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क्या TMC और NCP लौटेंगे कांग्रेस में? BJP के खिलाफ महागठबंधन 2.0
Congress TMC Merger: भारतीय राजनीति में इस समय विपक्षी एकजुटता और क्षेत्रीय दलों के भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है। शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक हालिया बयान ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और विशेषकर कांग्रेस से अलग होकर बने दलों के बीच खलबली मचा दी है।
संजय राउत ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए सुझाव दिया है कि कांग्रेस से टूटकर बनी क्षेत्रीय पार्टियां— जैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) को अब वापस अपनी मूल पार्टी (कांग्रेस) में लौट आना चाहिए यानी अपना विलय कर लेना चाहिए। यदि राउत की बात पर अमल होता है तो इसमें कोई संदेह नहीं कि 2029 के चुनाव में विपक्ष को इसका लाभ मिल सकता है।
संजय राउत ने क्यों दिया यह बयान?
संजय राउत का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'एक राष्ट्र, एक पार्टी' की कथित रणनीति का मुकाबला करने के लिए विपक्ष का मजबूत होना बेहद जरूरी है। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
- अस्तित्व का संकट : भाजपा जिस तरह से क्षेत्रीय दलों को कमजोर कर रही है, उससे बचने के लिए सभी को एक छतरी के नीचे आना होगा।
- मजबूत कांग्रेस, मजबूत विपक्ष : राउत के अनुसार, अगर कांग्रेस से निकले हुए दल वापस उसमें मिल जाते हैं, तो मुख्य विपक्षी पार्टी इतनी ताकतवर हो जाएगी कि वह सीधे तौर पर भाजपा को चुनौती दे सकेगी।
- अंदरूनी खींचतान : यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी खेमे (खासकर पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र) में कई तरह के अंदरूनी समीकरण बदल रहे हैं।
क्या हैं इसके सियासी मायने?
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या वाकई ऐसी 'घर वापसी' संभव है? आइए मौजूदा संदर्भों से इसे समझते हैं-
भाजपा का पलटवार और क्षेत्रीय दलों की नजर : संजय राउत के इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सत्तापक्ष का कहना है कि यह विपक्ष की कमजोरी और डर को दर्शाता है। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्रीय दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे को चुना है।आदरणीय पवार साहेबांच्या उपस्थितीत मुंबईत झालेल्या राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार पक्षाच्या २७ व्या वर्धापन दिनाच्या समारंभात मनोगत व्यक्त करण्याची संधी मिळाली. निष्ठा विचारांशी आणि बांधिलकी जनतेशी ही बाब लक्षात घेऊन पुढील काळात जनतेच्या हितासाठी रस्त्यावरच्या… pic.twitter.com/B7H03ADriq
— Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 10, 2026
संजय राउत की यह 'पिच' भले ही कागज़ पर विपक्ष को मजबूत दिखाने वाली हो, लेकिन जमीन पर ममता बनर्जी और शरद पवार जैसे कद्दावर क्षत्रपों को अपनी दशकों पुरानी पार्टियों का वजूद कांग्रेस में विलीन करने के लिए मनाना टेढ़ी खीर साबित होगा। फिर भी, 2026 के इस सियासी दौर में यह साफ है कि क्षेत्रीय दलों की नजरें अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले धड़े पर टिकी हैं।
क्या 2029 के चुनाव में होगा विपक्ष को फायदा?
इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि टीएमसी और एनसीपी जैसे दल यदि खुद का कांग्रेस में विलय करते हैं तो वे 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका सीधा फायदा मिलेगा। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में अक्सर कांग्रेस और इन क्षेत्रीय दलों (TMC, NCP) के बीच त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है, जिससे भाजपा-विरोधी वोट बंट जाते हैं। विलय के बाद सीधे तौर पर वन-टू-वन (एक के मुकाबले एक) लड़ाई होगी, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है।
इसके साथ ही INDIA ब्लॉक में सबसे बड़ी समस्या सीटों के बंटवारे और स्थानीय नेताओं के आपसी मतभेदों को लेकर होती है। यदि ये पार्टियां एक हो जाती हैं, तो टिकट बंटवारे का विवाद काफी हद तक सुलझ जाएगा। इन मजबूत क्षेत्रीय ताकतों के वापस आने से कांग्रेस का अखिल भारतीय स्वरूप और मजबूत होगा। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के सामने खुद को इकलौते और मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने में कांग्रेस को मदद मिलेगी।
तृणमूल कांग्रेस के पास पश्चिम बंगाल में और शरद पवार गुट के पास महाराष्ट्र में एक बेहद मजबूत और वफादार जमीनी कैडर है। इन क्षेत्रीय कैडरों का कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे के साथ मिलना संगठन को नई ऊर्जा दे सकता है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं कि इसका फायदा विपक्ष को मिलेगा, लेकिन इसमें कुछ पेचीदगियां भी हैं, जिनसे निपटना इन दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
