक्ति को मौन रहने की कला सीखनी चाहिए। इससे ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि अंतर्मन में संचित होकर विवेक और बुद्धि का विकास करती है।
प्रेम और सत्य का मार्ग: सभी के प्रति मन में प्रेम, सेवा भाव रखें और हमेशा सत्य बोलें, क्योंकि श्रेष्ठ व्यक्तित्व ही समाज में वास्तविक सम्मान पाता है।

