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गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

maulana zarjees ansari on geeta
उत्तर प्रदेश के मौलाना जरजिस अंसारी ने एक विवादित बयान देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताता है। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्‍ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे। इस दौरान मौलाना जरजिस अंसारी ने अपनी तकरीर के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 के श्लोक 10 का 'गलत अर्थ' निकालकर अपनी बात को साबित करने की कोशिश भी की।
 

मौलाना जरजिस अंसारी ने क्या कहा:

मौलाना जरजिस अंसारी ने कहा, 'हमारे भाई, अगर बुरा न मानें, तो कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे. यकीन न आए तो श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का 10वां श्लोक देख लीजिए- योगी युञ्जीत सततमात्मानं एकाकी… जिसमें कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन, ईश्वर की पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए।'
 
मौलाना ने आगे कहा, 'आज हिंदू धर्म में चले जाइए, लोग सिर्फ ऐसे हाथ उठाएंगे- ओम नमः शिवाय, बस हो गई पूजा। ये हिंदू-मुस्लिम का विषय नहीं है. अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें। योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के और अगर अपनी किताबें पढ़ लें, तो यकीन मानिए इस्लाम से इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे।
 

श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के दसवें श्लोक का सही अर्थ क्या है?

यह संस्कृत श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय (अथ षष्ठोऽध्यायः- आत्मसंयमयोग) का 10वां श्लोक है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने ध्यान और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर चलने वाले साधक (योगी) के लिए आवश्यक परिस्थितियों और मानसिक स्थिति का वर्णन किया है।
 

श्लोक:

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥- अध्याय 6, श्लोक 10वां
भावार्थ: मन और इन्द्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगाए॥10॥
 
श्लोक का सरल सरल अर्थ: "योगी पुरुष को चाहिए कि वह अकेले में, एकांत स्थान पर रहकर, अपने मन और इंद्रियों को पूरी तरह वश में रखते हुए, सभी प्रकार की इच्छाओं और संग्रह करने की भावना से मुक्त होकर निरंतर अपने मन को परमात्मा के ध्यान में लगाए।"
 
संपूर्ण गीता पढ़ने के लिए आगे क्लिक करें: श्रीमद्भगवद्गीता
 

क्या है इस्लाम का इतिहास?

शोधकर्ताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आज से लगभग 5,200 वर्ष पूर्व यानी 3112 ईसा पूर्व हुआ था। वर्ष 2025 में मनाई गई गीता जयंती, श्रीमद्भगवद्गीता की 5162वीं वर्षगांठ थी और अब वर्ष 2026 में 5163वीं जयंती मनाई जाएगी। इसका अर्थ है कि श्रीकृष्ण ने 5163 वर्ष पूर्व अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।
 
दूसरी ओर, इस्लाम के संस्थापक पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्मदिन हिजरी रबीउल अव्वल महीने की 12 तारीख को मनाया जाता है। 571 ईस्वीं को शहर मक्का में पैगंबर साहब हज़रत मुहम्मद सल्ल. का जन्म हुआ था। मक्का सऊदी अरब में स्थित है। उनके जन्म के बाद ही इस्लाम अस्तित्व में आया था। श्रीकृष्‍ण के जन्म के करीब 3683 वर्ष के बाद इस्लाम के संस्थापक पैगंबर हज़रत मुहम्मद का जन्म हुआ था। इस्लाम धर्म का उदय आज से 1400 वर्ष पहले हुआ था। मान्यता के अनुसार इस्लाम का जन्म मक्का और मदीना में हुआ था।
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