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लोकतंत्र में नागरिकत्व की प्राण प्रतिष्ठा

गुरुवार,मई 28, 2020
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इन दिनों लद्दाख और सिक्किम से सटी भारत-चीन सीमा पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन इलाकों में चीन ने न सिर्फ अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है, बल्कि उसकी वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार आसमान में मंडरा रहे हैं। उधर नेपाल ने भी तिब्बत, चीन और नेपाल से ...
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लोग यानी खालिस मनुष्य।लोग यानी जिनकी विशिष्ठ या अलग पहचान नहीं।लोग भीड़ नहीं, जीवन की सनातन पहचान होतेहैं।लोगों से कुछ छिपा नहीं होता,वे सब जानते,मानते और पहचानते हैं।दुनियाभर में लोग अपनी सभ्यता को जानते और मानते हैं।लोगों को लोगों के साथ ...
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बिहार में दरभंगा क्षेत्र के एक छोटे से गांव की पंद्रह-वर्षीय बहादुर बालिका ज्योति कुमारी पासवान के अप्रतिम साहस और उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि को अब सत्ता प्रतिष्ठानों से जुड़े हुए लोग लॉकडाउन की देन बताकर उसे सम्मानित और पुरस्कृत करना चाह रहे हैं।
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कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री केयर्स फंड से सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बीच खबरें हैं कि एक आयुर्वेदिक फ़ाउंडेशन के प्रस्ताव पर कुछ अस्पतालों में कोरोना मरीज़ों पर आयुर्वेदिक दवाओं के परीक्षण की अनुमति भी स्थानीय ...
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भारत का संविधान भारत के नागरिकों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है। राज्य के सारे कार्यकलाप और नीतियां नागरिकों के लिए लोकमैत्रीपूर्ण और सभी नागरिकों के प्रति समभावपूर्ण होना संवैधानिक बाध्यता है। भारतीय लोकतंत्र, भारतीय समाज और राज्य व्यवस्था तीनों ने ...
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एक सवाल जो अब तक पूछा नहीं गया है और जिसे संवेदनशीलता के साथ उठाया जाना चाहिए वह यह है कि इस समय ‘ज़्यादा’ ज़रूरी क्या होना चाहिए? मशीन कि इंसान?
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हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव-विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए हमें अवसर प्रदान कर सकें।
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22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस है। सन् 1993 जब से जैव विविधता पर अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाना तय हुआ तब से अब तक हर वर्ष यह दिवस विशेष थीम के साथ केवल वैज्ञानिकों और सीमित सजग नागरिकों द्वारा मनाया जाता रहा है।
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सरकार के कई मंत्री और उच्च पदाधिकारी इन दिनों हिंदी-अंग्रेज़ी के बड़े अख़बारों में नियमित रूप से आलेख लिख रहे हैं। सम्पादक भी उन्हें सम्मान के साथ प्रकाशित कर रहे हैं। यूपीए सरकार के जमाने में जो कुछ मंत्री और न्यायवेत्ता अख़बारों में लिखते थे वे आज ...
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भारत को स्वतंत्र हुए करीब सात दशक हो चुके हैं। मगर कुछ समस्याएं जस की तस हैं। उनमें सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद है। अब तक आतंकवाद से लड़ने के लिए देश की किसी भी सरकार ने न तो कोई ठोस योजना बनाई न ही दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया। इस समस्या को समझे ...
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इस समय सारे अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में हैं। होना भी चाहिए। परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हैं। कब तक ऐसी चलेंगी यह भी पता नहीं है। देश ‘लॉकडाउन-4’ में प्रवेश कर गया है। जनता का एक बड़ा वर्ग मन बना चुका है कि उसे अब चीजों के सामान्य होने या दिखाई भी ...
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इसीलिए म्यूजियम यानी संग्रहालयों का महत्‍व भी मानव इत‍िहास में बढ़ जाता है।
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र‍िपोर्ट के मुताब‍िक हर 4 में से एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन है। जानते हैं क्‍या है हाइपरटेंशन।
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क्या हम नब्बे दिन बाद ही पड़ने वाले इस बार के पंद्रह अगस्त पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के तिरंगा फहराने और सामने बैठकर उन्हें सुनने वाली जनता के परिदृश्य की कल्पना कर सकते हैं?
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वर्तमान समय में पूरा विश्व चीनी कोरोना वायरस की चपेट में है और यह मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। पूरा विश्व एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जिसमें मानव जाति को इस वैश्विक महामारी से बचाने के लिए जद्दोजहद लगातार जारी है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह मान लिया है और देश को भी बता दिया है कि कोरोना महामारी का स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर मुकाबला करने के लिए उनकी सरकार जितना कर सकती थी, वह कर चुकी है। अब इससे ज्यादा की अपेक्षा सरकार से न रखी जाए।
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दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सुलभ कराना इसका मकसद था।
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लाखों की संख्या में जो मज़दूर इस समय गर्मी की चिलचिलाती धूप में भूख-प्यास झेलते हुए अपने घरों को लौटने के लिए हज़ारों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं उन्हें शायद बहुत पहले ही ईश्वरीय संदेश प्राप्त हो चुका होगा कि आगे चलकर समूचे देश को ही आत्मनिर्भर होने के ...
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आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि लॉकडाउन खोलने को लेकर नागरिकों के मन में जैसी चिंताएं हैं वैसी उन लोगों के मनों में बिलकुल नहीं हैं जो दुनिया भर में सरकारों में बैठे हुए हैं। उनकी चिंताएं एकदम अलग हैं। नागरिक आमतौर पर मान बैठता है कि सरकार इस तरह की ...
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