श्रावण मास का चतुर्थ मंगला गौरी व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और उपाय
Fourth Sawan Mangala Gauri Vrat: श्रावण मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत माता पार्वती के स्वरूप 'मंगला गौरी' को समर्पित है। श्रावण मास का चौथा और अंतिम मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शुभ मुहूर्त (25 अगस्त 2026)
शुभ (चौघड़िया) मुहूर्त: प्रातः 09:09 बजे से प्रातः 10:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक (पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ)
अमृत-सर्वोत्तम (चौघड़िया) मुहूर्त: दोपहर 12:22 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
पूजा विधि
तैयारी: प्रातःकाल स्नान कर लाल या गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता मंगला गौरी (पार्वती जी) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
सामग्री (16 की संख्या का महत्व): माँ मंगला गौरी को 16 शृंगार की वस्तुएं, 16 हरी चूड़ियां, 16 लोंग-इलायची, 16 बेलपत्र और 16 भांति के फल/फूल अर्पित करें।
अभिषेक व पूजन: माता को सिंदूर, अक्षत, कुमकुम चढ़ाएं और 16 दीयों की बाती जलाकर आरती करें।
कथा व मंत्र: मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें और 'ॐ मंगलागौर्ये नमः' मंत्र का जाप करें।
मनोकामना पूर्ति के विशेष उपाय
शीघ्र विवाह के लिए: यदि विवाह में बाधा आ रही हो, तो इस दिन मंगला गौरी को 16 गांठ वाली हल्दी की माला और लाल चुनरी अर्पित करें।
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए: शादीशुदा महिलाएँ माता को सिंदूर अर्पित करें और फिर उसी सिंदूर से अपनी मांग भरें। शाम को सुहागिन महिलाओं को 16 शृंगार सामग्री का दान करें।
संतान सुख के लिए: पूजा के समय माता को 16 अनार अर्पित करें और पूजा के पश्चात उन्हें बच्चों में बांट दें।

