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दो भारतीय पत्रकारों को प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार, जानिए कौन है और किस खबर के लिए मिला ये सम्मान?
न्यूयॉर्क: भारतीय पत्रकार आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा को डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी पर उनके काम के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सोमवार को घोषित इस पुरस्कार में आनंद और शर्मा को 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में यह सम्मान मिला। इस पुरस्कार को उन्होंने ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया।
बता दें कि पुलित्जर एक बेहद प्रतिष्ठित सम्मान है जो पत्रकारिता, साहित्य और संगीत में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। लंबे समय के बाद भारत को मिले इस सम्मान से मीडिया जगत में चर्चा और उत्साह है।
किस कैटेगरी में मिला पुलित्जर पुरस्कार : पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, 'ट्रैप्ड' शीर्षक से ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई यह खबर भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी बयां करती है, जिन्हें जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' किया था। तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम से तैयार इस खबर ने डिजिटल निगरानी और साइबर ठगी के बढ़ते वैश्विक खतरे को बेहद प्रभावशाली तरीके से उजागर किया।
क्या है पुलित्जर पुरस्कार : कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में गिना जाता है। इसे पत्रकारिता का ऑस्कर भी कहा जाता है। इसकी स्थापना हंगेरियन-अमेरिकी पत्रकार और प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के बाद 1917 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पत्रकारिता, साहित्य, और संगीत रचना में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। पुलित्जर पुरस्कार कुल 21 श्रेणियों में दिया जाता है, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है: पत्रकारिता, साहित्य और नाटक और संगीत।
कैसे होता है पुलित्जर पुरस्कार के लिए चयन : पुलित्जर पुरस्कार के विजेता का चुनाव पुलित्जर प्राइज बोर्ड करता है। यह एक स्वतंत्र बोर्ड होता है, जो सभी प्रतिभागियों का बारीकी से मूल्यांकन करता है। पुरस्कार के रूप में विजेताओं को एक प्रमाणपत्र और 15000 डॉलर की नकद राशि दी जाती है।
पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीय : बता दें कि गोविंद बिहारी लाल पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्हें आजादी से पहले 1937 में पुलित्जर पुरस्कार मिला था। इसके बाद 2000 में झुंपा लाहिड़ी को उनकी किताब 'इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज' के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला। 2011 में सिद्धार्थ मुखर्जी को उनकी पुस्तक 'द एम्परर ऑफ ऑल मैलडीज' के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया। 2018-2022 में दानिश सिद्दीकी को फीचर फोटोग्राफी के लिए मरणोपरांत पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
बता दें कि पुलित्जर एक बेहद प्रतिष्ठित सम्मान है जो पत्रकारिता, साहित्य और संगीत में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। लंबे समय के बाद भारत को मिले इस सम्मान से मीडिया जगत में चर्चा और उत्साह है।
किस कैटेगरी में मिला पुलित्जर पुरस्कार : पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, 'ट्रैप्ड' शीर्षक से ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई यह खबर भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी बयां करती है, जिन्हें जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' किया था। तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम से तैयार इस खबर ने डिजिटल निगरानी और साइबर ठगी के बढ़ते वैश्विक खतरे को बेहद प्रभावशाली तरीके से उजागर किया।
कैसे होता है पुलित्जर पुरस्कार के लिए चयन : पुलित्जर पुरस्कार के विजेता का चुनाव पुलित्जर प्राइज बोर्ड करता है। यह एक स्वतंत्र बोर्ड होता है, जो सभी प्रतिभागियों का बारीकी से मूल्यांकन करता है। पुरस्कार के रूप में विजेताओं को एक प्रमाणपत्र और 15000 डॉलर की नकद राशि दी जाती है।
पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीय : बता दें कि गोविंद बिहारी लाल पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्हें आजादी से पहले 1937 में पुलित्जर पुरस्कार मिला था। इसके बाद 2000 में झुंपा लाहिड़ी को उनकी किताब 'इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज' के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला। 2011 में सिद्धार्थ मुखर्जी को उनकी पुस्तक 'द एम्परर ऑफ ऑल मैलडीज' के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया। 2018-2022 में दानिश सिद्दीकी को फीचर फोटोग्राफी के लिए मरणोपरांत पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
