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विश्व पृथ्वी दिवस विशेष : आइए धरती का कर्ज उतारें

गुरुवार,अप्रैल 22, 2021
World Earth Day
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दुनिया के अधिकांश देशों में अब 22 अप्रैल को ही वर्ल्ड अर्थ-डे मनाया जाने लगा है। दरअसल यह दिवस अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन की दिमाग की उपज है जो कई वर्षों से
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22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस है। इस साल विश्व पृथ्वी दिवस 2021 की थीम है रिस्टोर द अर्थ। पूरे विश्व में यह दिन हर साल मनाया जाता है।
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घर में फालतू का सामान बहुत होता है और छूट जाती है वे जरूरी वस्तुएं जो हमारे जीवन में संकट के दौरान काम में आती है। कोरोना वायरस जैसे महामरी के दौर में आप अपने घर में रखें ये 15 वस्तुएं जो बहुत काम आएगी।
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जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश काल के अंत और इतिहास का सबसे काला दिन। 13 अप्रैल, 1919 को वैसाखी के दिन 1000 निहत्थे भारतीयों को गोलियों से भून दिया गया था।
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प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को लोग अप्रैल फूल (ऑल फ़ूल्स डे) मनाते या कहें कि बनाते हैं। इस दिवस का प्रचलन ज्यादा तर पश्चिमी देशों में रहा है। पश्चिम का अनुसरण करते हुए अब भारतीय लोग भी इस दिवस को मनाने लगे हैं। हालांकि इसमें मनाने जैसा कुछ भी नहीं होता ...
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भारत में पहले से ही ढहती अर्थव्यवस्था और उसके चलते बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और खेती की बर्बादी जैसी आम आदमी की तमाम दुश्वारियों के बीच कोरोना के खौफ, बीमार स्वास्थ्य सेवाएं, लोगों की मौतें, लॉकडाउन, औद्योगिक शहरों से बड़े पैमाने पर प्रवासी कामगारों के ...
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हम छोटी छोटी बातों पर गौर करें और विचार करें तो हम जल संकट की इस स्थिति से निपट सकते हैं। ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख मैं यहां करना चाहूंगा। कुछ सूक्ष्म दैनिक उपयोग की बातें है जिन पर ध्यान देकर जल की बर्बादी को रोका जा सकता है।
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22 मार्च यानी विश्व जल संरक्षण दिवस। प्रत्येक वर्ष, पूरा विश्व और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता...इन तीन आधारभूत बिंदुओं पर जल संरक्षण की दिवस की नींव है
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चुनाव आयोग ने 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव का जो कार्यक्रम घोषित किया है, उससे एक बार फिर जाहिर हुआ है कि केंद्र सरकार ने अन्य संवैधानिक संस्थाओं की तरह चुनाव आयोग की स्वायत्तता का भी अपहरण कर लिया गया है। चुनाव आयोग पिछले ...
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उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के इलाके में भूंकप यानी धरती के डोलने-थरथराने का सिलसिला नया नहीं है। लेकिन पिछले कुछ समय से यह सिलसिला बेहद तेज हो गया है। इस इलाके के किसी-न-किसी हिस्से में आए दिन भूकंप के झटके लग रहे हैं। पिछले साल मई और जून के महीने में ...
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उत्तराखंड समेत समूचे हिमालयी क्षेत्र में बरसात के मौसम में तो बादल फटने, ग्लेशियर टूटने, बाढ़ आने, जमीन दरकने और भूकंप के झटकों की वजह से जान-माल की तबाही होती ही रहती है। ऐसी आपदाओं का कहर कभी उत्तराखंड, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तो कभी पूर्वोत्तर के ...
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बनने के बाद भारत को तीन बड़ी कमेटियों की अध्यक्षता मिली है, इसमें तालिबान सेंक्शन, काउंटर टेरेरिज्म और लीबिया सेंक्शन कमेटी शामिल है। सुरक्षा परिषद में इन तीन कमेटियों की अध्यक्षता मिलना ये दिखाता है कि ...
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इस दिन की शुभता पर भला कैसे प्रश्न चिन्ह खड़े किए जा सकते हैं? लेकिन आज हम गण के तंत्र का तमाशा देखते रह गए हैं .. किसान आंदोलन हिंसा की भेंट चढ़ चुका है...
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जीवन गतिहीन निस्तेज जड़ता न होकर नित नए प्रवाह की तरह निरंतर गतिशील तेजस्विता का पर्याय है। किसी सरकार का आना-जाना बनना-बिगड़ना महज एक घटना है। प्राय: सरकारें लकीर की फकीर की तरह होती हैं पर जनआंदोलन हर बार सृजनात्मक परिवर्तन की नई-नई लकीरें खींचना ...
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दुनिया के जिन-जिन देशों में कोरोनावायरस का संक्रमण रोकने के लिए टीकाकरण (वैक्सीनेशन) की शुरुआत हुई है, वहां का अनुभव है कि इसकी सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि लोगों का वैक्सीन को लेकर भरोसा बने। उन्हें यह यकीन हो कि वैक्सीन उनको वायरस से ...
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हाल ही में ब्रिटेन की मशहूर पत्रिका 'द इकॉनॉमिस्ट' ने लिखा है कि भारत एक पार्टी वाला देश बनने की ओर बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी की पूरी राजनीति भी इसी बात की पुष्टि कर रही है। अभी तक कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों-सांसदों को तोड़कर ...
