Diwali 2026: दिवाली बोनस देने की परंपरा कैसे शुरू हुई? जानिए कब बना कर्मचारियों का कानूनी अधिकार
Diwali bonus history in india: दिवाली भारत का सबसे प्रमुख त्योहार है, जिसकी रौनक और उत्साह बाजारों से लेकर हर घर तक देखने को मिलता है। इस पर्व के आगमन के साथ ही कर्मचारियों में 'दिवाली बोनस' को लेकर विशेष उत्सुकता रहती है। यह बोनस न केवल त्योहार की खुशियों को दोगुना करता है, बल्कि बाजार में तरलता (खरीद क्षमता) को भी बढ़ाता है। हालांकि, दिवाली बोनस केवल एक सांस्कृतिक या कॉरपोरेट परंपरा नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का एक वैधानिक अधिकार भी है।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1940 का 'वेतन विवाद'
भारत में दिवाली बोनस की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1940 के आसपास हुई थी:
साप्ताहिक से मासिक वेतन का फैसला: ब्रिटिश काल में कर्मचारियों को प्रति सप्ताह वेतन दिया जाता था, जिससे उन्हें एक वर्ष (52 सप्ताह) में 52 बार वेतन प्राप्त होता था। जब सरकार ने अचानक मासिक वेतन प्रणाली (12 महीने = 48 सप्ताह की सैलरी) लागू की, तो कर्मचारियों को सीधे 4 हफ्तों की सैलरी का नुकसान होने लगा।
कर्मचारियों का विरोध व मध्य मार्ग: इस वित्तीय नुकसान के खिलाफ कर्मचारियों ने उग्र विरोध दर्ज कराया। असंतोष को शांत करने और कर्मचारियों के हितों का संतुलन बनाए रखने के लिए ब्रिटिश सरकार ने दिवाली पर 4 सप्ताह की अतिरिक्त सैलरी बोनस के रूप में देने का निर्णय लिया।
परंपरा का उदय: इस निर्णय ने न केवल कर्मचारियों की क्षतिपूर्ति की, बल्कि दिवाली जैसे बड़े पर्व पर आर्थिक राहत देकर एक स्थायी परंपरा का आधार रखा।
2. वैधानिक ढांचा: 'पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965'
स्वतंत्रता के पश्चात इस प्रथा को कानून के दायरे में लाया गया:
कानूनी अधिकार: वर्ष 1965 में भारत सरकार द्वारा 'पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट' पारित किया गया, जिसने बोनस को महज एक ऐच्छिक उपहार न रखकर अनिवार्य कानूनी हक बना दिया।
लागू होने की पात्रता: यह कानून उन सभी कारखानों और व्यावसायिक संस्थानों पर लागू होता है जहाँ 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
बोनस की दर: कंपनियों के लिए अपने मुनाफे का न्यूनतम 8.33% बोनस देना अनिवार्य है, जिसे प्रदर्शन और लाभ के आधार पर अधिकतम 20% तक बढ़ाया जा सकता है।
वर्तमान मापदंड: वर्तमान नियमानुसार, यह लाभ उन कर्मचारियों को मिलता है जिनका मासिक वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) ₹21,000 या उससे कम है और जिन्होंने संबंधित वित्तीय वर्ष में कम से कम 30 दिन कार्य किया हो।
3. सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रावधान
केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए बोनस की व्यवस्था अलग नियमों से संचालित होती है:
एड-हॉक/नॉन-प्रोडक्टिविटी बोनस: सरकारी कर्मचारियों को सामान्यतः 'एड-हॉक' (Ad-Hoc) या 30 दिनों के वेतन के बराबर 'नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस' प्रदान किया जाता है।
उद्देश्य: यह बोनस दिवाली अथवा दशहरे के पूर्व वितरित किया जाता है, ताकि त्योहारों के समय कर्मचारियों की क्रय शक्ति मजबूत बनी रहे।
दिवाली बोनस का इतिहास एक औद्योगिक विरोध से शुरू होकर आज कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक बन चुका है। यह व्यवस्था न केवल श्रम का सम्मान करती है, बल्कि त्योहारों के दौरान देश के आर्थिक चक्र को भी गतिशीलता प्रदान करती है।

