गणेश चतुर्थी पर जानिए गणपति जी के 5 चमत्कारी मंदिर के बारे में रोचक जानकारी
देश-विदेश में भगवान गणेश के हजारों मंदिर हैं जहां पर कई प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान हैं परंतु देश में कुछ ऐसे खास मंदिर हैं जहां जातक आपकी मनोकामना पूर्ण होती है और जिन्हें चमत्कारी मंदिर माना जाता है। आओ जानते हैं ऐसे ही खास 5 मंदिरों की संक्षिप्त जानकारी।
1. डोडीताल, उत्तराखंड:
उत्तरकाशी जिले के डोडीताल को गणेशजी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर माता अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर हैं जहां गणेशजी अपनी माता के साथ विराजमान हैं। डोडीताल, जोकि मूल रूप से बुग्याल के बीच में काफी लंबी-चौड़ी झील है, वहीं गणेश का जन्म हुआ था।
2. सिद्धि विनायक गणेश मंदिर मुंबई:
इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर सन 1801 में गुरुवार के दिन पूर्ण हुआ था। मुंबई प्रभादेवी में काका साहेब गाडगिल मार्ग और एस.के. बोले मार्ग के कोने पर वह मंदिर स्थित है। मंदिर की सिद्धि और प्रसिद्धि इतनी है कि आम हो या खास, सभी बप्पा के दर पर खिंचे चले आते हैं। महाराष्ट्र में सिद्धि विनायक मंदिर की तरह भी दगड़ू सेठ गणपति का मंदिर भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
3. चिंतामन गणपति उज्जैन:
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर दूर ग्राम जवास्या में भगवान गणेश का प्राचीनतम मंदिर स्थित है। इसे चिंतामण गणेश के नाम से जाना जाता है। गर्भगृह में प्रवेश करते ही गणेशजी की तीन प्रतिमाएं दिखाई देती हैं। पहला चिंतामण, दूसरा इच्छामन और तीसरा सिद्धिविनायक। यह स्वयंभू मूर्तियां हैं। उज्जैन में बड़ा गणेश का मंदिर भी चमत्कारी मंदिर है।
श्यामकर्ण विनायक, उज्जैन (मध्य प्रदेश) उज्जैन में ही चिंतामण के अलावा एक और गणेश मंदिर है। कालभैरव और महाकाल क्षेत्र में स्थित यह मंदिर ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां गणेश जी के श्याम वर्ण रूप को पूजा जाता है जो कि दुर्लभ है।
4. रॉकफोर्ट उच्ची पिल्लयार मंदिर, तमिलनाडु:
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) में रॉक फोर्ट नामक पहाड़ी के सबसे उपर स्थित उच्ची पिल्लयार मंदिर बहुत ही प्राचीन माना जाता है। यहां रावण के भाई विभीषण ने एक बार भगवान गणेशजी पर वार किया था। तब गणेशजी अपने असली रूप में प्रकट हो गए तो यह देखकर विभीषण पछताए और उन्होंने क्षमा मांगी थी तभी से इस चोटी पर गणेशजी विराजमान हैं।
5. मधुर महागणपति मंदिर, केरल:
मधुवाहिनी नदी के तट पर स्थित दसवीं शताब्दी के इस मंदिर की गणेश मूर्ति न ही मिट्टी की बनी है और न ही किसी पत्थर की यह न जाने किस तत्व से बनी है। इस मंदिर और इसकी मूर्ति को नष्ट करने के लिए एक बार टीपू सुल्तान यहां आया था परंतु यहां की किसी चीज ने उसे आकर्षित किया और उसका फैसला बदल गया।

