बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी सफलता: अहमदाबाद में साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबा पुल बनकर तैयार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबे बुलेट ट्रेन पुल का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो इस प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। लगभग 36 मीटर (12 मंजिला इमारत के बराबर) ऊंचा यह पुल वेस्टर्न रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य लाइन के पास, जमीन की सतह से 14.8 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ALSO READ: गुजरात में बिजनेस करना हुआ और भी आसान: सरकार लाई नई GCC पॉलिसी
पुल की स्थिति और एलिवेटेड डिजाइन
यह पुल साबरमती और अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच बनाया गया है, जो साबरमती स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से 4 किलोमीटर दूर है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का अलाइनमेंट शहर में मौजूदा फ्लाईओवर, पुल, रेलवे लाइनों और मेट्रो कॉरिडोर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर से गुजरता है। इसलिए, आवश्यक वर्टिकल क्लियरेंस बनाए रखने के लिए साबरमती नदी पुल के पियर्स (खंभों) को विशेष रूप से एलिवेटेड डिजाइन किया गया है।
Another major milestone achieved for India's first Bullet Train project! The construction of the Bullet Train Bridge over the Sabarmati River in Ahmedabad is now complete. With this, 18 out of the 21 river bridges planned across Gujarat stand successfully completed, accelerating our journey toward high-speed, world-class connectivity.
— Rushikesh Patel (@irushikeshpatel) October 5, 2026
पियर्स की व्यवस्था और खासियतें
इस पुल में 6 से 6.5 मीटर व्यास वाले आठ गोलाकार पियर्स हैं, जिनमें से चार नदी के तल में, दो नदी के किनारों पर और दो बाहर बनाए गए हैं ताकि नदी के जल प्रवाह में कम से कम रुकावट आए। सामान्य तौर पर इस कॉरिडोर के पुलों में 40 मीटर का स्पैन होता है, जबकि साबरमती नदी पुल में 50 से 76 मीटर तक के लंबे स्पैन का उपयोग करके नदी तल में आवश्यक पियर्स की संख्या को कम रखा गया है। ALSO READ: उत्तराखंड के बाद गुजरात में भी लागू हुआ UCC: विवाह, तलाक और लिव-इन के नियम बदले
बैलेंस्ड कैंटिलीवर टेक्नोलॉजी का उपयोग
पुल के निर्माण के लिए 'बैलेंस्ड कैंटिलीवर मेथड' (Balanced Cantilever Method) नामक विशेष आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक से डेक के नीचे पारंपरिक स्कैफोल्डिंग के बिना, पियर्स के दोनों ओर संतुलित रूप से सेगमेंट्स को जोड़कर मजबूत डेक तैयार किया जाता है। पुल में 76-मीटर के पांच और 50-मीटर के दो स्पैन शामिल हैं, जिनके सभी 23 सेगमेंट्स का निर्माण उच्च सटीकता और गुणवत्ता जांच के साथ निर्माण स्थल पर ही किया गया था।
25 में से 18 नदी पुल पूरे और ट्रायल रन की तैयारी
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 25 नदी पुल हैं (21 गुजरात में और 4 महाराष्ट्र में), जिनमें से गुजरात के 21 में से 18 पुलों का काम अब पूरा हो चुका है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, गुजरात में इस साल के अंत तक ट्रायल गतिविधियों की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त, 2027 को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर दौड़ना शुरू करेगी।

