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पहले 10 लाख जमा किए, IDA ने फिर मांगे 4 लाख रुपए, राहुल गांधी के इंदौर में आयोजन में फिर अड़चन

rahul gandhi chatro ki gunj
इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज आयोजन को लेकर अड़चनें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कांग्रेस को पहले तो अनुमति नहीं दी जा रही थी, फिर जैसे तैसे रीजनल पार्क के सामने वाले आईडीए मैदान के लिए अनुमति मिली तो अब इंदौर विकास प्राधिकरण यानी आईडीए (IDA) ने तैयारी के नाम पर फिर से कांग्रेस से 4 लाख रुपए अतिरिक्‍त मांग लिए हैं।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के मुताबिक मैदान के लिए आवेदन करने पर शुरुआत में करीब 2 लाख रुपए शुल्क बताया गया था। बाद में शुल्क बढ़ाया गया और करीब 10 लाख रुपए किराया निर्धारित किया गया। कांग्रेस ने निर्धारित राशि जमा कर दी। इसके बाद IDA के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से तैयारी के लिए 4 लाख रुपए अतिरिक्त जमा करने का पत्र दिया गया।

तारीख को लेकर भी सवाल : कांग्रेस शहर अध्‍यक्ष चिंटू चौकसे ने अनुमति की तारीख को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि IDA ने कार्यक्रम की अनुमति 15 सितंबर को दी, जबकि तैयारी के लिए लगाए गए अतिरिक्त शुल्क की गणना 14 सितंबर से की गई है। कांग्रेस ने इसे अनुचित बताते हुए प्रशासन पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।

एक लाख 8 हजार पहले ही जमा : कांग्रेस के मुताबिक, रीजनल पार्क के सामने करीब 12 हजार वर्गमीटर मैदान 17 से 19 सितंबर तक तीन दिन के लिए आवंटित किया गया है। मैदान के लिए 10.08 लाख रुपए पहले ही जमा किए जा चुके थे। अब तैयारी के शुल्क के रूप में 4 लाख रुपए और जमा किए गए हैं। चौकसे ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ युवाओं और आने वाली पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित कार्यक्रम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की तैयारियों में शुल्क और अनुमति से जुड़ी अड़चनें खड़ी की जा रही हैं।

इंदौर प्रशासन डाल रहा अड़चनें : बता दें कि 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी का आयोजन हो रहा है। कांग्रेस ने इसकी जोरशोर से तैयारी शुरू कर दी है। राहुल गांधी यहां छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। कांग्रेस के मुताबिक यह गैर राजनीतिक आयोजन है। लेकिन इंदौर नगर निगम प्रशासन और आईडीए प्रशासन इस आयोजन में कई तरह की अड़चनें डाल रहा है, ताकि आयोजन यहां न हो सके। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पहले अनुमति नहीं दी गई, फिर ज्‍यादा शुल्‍क वसूला गया, और बाद में राहुल गांधी के मैदान तक जाने वाले रूट में भी विवाद खडा किया गया।
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