trump health condition: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपनी टैरिफ नीति के बाद अब अपनी सेहत के कारण चर्चा में हैं। उनका स्वास्थ न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि चिकित्सा जगत में भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि यह विषय है दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेहत का। हाल ही में, कुछ मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्यों है ट्रंप की सेहत पर चिंता?
डोनाल्ड ट्रंप, जिनकी उम्र अब 79 वर्ष है, अपनी तेज-तर्रार और अप्रत्याशित शैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में उनके सार्वजनिक व्यवहार और भाषणों में कुछ ऐसे बदलाव देखे गए हैं, जिन्होंने कई विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 'द मिरर' जैसी प्रतिष्ठित मीडिया रिपोर्ट्स और कई मनोवैज्ञानिकों के विश्लेषण ने यह दावा किया है कि ट्रंप की शारीरिक और मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उनका सार्वजनिक व्यवहार, भाषा का लड़खड़ाना और कभी-कभी बोलने में असमर्थता, कुछ ऐसे संकेत हैं जो हमें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। ये केवल साधारण उम्र बढ़ने के लक्षण नहीं हैं, बल्कि यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया की ओर इशारा कर सकते हैं।
क्या है फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया (FTD)?
मनोवैज्ञानिकों के दावों का केंद्र एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसे फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia) कहते हैं। यह डिमेंशिया का एक दुर्लभ प्रकार है जो मस्तिष्क के फ्रंटल (सामने) और टेंपोरल (किनारे) लोब्स को प्रभावित करता है। ये लोब्स हमारे व्यवहार, व्यक्तित्व, भाषा और शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का दावा है कि ट्रंप में इस समस्या के लक्षण स्पष्ट नजर आ रहे हैं। इस बात को पुष्ट करने के लिए मनोवैज्ञानिकों ने उनके कई वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया है, जिसमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अलास्का में उनकी मुलाकात का वीडियो भी शामिल है। उनका मानना है कि इस तरह के विश्लेषण से उनके व्यवहार में आए बदलावों को समझा जा सकता है।
मनोवैज्ञानिकों के दावे और उनके आधार
डॉ. हैरी सेगल और डॉ. जॉन गार्टनर जैसे मनोवैज्ञानिकों ने अपने कार्यक्रम 'श्रिंकिंग ट्रंप' में इन दावों को विस्तार से बताया है। उनके अनुसार, ट्रंप के व्यवहार में कई "टेलेटेल" संकेत हैं:
• भाषा और वाक्-क्षमता में कमी: विशेषज्ञ बताते हैं कि ट्रंप अब पहले की तरह धाराप्रवाह नहीं बोल पाते हैं। उनके वाक्य अक्सर अधूरे रह जाते हैं, और वे एक विषय से दूसरे विषय पर अचानक स्विच कर जाते हैं, जिसे 'टैन्जेंशियल थिंकिंग' कहा जाता है।
• याददाश्त की समस्या: ट्रंप को ऐसी घटनाओं को याद करने की आदत है जो कभी हुई ही नहीं थीं। मनोवैज्ञानिक इसे 'कॉन्फेबुलेशन' कहते हैं, जो डिमेंशिया का एक क्लासिक संकेत है।
• शारीरिक गतिविधियों में गिरावट: विशेषज्ञों ने उनके चलने के तरीके पर भी ध्यान दिया है। वे कहते हैं कि उनके चलने का तरीका बदल गया है और उनका दाहिना पैर झूलता है। यह 'वाइड-बेस्ड गेइट' फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
• व्यवहार में बदलाव: उनके सार्वजनिक व्यवहार में अचानक आने वाले बदलावों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो FTD के लक्षणों से मेल खाते हैं।
यह भी कहा गया है कि अब उनकी शारीरिक गतिविधियों की क्षमता भी बिगड़ने लगी है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि उनके निजी डॉक्टरों ने इन दावों का खंडन किया है और उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ बताया है। व्हाइट हाउस की मेडिकल रिपोर्ट में उनके पैरों में सूजन के लिए 'क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी' जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया है, लेकिन ये दावे FTD के बारे में सीधे तौर पर कोई पुष्टि नहीं करते हैं।
अहम बात यह है कि किसी राष्ट्र के प्रमुख नेता का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उस राष्ट्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए सर्वोपरि होता है। उनके निर्णय लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए, जब उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं उठती हैं, तो यह सार्वजनिक बहस का विषय बन जाती है।