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विदा हुए साल 2020 में कोरोना महामारी को छोड दें तो सबसे बडा ट्रेंड क्या माना जाए? कुछ लोग कोरोना के नाम पर लगे देशव्यापी लॉकडाउन को 2020 की सबसे बडी त्रासद परिघटना बता सकते हैं, जो किसी तरह का सोच-विचार और आवश्यक तैयारी करे बगैर ही लगा दिया गया था।
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहला विधानसभा चुनाव 2021 में हो सकता है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने यानी पुनर्गठन के बाद विधान सभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा। फिलहाल वहां पर जम्मू-कश्मीर जिला विकास ...
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जब भारत का विभाजन हुआ था तब खासकर सिंध, कश्मीर, पंजाब और बंगाल के लोगों ने सबसे ज्यादा दर्द झेला था। विभाजन तो पंजाब और बंगाल का ही हुआ था। एक ऐसा दौर था जबकि अंग्रेजों द्वारा बंगाल का विभाजन किया जा रहा था तो संपूर्ण बंगालियों ने एक स्वर में इसका ...
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16 दिसंबर 1971 के दिन भारतीय सेनाओं के पराक्रम और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दृढ़ संकल्प की बदौलत 24 वर्षों से दमन और अत्याचार सह रहे तत्कालीन ईस्ट पाकिस्तान के करोड़ों लोगों को मुक्ति मिली थी।
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'एक देश-एक चुनाव’ का मुद्दा फिर चर्चा में है। इसे चर्चा में लाने वाले वही नरेंद्र मोदी हैं जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सारे चुनाव एक साथ कराने का अपना इरादा जाहिर किया था। इसी बात को उन्होंने हाल ही में 26 नवंबर को संविधान दिवस के ...
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भारत एक लोकतांत्रिक देश है, पर कोरोना काल में हमारे लोकतंत्र के दो हिस्से हो गए।पहला हिस्सा नित नई हलचल वाला लोक, दूसरा हिस्सा लगातार असमंजस में तंत्र। कोरोना ने लोगों के जीवन और मन में न केवल ढेर सारी चुनौतियां और सवाल खड़े कर दिए साथ ही निरापद ...
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पश्चिमी हिमालय की हरी-भरी मंडल घाटी में मौसम अंगड़ाई ले रहा है। गर्मी के पांच महीने गुजर चुके हैं। पेड़ों से अब पत्तियां झड़ने का समय आ गया है। यहां क़रीब ही सिरोली गांव है जिसके पश्चिम की ओर कुछ ही दूर उस पहाड़ी के एक हिस्से पर लंगूरों के सोने की ...
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जैसे ही भारत ने बांग्लादेश को आजादी दिलवाई मुझे अगली टास्क मिली कि मैं एयरपोर्ट पर पहुंचूं और वहां पर आने वाले सभी भारतीय वीआईपी की सुरक्षा का इंतजाम देखूं। तभी मुक्तिवाहिनी का एक सदस्य मेरे पास आया और बोला कि ढाका के ही पास में एक जगह पर एक परिवार ...
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16 दिसंबर भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण‍िम अक्षरों से लिखा वह दिन है,जो पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की याद दिलाता है। 16 दिसंबर 1971, यही वह तारीख थी, जब भारत ने युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। इस युद्ध में करीब 3,900 भारतीय ...
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भारत का अन्नदाता किसान एक बार फिर सड़क पर है। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतरने को मजबूर है। किसानों को डर है कि नए कानूनों से मंडिया खत्म हो जाएंगी साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली ...
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3 दिसंबर, 1984 को भोपाल में आधी रात के बाद सुबह यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली जहरीली गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली थी।
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झगड़ा मनुष्य का गुण है या अवगुण इस पर कोई और टीका टिप्पणी नहीं।पर आज सूचना क्रांति के आभासी युग में शान्त और सरल स्वभाव के दुनियाभर के लोग भी घर बैठे ही झगड़ों के चक्रव्यूह में उलझे ही नहीं, निरन्तर रहने भी लगे हैं।इसी से मैंने शुरूआत में ही स्पष्ट ...
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कांग्रेस एक बार फिर संकट के दौर से गुजर रही है। गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेता पार्टी की नीतियों और नेतृत्व को लेकर मुखर हो रहे हैं। यूं तो कांग्रेस कई बार टूटी है, फिर से खड़ी भी हुई है। एक बार फिर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस टूट सकती है। ...
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आचार्य चाणक्य की कई बातें आज भी प्रासंगिक हैं। चाणक्य के दौर में भी महामारी का प्रकोप था और इससे बचने के लिए कई उपाय किए जाते थे। आओ जानते हैं कि चाणक्य के विचार आपकी किस तरह से सहायता कर सकते हैं।
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इस वक्त संपूर्ण विश्व चायनीज वायरस कोरोना या कोविड-19 से जूझ रहा है। लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई तो कई लोग कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं। बहुतों के व्यापार-व्यवसाय ठप हो चले हैं। परिवार ही नहीं संपूर्ण देश आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है। ...
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रविवार, 11 जनवरी का दिन फ्रांस, सारे यूरोप और संभवतः समूचे विश्व के लिए एक अपूर्व पीड़ा का दिन था। चार ही दिन पहले 12 पत्रकार व चित्रकार इस्लामी आतंकवाद की बलि चढ़ गए थे। उनकी याद में सरकार ने पेरिस में एकजुटता-रैली का आह्वान किया था। अपार जनसागर के ...
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