Astrology Zodiac Capricorn Lov.htm

Tue, 20 Oct 2026

Notifications

मकर मकर
प्रेम संबंध

मकर राशि वाले जातकों की प्रेम-भावना प्रबल होती है। ये भूखे-प्यासे रह सकते हैं, परन्तु प्रेम के बिना नहीं जी सकते। ये प्रेम के क्षेत्र में प्रेमी से अधिक प्रेम को स्थान दे बैठते हैं और भावलोक में विचरण करते रहते हैं। मकर राशि वालों को कुछ लोग उदासीन प्रकृति का मानते हैं, परन्तु प्रेम तथा सैक्स उन्हें पर्याप्त गतिशील बनाने वाली कुंजियां हैं। मकर राशि वालों को यदि विश्वास नहीं मिल पाता तो ये प्रेम से विरक्त भी हो जाते हैं। वे प्रेम के अभाव में कामुक, सामयिक चेतना के बिना उद्देश्यहीन तथा उत्तरदायित्व के बिना अपनी मूल्यवान विशेषताओं से रहित हो जाते हैं। इस राशि के पुरुष स्त्रियों से नम्रता, कोमलता, सौन्दर्य एवं उनकी विशेषताओं से परिचित होने की आशा रखते हैं। ये लोग प्रेम को जीवन का अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग मानते हैं। इनकी प्रेम तथा धन दोनों में समान रुचि होती हैं। यह प्रवृति भौतिकवादी नहीं होती अपितु व्यावहारिक होती है। प्रेम के मामले में भी ये लोग विवेक से काम लेते हैं तथा धन के महत्व की दृष्टि से औचित्य नहीं होने देते। प्रेम पात्र का चुनाव करते समय इन्हें सतर्क रहना आवश्यक है। प्रेम तथा सैक्स के क्षेत्र में ये अपने अनुभवों को व्यक्त करने वाले होते हैं। कुछ लोगों के मत में इस राशि के लोग प्रेमी की अपेक्षा कर्त्तव्यनिष्ठ हो जाते हैं। ये प्रेम के क्षेत्र में आवेशग्रस्त होते हैं तथा प्रेम के लिए महान त्याग भी कर सकते हैं। विपरीत लिंग से संबंध मकर राशि के जातक प्रेम के अभाव में शारीरिक तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं। ये सैक्स को जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग समझते हैं। अतः इनमें आकर्षण शक्ति का अभाव न होने के बाद भी ये स्वयं विपरीत लिंगियों की ओर आकर्षित होता है लेकिन ये तब तक विपरीत लिंग वाले के चक्कर में नहीं पड़ता जब तक कि इसे दूसरी ओर से उसके प्रतिदान का विश्वास न हो।

वक्री शनि के चलते 4 राशियों को मिलेगा 11 दिसंबर तक फायदा, जल्दी से निपटा लें काम

वक्री शनि के चलते 4 राशियों को मिलेगा 11 दिसंबर तक फायदा, जल्दी से निपटा लें कामज्योतिष की दुनिया में 'कर्मफल दाता' और 'न्यायप्रिया' शनिदेव का हर कदम मानव जीवन की दिशा बदल देता है। फिलहाल शनिदेव देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में विराजमान हैं, जहाँ वे 3 जून 2027 तक रहेंगे। लेकिन इसी बीच, ग्रहों के मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। 27 जुलाई 2026 से 11 दिसंबर 2026 तक शनिदेव अपनी चाल बदलकर 'वक्री' यानी उल्टी दिशा में चलेंगे। वैसे तो शनि की टेढ़ी नज़र से लोग घबराते हैं, लेकिन इस बार की यह वक्री चाल सभी के लिए नुकसानदेह नहीं है। खास तौर पर चार भाग्यशाली राशियों के लिए यह समय किसी वरदान से कम साबित नहीं होंगे। आइए जानते हैं कि 11 दिसंबर तक किन राशियों के अधूरे काम तेज़ी से पूरे होने वाले हैं: