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अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी
Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच जंग तेज हो गई है। अमेरिका के नए सैन्य हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बंद करने का एलान किया है। IRGC ने चेतावनी दी है कि यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाएगा। ALSO READ: ओमान तट पर वाणिज्यिक पोत पर हमला, 3 भारतीय लापता, भारत ने की कड़ी निंदा
आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा और अमेरिका के नए सैन्य हमलों के बाद यह फैसला लिया गया है। आदेश के अनुसार तेल टैंकरों, मालवाहक जहाजों और अन्य सभी प्रकार के समुद्री जहाजों की आवाजाही तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। ईरानी मीडिया के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक बलों और आईआरजीसी की नौसेना के बीच भारी तनाव और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। आईआरजीसी नौसेना का दावा है कि उसने दो ऐसे जहाजों को निशाना बनाया जो उसकी अनुमति के बिना जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहे थे।
ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी हमले
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये हमले आत्मरक्षा में किए गए हैं। हाल ही में ईरान द्वारा अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने की घटना के बाद यह कार्रवाई की गई। हेलिकॉप्टर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गश्त पर था। CENTCOM ने कहा कि ये हमले कमांडर-इन-चीफ (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) के निर्देश पर किए जा रहे हैं।
कहां है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण और प्रमुख जलमार्ग है। ये उत्तर में फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और उससे आगे अरब सागर से जोड़ता है। ये अपने सबसे संकरे बिंदु पर 33 किमी चौड़ा है, जबकि शिपिंग लेन सिर्फ 3 किमी चौड़ी है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी होर्मुज जलडमरूमध्य से काफी नजदीक है। ALSO READ: ईरान ने मार गिराया अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर, US ने कशम और बंदर अब्बास पर दागी मिसाइलें; IRGC का पलटवार
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 5वां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके अलावा साल 2024 में विश्व के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का भी करीब पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरा, मुख्य रूप से कतर से।
एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के डेटा के मुताबिक, साल 2022 की शुरुआत और पिछले महीने के बीच, हर दिन लगभग 17.8 मिलियन से 20.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल, कंडेनसेट और अन्य ईंधन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर निकलता था। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के सदस्य देश- सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक अपने ज्यादातर कच्चे तेल का निर्यात इसी रूट से करते हैं, खासतौर से एशिया को। हार्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा है तो अमेरिका ने इसके आसपास नाकेबंदी की है।
महंगाई की चपेट में आएंगे कई देश
होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना, डोनाल्ड ट्रम्प के लिए मुश्किलें बढाने जैसा होगा। दरअसल, इससे तेल की कीमतों में उछाल आएगा, जिससे पूरी दुनिया में तत्काल प्रभाव से महंगाई बढ़ जाएगी। लेकिन, ये ईरान के लिए भी आर्थिक रूप से आत्म-क्षति होगी, क्योंकि ईरान का तेल भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, होर्मुज को बंद करने से खाड़ी के अरब देश भी अपने हितों की रक्षा के लिए युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
edited by : Nrapendra Gupta
