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ब्रिक्स से भारत क्या हासिल कर सकता है...?

modi putin
नई दिल्ली पर इस समय दुनिया भर की निगाहें है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में तनाव, शक्ति-संघर्ष और नए ध्रुवीकरण की स्थिति दिखाई दे रही है, भारत के लिए ब्रिक्स का यह शिखर सम्मेलन अपनी कूटनीतिक क्षमता दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर है। रूस, चीन और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देशों के नेताओं के साथ संवाद के माध्यम से भारत शांति, सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का संदेश दे सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका को भी यह स्पष्ट किया जा सकता है कि भारत पर दबाव बनाने की उसकी कोशिशें कामयाब नहीं हो सकती।
 
ब्रिक्स ने भारत को अपनी कूटनीतिक ताकत और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रदर्शन करते हुए दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश देने का अवसर दिया है। ऐसे समय में जब विश्व अनेक राजनीतिक और सामरिक तनावों से गुजर रहा है, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का भारतीय प्रधानमंत्री से मिलना विशेष महत्व रखता है। यह मुलाकातें बताती हैं कि भारत विभिन्न शक्ति-केंद्रों के बीच संवाद कायम रखने की क्षमता रखता है। अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों के बावजूद रूस, चीन और ईरान से संवाद भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को रेखांकित करता है। ब्रिक्स भारत के लिए कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।
 
बातचीत की कूटनीति से मिलने वाले संदेशों को भारत भली-भांति समझता है। रूस, चीन और ईरान के साथ संवाद बनाएं रखना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का संकेत है। ब्रिक्स भारत के लिए आर्थिक सहयोग  के साथ बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने का माध्यम भी है। चीन और रूस की दृष्टि से ब्रिक्स को पश्चिमी नेतृत्व वाली व्यवस्था के संतुलन के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षा दिखाई देती है और दीर्घकाल में इसे जी-7 के प्रभाव का विकल्प बनाने की चर्चा भी होती है। भारत की प्राथमिकता इससे अलग है, वह ब्रिक्स को किसी विरोधी गुट में बदलने के स्थान पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, विकासशील देशों की आवाज और वैश्विक संस्थाओं में सुधार का मंच बनाना चाहता है। यही अंतर भारत की कूटनीति को रूस और चीन से अलग पहचान देता है। ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन से भारत बहुत कुछ हासिल करना चाहेगा, चीन से स्थिर और अच्छे संबंध भारत के आर्थिक तथा रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से भारतीय उद्योगों को बड़ा बाजार मिल सकता है और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते है। सीमा पर तनाव कम होने से भारत अपने संसाधनों और सैन्य क्षमता का उपयोग अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेगा। दोनों देश जलवायु परिवर्तन, वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ा सकते हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी और भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगा। चीन से अच्छे संबंध होने पर भारत को आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक स्तर पर कई बड़े फायदे मिल सकते है। भारत को चीन से कम कीमत पर कच्चा माल, पुर्जे और मशीनरी मिल सकती है। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम हो सकती है। भारतीय उद्योगों को उन्नत चीनी तकनीक और निवेश का लाभ मिल सकता है, जिससे देश में औद्योगिक विकास तेज हो सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रास्ते खुलने और सप्लाई चेन के बेहतर होने से वस्तुओं की आवाजाही आसान हो जाती है। 
 
भारत चीन सीमा पर तनाव कम होने से भारत अपनी सेना और संसाधनों का उपयोग रक्षा के बजाय देश के विकास और बुनियादी ढांचा मजबूत करने में कर सकता है। राजनयिक वार्ताओं और आपसी सहमति से दोनों देशों के बीच का अविश्वास कम होता है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर शांति बनी रहती है।  ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और चीन के मिलकर काम करने से विकासशील देशों की आवाज वैश्विक स्तर पर मजबूत होती है। दुनिया के ये दोनों सबसे बड़े विकासशील देश यदि आपसी सहयोग बढ़ाएं, तो पूरे एशिया में आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
 
 
भारत को रूस से मुख्यतः सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग चाहिए। रक्षा क्षेत्र में आधुनिक हथियारों, रखरखाव, कलपुर्जों और संयुक्त रक्षा उत्पादन में सहयोग भारत के लिए महत्वपूर्ण है। ऊर्जा के क्षेत्र में सस्ता और विश्वसनीय कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस तथा परमाणु ऊर्जा सहयोग भारत की जरूरतों को पूरा कर सकता है। रूस से अंतरिक्ष, परमाणु तकनीक, विमानन और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग भी उपयोगी है। इसके साथ भारत चाहता है कि रूस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान करे तथा चीन और पाकिस्तान से जुड़े मामलों में भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझे।
 
 
भारत और ईरान के संबंध रणनीतिक, संतुलित और पारस्परिक हितों पर आधारित होने चाहिए। ईरान भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुँच का महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाना भारत के हित में है। ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और सुरक्षा के क्षेत्रों में भी सहयोग मजबूत किया जाना चाहिए। ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम कराने और युद्धविराम की दिशा में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ब्रिक्स भारत को इसके लिए एक प्रभावी कूटनीतिक मंच उपलब्ध कराता है। भारत के रूस, ईरान और पश्चिमी देशों के साथ संबंध हैं तथा इजराइल के साथ भी उसके मजबूत रणनीतिक संबंध है। यही संतुलित स्थिति भारत को संवाद की पहल करने की  खास क्षमता देती है। भारत ब्रिक्स के माध्यम से युद्धविराम, मानवीय सहायता और बातचीत का वातावरण बनाने की कोशिश कर सकता है। यदि भारत इस अवसर का सफलतापूर्वक उपयोग करता है तो उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा दोनों मजबूत होंगी।
 
ट्रम्प की दबाव की राजनीति का जवाब भारत को टकराव से नहीं, अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करके देना चाहिए। इसके लिए ब्रिक्स भारत के पास उपलब्ध एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच है। रूस, चीन और ईरान के साथ संतुलित संबंधों के माध्यम से भारत अमेरिका और पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दे सकता है कि उसकी विदेश नीति किसी एक शक्ति-गुट के दबाव में संचालित नहीं होती, बल्कि उसके राष्ट्रीय हित सर्वोच्च हैं।
 
भारत को अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत रखते हुए रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग, चीन के साथ संवाद और आर्थिक संबंध तथा ईरान के साथ संपर्क, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए। ब्रिक्स में भारत की सक्रिय भूमिका यह दिखा सकती है कि वह पश्चिम के विरोध में किसी नए गुट का हिस्सा नहीं है, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपने लिए स्वतंत्र और प्रभावशाली स्थान बना रहा है।
 
ट्रम्प के लिए यह स्पष्ट संदेश हो सकता है कि भारत के साथ संबंध दबाव और धमकी से नहीं, सम्मान, समानता और पारस्परिक हितों के आधार पर आगे बढ़ सकते है। भारत के पास विकल्प है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस, चीन, ईरान, अमेरिका तथा अन्य शक्तियों के साथ संबंधों का संतुलन तय कर सकता है। यही ब्रिक्स के माध्यम से भारत की कूटनीतिक शक्ति का वास्तविक प्रदर्शन होगा।
लेखक के बारे में
डॉ.ब्रह्मदीप अलूने
(अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ).... और पढ़ें
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