Diwali 2026 Puja Samagri List: धनतेरस से भाई दूज तक, 5 दिनों की पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट यहाँ देखें
दिवाली का महापर्व पांच दिनों तक लगातार मनाया जाता है, जिसमें धनतेरस से लेकर भाई दूज तक प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व और पूजन विधान है। दिवाली पर्व 2026: पांच दिवसीय महाउत्सव की संपूर्ण पूजा सामग्री लिस्ट। इन सभी दिनों की पूजा सामग्री की सुव्यवस्थित सूची नीचे दी गई है:
1. प्रथम दिन: धनतेरस पूजन सामग्री
धनतेरस पर मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर जी की पूजा की जाती है।
प्रतिमा व स्थापना: बैठा हुआ लक्ष्मी-गणेश जी का अलग-अलग विग्रह (मूर्ति), कुबेर देव की तस्वीर या मूर्ति, लकड़ी की चौकी, लाल या पीला वस्त्र।
पवित्र जल व कलश: गंगाजल, पूजा का कलश।
तिलक व अक्षत: रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), मौली (कलावा)।
दीप व धूप: घी का दीपक, रुई की बत्ती, गाय का शुद्ध घी, धूप, अगरबत्ती, कपूर।
भोग व पुष्प: शक्कर या गुड़, ताजे पुष्प, पूजा की थाली।
2. द्वितीय दिन: नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) सामग्री
यह दिन अभ्यंग स्नान (सौंदर्य व आरोग्य प्राप्ति) और यमराज के लिए दीपदान हेतु समर्पित है।
अभ्यंग स्नान सामग्री:
उबटन: तिल का तेल, बेसन, हल्दी, चंदन पाउडर और गुलाब जल का मिश्रण।
औषधीय पौधा: अपामार्ग (चिरचिटा) का पौधा या पत्तियां (सिर से घुमाकर स्नान करने हेतु)।
यम दीपदान सामग्री:
दीपक व बत्ती: मिट्टी का 1 बड़ा चौमुखी दीपक, 4 रुई की बत्तियां।
तेल व अर्पण: सरसों का तेल या तिल का तेल, 1 कौड़ी या लोहे/तांबे का सिक्का।
आसन (ढेरी): गेहूं, चावल या खीले।
मुख्य पूजा सामग्री:
जल पात्र व आचमनी, रोली, अक्षत, दूर्वा (दूब घास)।
ताजे फूल (लाल/पीले), धूप-अगरबत्ती, खीले-बताशे, फल या घर की मिठाई।
3. तृतीय दिन: महालक्ष्मी एवं श्री गणेश पूजा (दिवाली)
दिवाली की मुख्य रात को माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव और बही-खाता पूजन के लिए विस्तृत सामग्री की आवश्यकता होती है।
प्रतिमा व यंत्र: गणेश-लक्ष्मी जी की नई मूर्ति, कुबेर यंत्र, चांदी का सिक्का, गणेश-लक्ष्मी जी के वस्त्र।
मंडप व कलश: लकड़ी की चौकी, मिट्टी या पीतल का कलश व ढक्कन, आम के पत्ते, ढक्कन के लिए अनाज, सफेद व लाल कपड़ा (आधा मीटर)।
पवित्र द्रव्य (पंचामृत): शुद्ध घी, दूध, दही, शहद, शक्कर, गंगाजल।
तिलक, श्रृंगार व सुगंध: चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अवीर, गुलाल, हल्दी, केसर, इत्र की शीशी, सोलह श्रृंगार, यज्ञोपवीत (5 जनेऊ)।
अनाज व जड़ी-बूटी: चावल, साबुत धनिया, हल्दी की गांठ, कमलगट्टे, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, रंगोली के लिए आटा।
पुष्प व पत्र: कमल का फूल, गुलाब के फूल, माला, तुलसी दल, कुशा, दूर्वा, पान के पत्ते, सुपारी।
नैवेद्य व फल: खीले-बताशे, गट्टे, मुरमुरे, पंच मेवा, मिठाई, छोटी इलायची, लौंग, गन्ना, सीताफल, सिंघाड़ा, तांबूल (लौंग लगा पान का बीड़ा), श्रीफल (नारियल)।
दीपक व बत्ती: मिट्टी के दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, रुई, धूप, अगरबत्ती, कपूर।
बही-खाता पूजन (व्यापार हेतु): लेखनी (कलम), बही-खाता, स्याही की दवात, पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार), जल पात्र व अर्घ्य पात्र।
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4. चतुर्थ दिन: गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट सामग्री
इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर भगवान श्रीकृष्ण और प्रकृति की पूजा की जाती है।
गोवर्धन निर्माण व सजावट: गाय का गोबर (आकृति बनाने हेतु), गेंदे के फूल व पत्तियां, खील-बताशे।
अभिषेक व पूजन: दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल (पंचामृत), रोली, चंदन, अक्षत, मौली, जनेऊ, सिक्के, धूप, अगरबत्ती, तेल/घी का दीपक।
अन्नकूट व भोग:
56 भोग या अन्नकूट सब्जी: कढ़ी, चावल, बाजरा, पूरी और मौसमी सब्जियों की मिश्रित सब्जी।
प्रसाद: पेड़ा, खीर, शुद्ध मिठाई, केला, सेब व मौसमी फल।
अनिवार्य अंग: तुलसी दल (तुलसी के पत्ते)।
परिक्रमा सामग्री: जल का लोटा, खील, बताशे।
5. पंचम दिन: भाई दूज पूजन सामग्री
यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है, जहाँ बहनें भाइयों के तिलक और दीर्घायु की कामना करती हैं।
तिलक व पूजन: रोली, अक्षत (सफेद चावल), कलावा (मौली), दीपक, दुर्वा।
अंगवस्त्र व भेंट: सूखा नारियल (गोला), चांदी का सिक्का, सुपारी, पान का पत्ता, फूल।
भोग व फल: केला, मिठाई।

