इंदौर कलेक्टर को धन्यवाद देने भजिए-परांठे लेकर पहुंची द्वारिका, ये थी थैंक यू कहने की वजह
इंदौर की जनसुनवाई में मंगलवार का दिन बेहद खास था। यूं तो लोग कलेक्टर के पास शिकायत लेकर पहुंचते हैं, लेकिन एक महिला कोई शिकायत नहीं, बल्कि धन्यवाद लेकर पहुंची। उसके हाथों में किसी सरकारी कागज की फाइल नहीं, बल्कि घर के बने गरमा-गरम पराठे, मूंग के भजिए और मिठाई का डिब्बा था। सामने कलेक्टर शिवम वर्मा थे और महिला की आंखों में खुशी के आंसू थे।
दरअसल, देवास के खातेगांव के रहने वाले राम दयाल प्रजापति और उनकी पत्नी द्वारिका की, जो इन दिनों इंदौर के मुसाखेड़ी इलाके में किराए के मकान में रहते हैं। राम दयाल पहले जेसीबी चलाकर अपने परिवार का गुजर-बसर करते थे। लेकिन करीब पांच साल पहले उनकी एक के बाद एक दोनों किडनियां खराब हो गईं और लिवर में भी गंभीर दिक्कत आ गई। कमाने वाला मुखिया बिस्तर पर आ गया और परिवार के सिर से छत छिनने की नौबत आ गई
हालात इतने बदतर हो चुके थे कि द्वारिका अपने पति के इलाज के दौरान एमवाय अस्पताल में ही रहने को मजबूर थीं। अस्पताल के मुफ्त खाने से किसी तरह दिन कट रहे थे, लेकिन भविष्य पूरी तरह अंधकारमय था। ऐसे में उन्होंने उम्मीद की आखिरी किरण के रूप में इंदौर कलेक्टर की जनसुनवाई का दरवाजा खटखटाया।
प्रशासन ने सिर्फ आर्थिक मदद देकर पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि उन्हें पैरों पर खड़ा करने के लिए देव गुराड़िया बायपास पर चाय और भजिए की दुकान शुरू करवा दी। आज इसी छोटी सी दुकान से परिवार को रोजाना 1000 से 1500 रुपए की आमदनी हो रही है। अपनी इस बदली हुई जिंदगी का आभार जताने के लिए ही द्वारिका मंगलवार को खुद अपने हाथों से पराठे और भजिए बनाकर कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंची थीं।
हालात इतने बदतर हो चुके थे कि द्वारिका अपने पति के इलाज के दौरान एमवाय अस्पताल में ही रहने को मजबूर थीं। अस्पताल के मुफ्त खाने से किसी तरह दिन कट रहे थे, लेकिन भविष्य पूरी तरह अंधकारमय था। ऐसे में उन्होंने उम्मीद की आखिरी किरण के रूप में इंदौर कलेक्टर की जनसुनवाई का दरवाजा खटखटाया।
प्रशासन ने सिर्फ आर्थिक मदद देकर पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि उन्हें पैरों पर खड़ा करने के लिए देव गुराड़िया बायपास पर चाय और भजिए की दुकान शुरू करवा दी। आज इसी छोटी सी दुकान से परिवार को रोजाना 1000 से 1500 रुपए की आमदनी हो रही है। अपनी इस बदली हुई जिंदगी का आभार जताने के लिए ही द्वारिका मंगलवार को खुद अपने हाथों से पराठे और भजिए बनाकर कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंची थीं।

