NID अहमदाबाद ने तैयार किए सोमनाथ मंदिर के प्रसाद के लिए खास बॉक्स: नंदी, बेलपत्र और धार्मिक रंगों से सजा इको-फ्रेंडली पैकेजिंग
सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमनाथ धाम में प्रसाद के लिए इन दो नए बॉक्सों का अनावरण किया।
गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) के सहयोग से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID), अहमदाबाद द्वारा यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। NID की टीम ने भारत के 28 प्रसिद्ध मंदिरों में प्रसाद की पैकेजिंग का गहन अध्ययन करने और अंबाजी मंदिर का फील्ड विजिट करने के बाद यह इको-फ्रेंडली डिजाइन तैयार की है।
नंदी, बेलपत्र और धार्मिक रंगों से सजी आकर्षक डिजाइन
प्रसाद के इन नए बॉक्सों के लिए कुल 18 से अधिक डिजाइन तैयार की गई थीं, जिनमें से अंततः भगवान शिव के वाहन नंदी, बेलपत्र और मंदिर के भव्य स्थापत्य (आर्किटेक्चर) से प्रेरित 2 शानदार डिजाइन फाइनल की गईं। इन बॉक्सों में पूजा में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और कुमकुम को ध्यान में रखते हुए पीला (येलो) और केसरिया (ऑरेंज) रंग चुना गया है, जबकि नंदी को नीले (ब्लू) रंग में दर्शाया गया है। इसके अलावा, पर्यावरण जागरूकता फैलाने के लिए बॉक्स पर प्लास्टिक प्रदूषण घटाने और पर्यावरण बचाने के सामाजिक संदेश भी लिखे गए हैं।
प्लास्टिक की जगह कागज और टिन का उपयोग
सोमनाथ मंदिर में मिलने वाले प्रसाद के प्लास्टिक डिब्बों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए वर्ष 2024 से इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया था। NID की फैकल्टी नेहा मांडलिक और उनकी टीम ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अब प्लास्टिक के बजाय कागज और टिन (मेटल) से बने आकर्षक बॉक्स तैयार किए हैं। इस पहल से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को प्लास्टिक के कचरे से मुक्ति मिलेगी तथा सोमनाथ धाम आने वाले लाखों भक्तों में पर्यावरण के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ धाम से शुरू हुआ यह क्रांतिकारी बदलाव भक्ति और पर्यावरण सुरक्षा का एक अनोखा संगम साबित होगा। श्रद्धालु जब भी मंदिर से दर्शन कर बाहर निकलेंगे, तो उनके हाथ में मौजूद पवित्र प्रसाद केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा का भी प्रतीक होगा। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले प्लास्टिक को त्यागकर कागज और टिन के डिब्बे अपनाने का सोमनाथ ट्रस्ट का यह निर्णय आने वाले दिनों में देश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणादायी साबित होगा।

