भारत के बाद जी5 की इंटरनेशनल लाइब्रेरी से भी हटी दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज'
पंजाबी एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहा है। इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन 2 दिन बाद ही इसे हटा दिया गया। सरकार की तरफ से ये बात सामने आई कि फिल्म में दिखाए कुछ सीन्स देश के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
हालांकि भारत में बैन के बाद, जी5 इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर फिल्म 'सतलुज' देखी जा रही थी। लेकिन अब ये वहां से भी हटा दी गई है। जी5 की इंटरनेशनल लाइब्रेरी से दिलजीत की फिल्म हट चुकी है, इसकी पुष्टि फिल्म के निर्देशन हनी त्रेहान ने भी की है।
आखिर क्यों लगी फिल्म पर रोक?
खबरों के अनुसार समीक्षा पैनल ने पाया कि फिल्म का कथानक बेहद "असंतुलित और एकतरफा" है। समिति की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फिल्म में पंजाब के उग्रवाद के दौर (1984 से 1994) के दौरान उग्रवादियों और आतंकवादियों द्वारा की गई हिंसा को बहुत कम करके दिखाया गया है। इसके विपरीत, सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित ज्यादतियों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किया गया है।
सबसे संवेदनशील आपत्ति यह है कि फिल्म में पंजाब के एक पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या को एक आतंकवादी घटना के बजाय न्याय के लिए की गई जवाबी कार्रवाई के रूप में चित्रित किया गया है। समिति का मानना है कि इस तरह का चित्रण युवाओं को गुमराह कर सकता है और विदेशों में सक्रिय राष्ट्र विरोधी तत्वों को भारत विरोधी प्रोपेगैंडा फैलाने का मौका दे सकता है।
जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित है कहानी
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे खालरा ने 1984 के दंगों और उसके बाद के दशक में पंजाब में हजारों लावारिस शवों के अवैध दाह-संस्कार के रहस्य से पर्दा उठाया था।
फिल्म में उनके द्वारा की गई जांच और अंततः 1995 में उनके रहस्यमय अपहरण और हत्या की घटनाओं को बेहद संजीदगी से फिल्माया गया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या अहल्यान ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
इस फिल्म को 2022 में घल्लूघारा नाम से सीबीएफसी के पास भेजा गया, जहां गंभीर आपत्तियां उठीं। इसके बाद 2023 में 'पंजाब 95' नाम से फिर को फिर भेजा गया। सीबीएफसी की रिविजन कमेटी ने फिल्म में 120 से 127 कट्स लगाने का आदेश दिया। मेकर्स इसके खिलाफ कोर्ट गए पर बाद में याचिका वापस ले ली।
इसके बाद मेकर्स ने फिल्म को 'सतलुज' के नाम से बिना शोर-शराबे के अचानकर ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज कर दिया। अब भारत समेत ZEE5 के वैश्विक कैटलॉग से भी फिल्म को पूरी तरह हटा दिया गया है।

